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मेडिकल स्टूडेंट की कॉपियां चेक किए बिना ही दे दिए औसत नंबर, मामले पर कोर्ट सख्त

Thu, 10 Aug 2017 01:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 10 Aug 2017 01:59 AM IST
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 average marks given to medical students without checking note books in lohia university.

यूपी में चिकित्सा शिक्षा का स्तर कैसा है, इसका एक उदाहरण लखनऊ की एक मेडिकल स्टूडेंट की कॉपियां जांचने के मामले में हाईकोर्ट में दायर याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया है। मेडिकल स्टूडेंट की कॉपियां जांचे बगैर उसे अंदाज से अंक दे दिए गए।

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हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने परीक्षा कराने वाले डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध यूनिवर्सिटी के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार किया।  हाईकोर्ट ने कहा- ये बेहद लापरवाही का मामला है। अदालत ने यूनिवर्सिटी पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगाते हुए यह रकम छात्रा को देने के लिए कहा है। अब यूनिवर्सिटी ने एक महीने में कॉपियां फिर से जंचवाने का आश्वासन दिया है।
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मेडिकल कॉलेज की छात्रा अलिशा खान ने याचिका में बताया कि 20 से 24 जून 2016 तक पीजी डिप्लोमा इन स्किन एंड वेनेरियल डिजीज के फाइनल सेमेस्टर की परीक्षा दी थी। इसके तीन पेपर थे। नतीजे से वह उससे संतुष्ट नहीं थी और अक्तूबर 2016 में अपनी कॉपियां दिखवाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
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हाईकोर्ट ने यूनिवर्सिटी के सूचना अधिकारी को आरटीआई दायर कर कॉपियां देखने की अनुमति उसे दे दी थी। आरटीआई के तहत उसे उत्तर पुस्तिकाएं दिखाई गईं। इसमें सामने आया कि उसकी कॉपियां चेक ही नहीं की गईं, केवल मुख्य पृष्ठ पर अंदाज से अंक लिख दिए गए। कॉपियां देखने के बाद फिर से हाईकोर्ट की शरण ली।

याचिका में उसने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की फोटो कॉपी भी लगाई, जिसमें सामने आया था कि कॉपियों में लिखे जवाबों को चेक ही नहीं किया गया। केवल मुख्य पृष्ठ पर अंक लिख दिए गए। इस पर हाईकोर्ट ने यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक संतलाल पाल को तलब किया था। ताजा सुनवाई में वे मौजूद रहे।

वीसी की कर्तव्यनिष्ठा जगी न रजिस्ट्रार व परीक्षा नियंत्रक की

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जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने कहा कि याची की किसी भी कॉपी को चेक ही नहीं किया गया। याची ने यूनिवर्सिटी के वीसी और परीक्षा नियंत्रक से भी नवंबर 2016 में संपर्क किया था लेकिन कुछ नहीं किया गया। इतनी बड़ी लापरवाही सामने आने के बाद भी न वीसी में कर्तव्यनिष्ठा जगी न रजिस्ट्रार और परीक्षा नियंत्रक में। कोई आम आदमी भी देखकर बता देता कि इन कॉपियों को चेक नहीं किया गया। अंदर के किसी पृष्ठ पर न मार्किंग है न किसी परीक्षक के हस्ताक्षर। यह कैसी जांच प्रक्रिया है?

यूनिवर्सिटी ने कहा, दोषी परीक्षक पर होगी कार्रवाई
परीक्षा नियंत्रक संतलाल पाल ने हाईकोर्ट में आश्वासन दिया कि इन कॉपियों की फिर से जांच करवाई जाएगी, उसी के अनुसार अंक दिए जाएंगे। यह प्रक्रिया एक महीने में पूरी कर ली जाएगी। इस पर हाईकोर्ट ने पूछा, क्या उस परीक्षक की पहचान हुई जिसने कॉपियां जांची थी? परीक्षा नियंत्रक ने बताया कि उसकी पहचान भी कर ली जाएगी। परीक्षा समिति की 19 अगस्त को बैठक है जहां परीक्षक पर उचित कार्रवाई के लिए विचार होगा।

परीक्षक से वसूल सकते हैं जुर्माने की रकम
हाईकोर्ट ने निर्देश दिए कि मुकदमे में हुए खर्चों और मानसिक परेशानी के लिए छात्रा को एक महीने में 25 हजार रुपये चुकाए जाएं। अगर एक महीने में जुर्माना नहीं चुकाया तो डीएम लखनऊ यूनिवर्सिटी पर राजस्व वसूली की तरह यह रकम वसूल करें। बाद में यूनिवर्सिटी चाहे तो दोषी परीक्षक से यह रकम वसूली जा सकती है।

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