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Ayodhya: रामकथा संग्रहालय में सहेजे जाएंगे उत्खनन में मिले ऐतिहासिक पुरावशेष, मंदिर के हक में फैसले का थे आधार
Mon, 02 Feb 2026 08:00 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 02 Feb 2026 08:00 PM IST
सार
2003 में राम जन्मभूमि में हुए उत्खनन में एक हजार से अधिक पुरावशेष मिले थे। यही अवशेष मंदिर के हक में फैसले का आधार बने थे। अब इन्हें रामकथा संग्रहालय में सुरक्षित और प्रदर्शित किया जाएगा।
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तेजी से चल रहा रामकथा संग्रहालय के सुंदरीकरण का कार्य।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
राम जन्मभूमि परिसर में वर्ष 2003 में न्यायालय के आदेश पर कराए गए पुरातात्त्विक उत्खनन में प्राप्त एक हजार से अधिक पुरा अवशेषों को अब रामकथा संग्रहालय में सुरक्षित और प्रदर्शित किया जाएगा। ये वही पुरावशेष हैं, जिन्होंने राम मंदिर के पक्ष में आए ऐतिहासिक फैसले की नींव मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी।
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बताया जा रहा है कि उत्खनन में प्राप्त सामग्री को वैज्ञानिक पद्धति से संरक्षित कर संग्रहालय में रखा जाएगा, ताकि देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालु और शोधकर्ता अयोध्या के प्राचीन वैभव और सांस्कृतिक इतिहास को प्रत्यक्ष देख-समझ सकें। रामकथा संग्रहालय के निदेशक डॉ. संजीव सिंह ने बताया कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की ओर से 2003 में अयोध्या के राम जन्मभूमि परिसर में किए गए उत्खनन में विवादित ढांचे के नीचे 10वीं शताब्दी के एक विशाल मंदिर के अवशेष मिले थे। यह उत्खनन डॉ. बीआर मणि के नेतृत्व में मार्च से अगस्त 2003 के बीच हुआ, जिसमें 90 खाइयों में खोदाई की गई।
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बताया कि खोदाई में गोल मंदिर, मकर प्रणाल (मगरमच्छ के मुंह वाली जल निकासी), कमल के आकार की नक्काशीदार ईंटें और स्तंभों के आधार मिले, जो उत्तर भारतीय मंदिर वास्तुकला से मेल खाते थे। एएसआई रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकला कि विवादित ढांचा किसी खाली जगह पर नहीं, बल्कि एक पूर्व-मौजूद बड़ी संरचना के ऊपर बनाया गया था, जिसके नीचे 50 स्तंभों के आधार और 50 मीटर लंबी दीवार मिली। कई तरह की वस्तुओं, जैसे सजावटी ईंटें, मूर्तियों के अवशेष और पशु-चित्रों वाले स्तंभ ने उस स्थान पर पहले मंदिर होने के संकेत दिए। संजीव सिंह के अनुसार खोदाई में मिले अधिकांश अवशेष ट्रस्ट को मिल गए हैं, कुछ एएसआई के पास संरक्षित हैं, जल्द ही यह भी प्राप्त किया जाएगा।
पद्म सम्मान से बढ़ा उत्खनन का गौरव
- डॉ. संजीव सिंह ने बताया कि 2003 उत्खनन कार्य में शामिल रहे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के तत्कालीन निदेशक वीआर मणि को हाल ही में पद्मश्री से सम्मान से नवाजा गया है। इसे अयोध्या उत्खनन और भारतीय पुरातत्व के क्षेत्र में उनके योगदान की बड़ी मान्यता के रूप में देखा जा रहा है। रामकथा संग्रहालय में इन पुरा अवशेषों के संरक्षण और प्रदर्शन से आने वाली पीढ़ियों को न केवल राम जन्मभूमि आंदोलन के ऐतिहासिक पक्ष को समझने का अवसर मिलेगा, बल्कि भारत की प्राचीन मंदिर परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से भी साक्षात्कार होगा।