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एनटीपीसी हादसाः शादी के आठ महीने बाद ही छीनीं अंजलि की खुशियां
ब्यूरो/अमर उजाला, रायबरेली
Updated Fri, 03 Nov 2017 05:53 PM IST
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अवधेश जायसवाल की मौत के बाद बिलखते लोग
- फोटो : amarujala
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सुबह घर से कहकर गया था शाम को पनीर लेकर लौटूंगा। कोई और सब्जी न बना लेना। अवधेश जायसवाल की मां रामप्यारी और पत्नी अंजलि को क्या पता था कि अब उसका लाया पनीर कभी खाने को नहीं मिलेगा। महज आठ महीने पहले ब्याहकर विकई गांव में आईं अंजलि के तो सारे सपने ही एनटीपीसी के हादसे में जल गए। बिलखती अंजलि बताती हैं कि 18 फरवरी को ही उसकी अवधेश के साथ शादी हुई थी।
रोज सुबह वे 8 बजे एनटीपीसी काम करने जाते और रात 8 बजे तक लौट आते थे। छोटी-मोटी बीमारी होने पर भी काम पर जाना नहीं छोड़ते थे। दोनों अपने घर को पक्का बनाने का सपना देख रहे थे। कुछ पैसे इकट्ठा करके बीमार मां की शहर के अच्छे अस्पताल में जांचें कराने की भी उन्होंने योजना बनाई थी, पर होनी को कुछ और ही मंजूर था।
अवधेश की बहिन उर्मिला देवी कहती हैं कि उन्हें पूरी उम्मीद थी कि रायबरेली में पीड़ितों का हालचाल लेने आए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी समेत सभी नेता उनके गांव भी हालचाल लेने आएंगे, लेकिन निराशा ही हाथ लगी। अलबत्ता नेताओं के गांव आने की संभावना के मद्देनजर सुबह से ही पंचायत के सफाई कर्मचारी साफ-सफाई में जुट गए थे। दोपहर दो बजे हम विकई पहुंचे तो भी सफाई कर्मी हाथ में झाड़ू पकड़े हुए सड़क पर मुस्तैद दिखे।
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बुधवार को गांव में जैसे ही अवधेश की मौत की खबर पहुंची, हर शख्स ऊंचाहार स्थित प्लांट की ओर दौड़ पड़ा। अवधेश की मां रामप्यारी बताती हैं कि सारी जमीन तो पहले ही एनटीपीसी में चली गई थी। अवधेश वहां 8-10 हजार रुपये महीने कमाकर जैसे-तैसे घर चलाता था। अब तो आंखों के सामने अंधेरा ही अंधेरा दिखता है। अंजलि को तो पहले घर वालों और पड़ोसियों ने सच्चाई बताई नहीं, लेकिन उसकी जिद ने जल्दी ही सच्चाई को जान ही लिया। तब से वह सुध-बुध खो बैठी हैं।
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रोज सुबह वे 8 बजे एनटीपीसी काम करने जाते और रात 8 बजे तक लौट आते थे। छोटी-मोटी बीमारी होने पर भी काम पर जाना नहीं छोड़ते थे। दोनों अपने घर को पक्का बनाने का सपना देख रहे थे। कुछ पैसे इकट्ठा करके बीमार मां की शहर के अच्छे अस्पताल में जांचें कराने की भी उन्होंने योजना बनाई थी, पर होनी को कुछ और ही मंजूर था।
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अवधेश की बहिन उर्मिला देवी कहती हैं कि उन्हें पूरी उम्मीद थी कि रायबरेली में पीड़ितों का हालचाल लेने आए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी समेत सभी नेता उनके गांव भी हालचाल लेने आएंगे, लेकिन निराशा ही हाथ लगी। अलबत्ता नेताओं के गांव आने की संभावना के मद्देनजर सुबह से ही पंचायत के सफाई कर्मचारी साफ-सफाई में जुट गए थे। दोपहर दो बजे हम विकई पहुंचे तो भी सफाई कर्मी हाथ में झाड़ू पकड़े हुए सड़क पर मुस्तैद दिखे।
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बुधवार को गांव में जैसे ही अवधेश की मौत की खबर पहुंची, हर शख्स ऊंचाहार स्थित प्लांट की ओर दौड़ पड़ा। अवधेश की मां रामप्यारी बताती हैं कि सारी जमीन तो पहले ही एनटीपीसी में चली गई थी। अवधेश वहां 8-10 हजार रुपये महीने कमाकर जैसे-तैसे घर चलाता था। अब तो आंखों के सामने अंधेरा ही अंधेरा दिखता है। अंजलि को तो पहले घर वालों और पड़ोसियों ने सच्चाई बताई नहीं, लेकिन उसकी जिद ने जल्दी ही सच्चाई को जान ही लिया। तब से वह सुध-बुध खो बैठी हैं।