फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Ayodhya: Historian KK Mohammed raised the issue of Gyanvapi and Mathura birthplace, gave advice to Muslims

अयोध्या: इतिहासकार केके मोहम्मद ने उठाया ज्ञानवापी और मथुरा जन्मभूमि का मुद्दा, मुसलमानों को दी नसीहत

Sun, 29 Sep 2024 07:16 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला संवाद, अयोध्या
अमर उजाला संवाद, अयोध्या Published by: रोहित मिश्र Updated Sun, 29 Sep 2024 07:16 AM IST
सार

Gyanvapi controversy: इतिहासकार पद्मश्री डॉ. केके मोहम्मद ने मुसलमानों को समझाइश देते हुए कहा कि उन्हें ज्ञानवापी और मथुरा जन्मभूमि परिसर को हिंदुओं को सौंप देना चाहिए। 

विज्ञापन
Ayodhya: Historian KK Mohammed raised the issue of Gyanvapi and Mathura birthplace, gave advice to Muslims
केके मोहम्मद। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च (आईसीएचआर) के सदस्य व पद्मश्री डॉ. केके मोहम्मद ने कहा कि ज्ञानवापी व मथुरा मुसलमानों को खुद ही हिंदुओं को सौंप देना चाहिए। हिंदुओं को भी रुकना चाहिए। एक लंबी लिस्ट लेकर नहीं चलना चाहिए। मुसलमानों से जो गलतियां हुई हैं यह उनके लिए एक प्रायश्चित है।

विज्ञापन


डॉ. केके मोहम्मद शुक्रवार को साकेत महाविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। डॉ. मोहम्मद ने कहा कि विवादित स्थान पर आर्कियोलॉजिकल सर्वे में खुदाई के बाद जो साक्ष्य मिले थे वह सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर के हक में फैसले का आधार बने थे। उन्होंने बताया कि खुदाई में 90 आधार स्तंभ मिले थे। जो भव्य मंदिर की ओर गवाही दे रहे थे। विष्णु हरि शिला मिली थी। कई मूर्तियां मिली थीं। 
विज्ञापन


मनुष्य के पैर का हिस्सा मिला था। यह भी मस्जिद में नहीं मिलता है। सांप की आकृति भी मिली थी। उन्होंने स्क्रीन पर तस्वीर के माध्यम से खुदाई में मिले साक्ष्यों को दिखाया। कई विदेशी यात्रियों व इतिहासकारों ने भी अपने यात्रा संस्मरण में राम मंदिर का जिक्र किया है। इस दौरान प्रो. हरी नारायण दुबे, आईसीएचआर से प्रो. सुस्मिता पांडेय , इग्नू से डॉ. हर्षवर्धन सिंह, प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा सहित अन्य इतिहास कार मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन


इतिहासकारों के मन में ऋषि दृष्टि होनी चाहिए: डॉ. कृष्ण गोपाल
अयोध्या। साकेत महाविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित संगोष्ठी में संघ के सह सहकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि भारत की मौलिक दृष्टि है कि जो बीत गया उसे भूल जाओ। हमने सारे इतिहास को एक रस में देखा, क्रमबद्ध देखा। हम 432 करोड़ वर्ष का इतिहास बताते हैं जबकि पश्चिमी सभ्यता 6000 ईशा पूर्व इतिहास में ही सिमट कर रह जाते हैं। हमारी इतिहासकारों को इस पर शोध करना होगा कि इतनी विविधता के बावजूद भी एक मन खड़ा करने में हम कैसे कामयाब हो पाए हैं। दुनिया के पास मूल्य नहीं है वे अपने स्वभाव से संघर्ष कर रहे हैं दुनिया विनाश की ओर बढ़ रही है। दुनिया को मूल्य हम देंगे। मानवता को बचाने का दायित्व हमारे कंधों पर है। इतिहासकारों के मन में ऋषि दृष्टि होनी चाहिए। विविधता में एकत्व का सूत्र खोजना ही ऋषि दृष्टि है। इतिहास के विद्यार्थी शोध करें की विविधता के बाद भी हम एक कैसे रहे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed