अयोध्या में दीपोत्सव: 30 लाख दीपों की रोशनी की साक्षी बनी रामनगरी, बना नया रिकॉर्ड; हुआ श्रीराम का राज्याभिषेक
Ayodhya deepotsav 2026: अयोध्या में शनिवार की शाम दीपोत्सव का आयोजन हुआ। एक साथ करीब 30 लाख दीपों की रोशनी से पूरी राम नगरी जगमग हो उठी।
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रामनगरी शनिवार को एक बार फिर इतिहास की साक्षी बनी। अवसर था दीपोत्सव का, जब भक्ति, आस्था, संस्कृति और उल्लास के अद्भुत संगम ने पूरी अयोध्या को उत्सव के रंग में रंग दिया। सुबह साकेत महाविद्यालय से निकली श्रीराम राज्याभिषेक शोभायात्रा से शुरू हुआ उत्सव देर शाम तक 30 लाख दीपों की रोशनी, सरयू की महाआरती, ड्रोन शो और आतिशबाजी के बीच अपने चरम पर पहुंचा। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की मौजूदगी ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।
दीपोत्सव का शुभारंभ सुबह 10 बजे साकेत महाविद्यालय से श्रीराम राज्याभिषेक शोभायात्रा के साथ हुआ। करीब तीन किलोमीटर की दूरी तय कर शोभायात्रा रामकथा पार्क पहुंची। इसमें प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को दर्शाती 14 झांकियों के साथ रामायण के सातों कांडों पर आधारित झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। 14 राज्यों के 500 से अधिक कलाकारों ने अपनी-अपनी लोकसंस्कृतियों और परंपराओं की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।
शोभायात्रा जैसे ही साकेत महाविद्यालय से आगे बढ़ी, रामनगरी की सड़कें आस्था और उल्लास से भर उठीं। जगह-जगह खड़े अयोध्यावासियों ने पुष्पवर्षा कर कलाकारों का स्वागत किया। कहीं जय श्रीराम के जयघोष गूंज रहे थे तो कहीं लोग मोबाइल में इस ऐतिहासिक पल को कैद करने में जुटे थे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में उत्साह देखते ही बन रहा था।
एक साथ जले 30 लाख सात हजार 518 दीप
30 लाख दीप जलाने के लक्ष्य को पीछे छोड़ते हुए इस बार अयोध्या में एक साथ 30,07,518 (तीस लाख सात हजार पाँच सौ अट्ठारह) दीये प्रज्वलित किए गए। दीपोत्सव के नोडल अधिकारी प्रो. संत शरण मिश्र ने यह आधिकारिक जानकारी दी।
उपराष्ट्रपति, सीएम, राज्यपाल व संतों ने किया राजतिलक
इसी बीच उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का आगमन हुआ और रामकथा पार्क में श्रीराम के राज्याभिषेक की प्रक्रिया शुरू हुई। रामचरितमानस की चौपाई ''प्रथम तिलक वशिष्ठ मुनि कीन्हा, पुनि सब बिप्रन्ह आयसु दीन्हा। सुत बिलोकि हरषीं महतारी, बार बार आरती उतारी...'', मानो मंच पर साकार हो उठी। सबसे पहले उपराष्ट्रपति ने प्रभु श्रीराम का राजतिलक किया। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने तिलक कर आरती उतारी। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक सहित मंत्रिमंडल के अन्य सहयोगियों और रामनगरी के प्रमुख संतों ने भी बारी-बारी से राम दरबार की आरती की।
श्रीराम की अगवानी करने हैलीपैड पहुंचे सीएम योगी
दोपहर करीब ढाई बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रामकथा पार्क पहुंचे। इसके बाद वह उपराष्ट्रपति और राज्यपाल के साथ राम मंदिर पहुंचे। यहां तीनों अतिथियों ने रामलला की आरती उतारी और दीप प्रज्वलित कर प्रतीकात्मक रूप से दीपोत्सव का शुभारंभ किया। राम मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद सभी रामकथा पार्क पहुंचे। यहां हेलीकॉप्टर से पहुंचे भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान के स्वरूपों का विधिविधान से पूजन-अर्चन किया गया।
रामकथा पार्क में सजे रामदरबार के मंच पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भगवान श्रीराम का प्रतीकात्मक राज्याभिषेक किया। राजतिलक के साथ ही रामनगरी में दीपोत्सव की भव्यता अपने चरम पर पहुंच गई। घाटों और मंदिरों सहित अयोध्या के विभिन्न हिस्सों में 30 लाख दीपों की रोशनी फैलने लगी।
इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उपराष्ट्रपति के साथ राम की पैड़ी पहुंचे। यहां 2100 से अधिक लोगों ने एक साथ सरयू की महाआरती की। मंत्रोच्चार, शंखनाद और दीपों की कतारों के बीच सरयू का तट अलौकिक दृश्य प्रस्तुत कर रहा था। इसके बाद आसमान में सजे ड्रोन शो, लेजर शो और आतिशबाजी ने उत्सव की भव्यता को और बढ़ा दिया। रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगाते आसमान और दीपों से दमकती रामनगरी ने एक बार फिर दुनिया को अयोध्या की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का भव्य संदेश दिया।
