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छटा संगीनों का साया, खौफ से उबरी अयोध्या

Thu, 29 Aug 2013 01:14 PM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क Updated Thu, 29 Aug 2013 01:14 PM IST
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ayodhya back on track after tussle over 84 kosi

बाहर से शहर की फिजा बिगाड़ने वाले तो बहुत आए मगर फैजाबाद और अयोध्या के मिजाज पर कोई असर नहीं।

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हफ्ते भर की तमाम आशंकाओं और डर के दूर होते ही यहां के लोगों की दिनचर्या अपनी रंगत में फिर लौट आई।

शहर के लोगों में जो एकता और सद्भाव देखने को मिलता है वो बस देखते ही बनता है।

आइए देखते हैं 84 कोसी परिक्रमा पर मची रार के बाद शहर के हालात।

सीन एक:
सुबह के 6 बजे पंडित अमित मिश्रा की दुकान खुलती है। फैजाबाद की शिवनगर कॉलोनी में मकबरा से लेकर घोसियाना तक के लोग इस जनरल स्टोर पर सामना लेने जुटते हैं।

आ सलाम से बात आगे बढ़ती है। जुम्मन मियां ने अखबार टटोलते हुए कहा-मिश्रा जी एक सप्ताह में काम बहुत बिगड़ गया। जब से परिक्रमा को लेकर सख्ती हुई है तब से बाराबंकी जाना नहीं हो पाया।
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रोज करीब 10 हजार का सामान बिकता है वहां दुकान पर। अब जाकर देखेंगे क्या अच्छा बुरा है। मिश्रा जी ने कहा, 'भई देशभर के नेता हमारे शहर को ही निशाना क्यों बनाते हैं, समझ नहीं आता। राजनीति इनकी चमकती है और काम हमारा रुक जाता है।'
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सीन दो:
दोपहर एक बजे तक तो शोएब को फुर्सत ही नहीं मिलती खाने पीने की। भतीजा अबरार पहुंचता है तब जाकर हाथ से छूटती है कैंची। शहर के नाका इलाके में शोएब जैसा सैलून किसी का नहीं।

शोएब बचपन से ही अपने काम के उस्ताद हैं। इसीलिए लोग दूर दराज से पहुंचते हैं उनके पास। जब वो अपने काम में मशगूल रहते हैं तो उन्हें मौका ही नहीं मिलता।

मगर दुकान बढ़ाने के बाद अखबार जरूर पढ़ते हैं और कहते हैं कि बताइए हमारे दोस्तों में कभी धर्म को लेकर कोई बात ही नहीं हुई। ये नेता ही हैं जो बार-बार मंदिर मस्जिद की बात किया करते हैं।

अरे काम करेंगे तो खाने को मिलेगा। किसी पार्टी का कोई नेता थोड़े ही हमको रोटी देगा।

सीन तीन:
शाम चार बजे अयोध्या स्थित साकेत महाविद्यालय से छात्र-छात्राओं का रेला निकल पड़ता है। कुछ देर के लिए तो जुड़वा शहरों अयोध्या और फैजाबाद के बीच ऐसी लाइन लगती है कि जैसे दो खंभों को रस्सी से बांध दिया गया हो। यहीं पास में हनुमानगढ़ी है।

जहां शहर और आसपास के श्रद्धालुओं की भीड़ हमेशा है। यहीं पर एक बिसाती की दुकान है। दुकान की मालकिन हैं रुखसाना। रुखसाना अपनी चूड़ियों को लेकर महिलाओं में खासी लोकप्रिय हैं।

कहती हैं कि फैजाबाद के अलावा गोंडा और सुल्तानपुर तक से लोग उनके पास आते हैं। बहुत पूछने के बाद उन्होंने बताया कि मुस्लिम से ज्यादा तो हिंदू महिलाएं उनके पास आती हैं।


हफ्ते भर दुकान बंद रखने का जिम्मेदार रुखसाना भी नेताओं को ही ठहराती हैं। कहती हैं कि बार-बार फैजाबाद के गली कूचों में पुलिस लगा दी जाती है। काम चौपट होता है तो हम रोटी-रोटी के मोहताज हो जाते हैं।

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