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दीपावली पर किस लग्न में कितने बजे करें पूजा, जानें खबर में
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 09 Oct 2017 12:52 PM IST
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दीपावली
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सालभर का इंतजार खत्म होने को है। दीप पर्व 19 को मनाया जाएगा। इस बार दोपहर से रात तक पूजन करने की तीन सबसे शुभ मुहूर्त मिल रहे हैं। इस समय लक्ष्मीकारक स्थिर वृष लग्न होने के कारण पूजन करना गृहस्थों के साथ ही व्यापारियों के लिए भी सबसे शुभ रहेगा। ज्योतिषियों के मुताबिक, धन और ऐश्वर्य की देवी महालक्ष्मी के पूजन के लिए शाम को स्थिर वृष लग्न में 6:55 बजे से 8:52 बजे तक पूजन करने का मूहूर्त सर्वश्रेष्ठ है।
शाम की इस लग्न के अलावा सुबह और दोपहर की अन्य लग्नों में भी पूजन करना श्रेयस्कर रहेगा। हस्त नक्षत्र का संयोग भी मिल रहा है, लेकिन इस बार महानिशा पूजा के सिंह लग्न का योग नहीं मिलेगा। गोमतीनगर निवासी आचार्य प्रदीप ने रविवार को बताया कि 18 अक्टूबर की रात 11:33 बजे के बाद से अमावस्या लग जाएगी, जो कि बृहस्पतिवार 19 अक्टूबर को रात 11:45 बजे बजे तक रहेगी।
उन्होंने बताया कि दीपावली पर गणेश-लक्ष्मी और कुबेर के पूजन के लिए शाम को स्थिर वृष लग्न में शाम 6:55 बजे से रात 8:52 बजे तक दीपावली पूजा का सबसे शुभ मूहूर्त है। इस लग्न में घरों में गृहस्थों और प्रतिष्ठानों में व्यापारियों का पूजन करना उत्तम रहेगा। इसके अलावा दोपहर में 2:17 बजे से 3:18 बजे तक स्थिर कुंभ लग्न में भी पूजन किया जा सकेगा।
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सुबह की लग्न में भी पूजन कर सकतें हैं, लेकिन चूंकि अमावस्या रात 11:45 बजे तक ही है और सिंह लग्न देर रात 1:23 बजे से शुरू हो रही है, इसलिये महानिशा पूजन के लिये सिंह लग्न नहीं मिल सकेगी। महानिशा पूजन करने वाले लोग 11:30 बजे से पूजन कर सकते हैं।
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शाम की इस लग्न के अलावा सुबह और दोपहर की अन्य लग्नों में भी पूजन करना श्रेयस्कर रहेगा। हस्त नक्षत्र का संयोग भी मिल रहा है, लेकिन इस बार महानिशा पूजा के सिंह लग्न का योग नहीं मिलेगा। गोमतीनगर निवासी आचार्य प्रदीप ने रविवार को बताया कि 18 अक्टूबर की रात 11:33 बजे के बाद से अमावस्या लग जाएगी, जो कि बृहस्पतिवार 19 अक्टूबर को रात 11:45 बजे बजे तक रहेगी।
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उन्होंने बताया कि दीपावली पर गणेश-लक्ष्मी और कुबेर के पूजन के लिए शाम को स्थिर वृष लग्न में शाम 6:55 बजे से रात 8:52 बजे तक दीपावली पूजा का सबसे शुभ मूहूर्त है। इस लग्न में घरों में गृहस्थों और प्रतिष्ठानों में व्यापारियों का पूजन करना उत्तम रहेगा। इसके अलावा दोपहर में 2:17 बजे से 3:18 बजे तक स्थिर कुंभ लग्न में भी पूजन किया जा सकेगा।
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सुबह की लग्न में भी पूजन कर सकतें हैं, लेकिन चूंकि अमावस्या रात 11:45 बजे तक ही है और सिंह लग्न देर रात 1:23 बजे से शुरू हो रही है, इसलिये महानिशा पूजन के लिये सिंह लग्न नहीं मिल सकेगी। महानिशा पूजन करने वाले लोग 11:30 बजे से पूजन कर सकते हैं।
धनतेरस के साथ 5 दिवसीय दीपोत्सव का आगाज
दीपावली रंगोली
किस लग्न में कितने बजे करें पूजा
लग्न समय
वृश्चिक लग्न सुबह 8:17 बजे से 10:37 बजे तक।
कुंभ लग्न दोपहर 2:17 बजे से 3:18 बजे तक।
वृष लग्न शाम 6:55 बजे से रात 8:52 बजे तक।
गोधूलि बेला मूहूर्त भी शुभकारी
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक प्रतिष्ठान चलाने वाले व्यापारी शुभ मूहूर्त लग्न के अलावा सूर्यास्त के समय गोधूलि बेला में भी पूजन कर सकते हैं। सूर्यास्त केसमय से एक घड़ी पहले (24 मिनट) और सूर्यास्त के एक घड़ी बाद के समय में भी पूजन करना श्रेयस्कर रहेगा।
धनतेरस के साथ 5 दिवसीय दीपोत्सव का आगाज
17 अक्टूबर को पड़ने वाली धनतेरस केसाथ ही शहर पांच दिनों तक चलने वाले दीपावली की रौनक से जगमगा उठेगा। धनतेरस, छोटी दीपावाली, बड़ी दीपावाली, गोवर्धन पूजा से भईया दूज तक लगातार पांच दिनों तक शहर त्योहार मनाने में जुटेगा।
किस तारीख को कौन सा त्योहार
तारीख त्योहार
17 अक्टूबर धनतेरस
18 अक्टूबर रूप चतुर्दशी, नरक चतुर्दशी, छोटी दीपावली
19 अक्टूबर दीपावली
20 अक्टूबर गोवर्धन पूजा/अन्नकूट/जमघट
21 अक्टूबर भइया दूज
लग्न समय
वृश्चिक लग्न सुबह 8:17 बजे से 10:37 बजे तक।
कुंभ लग्न दोपहर 2:17 बजे से 3:18 बजे तक।
वृष लग्न शाम 6:55 बजे से रात 8:52 बजे तक।
गोधूलि बेला मूहूर्त भी शुभकारी
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक प्रतिष्ठान चलाने वाले व्यापारी शुभ मूहूर्त लग्न के अलावा सूर्यास्त के समय गोधूलि बेला में भी पूजन कर सकते हैं। सूर्यास्त केसमय से एक घड़ी पहले (24 मिनट) और सूर्यास्त के एक घड़ी बाद के समय में भी पूजन करना श्रेयस्कर रहेगा।
धनतेरस के साथ 5 दिवसीय दीपोत्सव का आगाज
17 अक्टूबर को पड़ने वाली धनतेरस केसाथ ही शहर पांच दिनों तक चलने वाले दीपावली की रौनक से जगमगा उठेगा। धनतेरस, छोटी दीपावाली, बड़ी दीपावाली, गोवर्धन पूजा से भईया दूज तक लगातार पांच दिनों तक शहर त्योहार मनाने में जुटेगा।
किस तारीख को कौन सा त्योहार
तारीख त्योहार
17 अक्टूबर धनतेरस
18 अक्टूबर रूप चतुर्दशी, नरक चतुर्दशी, छोटी दीपावली
19 अक्टूबर दीपावली
20 अक्टूबर गोवर्धन पूजा/अन्नकूट/जमघट
21 अक्टूबर भइया दूज