विशेष सुरक्षा घेरे में रही रामनगरी, चप्पे-चप्पे पर रहा पहरा
दीपोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णनन के आगमन को लेकर रामनगरी अभेद्य सुरक्षा घेरे में रही। पूरी व्यवस्था को 20 जोन और 53 सेक्टर में बांटकर पुलिस अधिकारियों और मजिस्ट्रेटों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। शहर के प्रमुख मार्गों, संवेदनशील स्थलों, घाटों और आयोजन स्थल पर चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मियों का पहरा रहा।
दीपोत्सव में उपराष्ट्रपति के आगमन को लेकर सुरक्षा और कड़ी कर दी गई थी। एयरपोर्ट से लेकर अयोध्या धाम तक हाईवे पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया था। फ्लीट गुजरने के दौरान वाहनों का आवागमन हाईवे पर रोक दिया गया। प्रत्येक 100 मीटर की दूरी पर जवान तैनात किए गए थे। हाईवे व कार्यक्रम स्थलों के पास के भवनों और मकानों पर सशस्त्र जवान तैनात किए गए थे।
सुरक्षा व्यवस्था में स्थानीय पुलिस के साथ अर्धसैनिक बलों और कमांडो की तैनाती की गई थी। रामकथा पार्क, राम की पैड़ी, नया घाट, रामजन्मभूमि मार्ग और विशिष्ट अतिथियों के आवागमन वाले रास्तों पर विशेष सतर्कता बरती गई। पूरे शहर की निगरानी आधुनिक तकनीक के जरिये भी की गई। विभिन्न स्थानों पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरों से गतिविधियों पर नजर रखी गई, जबकि ड्रोन कैमरों के माध्यम से भी निगरानी की व्यवस्था रही। पुलिस नियंत्रण कक्ष से सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी गई।
काले कपड़ों वालों पर रही नजर
दीपोत्सव के दौरान राम की पैड़ी की तरफ काले कपड़े पहनकर जाने वालों पर सुरक्षाकर्मियों की विशेष नजर रही। कई लोगों को अशांति फैलाने की आशंका में बाहर से ही लौटा दिया गया। शनिवार होने के कारण बहुत से लोगों के काला कपड़ा पहनकर जाने से सुरक्षाकर्मी भी असहज स्थिति में आ गए।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन बोले: श्रीरामजन्मभूमि मंदिर संपूर्ण हिंदू स्वाभिमान का स्मारक
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने श्रीरामजन्मभूमि मंदिर को संपूर्ण हिंदू स्वाभिमान का स्मारक बताया। उन्होंने कहा कि अयोध्या आंदोलन और रामभक्तों के महान त्याग व बलिदान के कारण ही नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने और पिछले 12 वर्षों से देश का नेतृत्व कर रहे हैं, योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और वह स्वयं एक छोटे किसान परिवार से निकलकर भारत के उपराष्ट्रपति पद तक पहुंचे। करीब 500 वर्षों तक रामजन्मभूमि लाखों रामभक्तों की आस्था और अधूरी आकांक्षा का केंद्र बनी रही। सदियों के लंबे इंतजार और संघर्ष के बाद आखिरकार श्रीराम जीते और आज उनकी जन्मभूमि पर भव्य मंदिर स्थापित है।
उपराष्ट्रपति शनिवार को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्याधाम में दीपोत्सव के 10वें संस्करण को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि श्रीरामजन्मभूमि मंदिर और हिंदू स्वाभिमान के इस पुनर्स्थापन में साधु-संतों व संन्यासियों ने जो महान त्याग किया है, उसे कोई भी हिंदू कभी नहीं भूल सकता। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम हमारे लिए केवल आराध्य नहीं, बल्कि धर्म, करुणा, सदाचार और आदर्श आचरण के शाश्वत स्वरूप हैं। उनका पावन जीवन सिखाता है कि सच्ची महानता सत्ता और पद में नहीं, बल्कि चरित्र की दृढ़ता और कर्तव्य के प्रति समर्पण में निहित होती है। श्रीराम ने व्यक्तिगत सुख से ऊपर कर्तव्य, निजी हित से ऊपर धर्म और हर परिस्थिति में अपनी प्रजा के कल्याण को सर्वोपरि रखा। यही कारण है कि दो योगी, कर्मयोगी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ श्रीराम के दिखाए मार्ग पर चलकर जनसेवा में जुटे हैं।
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, प्रदेश सरकार के मंत्रीगणों और साधु-संतों की मौजूदगी में रामकथा पार्क में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि हिंदू समाज में जन्म के आधार पर कोई बड़ा नहीं होता, बल्कि चरित्र से श्रेष्ठता तय होती है। महर्षि वाल्मीकि साधारण परिवार से थे, लेकिन रामायण की रचना कर उन्होंने समाज का मार्गदर्शन किया। सामान्य पृष्ठभूमि से निकलकर नरेन्द्र मोदी का देश का प्रधानमंत्री बनना, लंबे समय बाद किसी संत का मुख्यमंत्री बनना और एक छोटे किसान परिवार से आने वाले व्यक्ति का भारत का उपराष्ट्रपति बनना, यह सब अयोध्या आंदोलन और रामभक्तों के महान त्याग व बलिदान के कारण ही संभव हुआ।