फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Attempted conversion at KGMU: No woman in committee probing harassment, NMO raises questions

केजीएमयू में धर्मांतरण का प्रयास: यौन उत्पीड़न की जांच कर रही समिति में कोई महिला नहीं, एनएमओ ने उठाए सवाल

Sun, 28 Dec 2025 12:40 AM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sun, 28 Dec 2025 12:40 AM IST
सार

केजीएमयू में महिला रेजिडेंट के धर्मांतरण के प्रयास और यौन उत्पीड़न के मामले में बनी समिति पर  नेशनल मेडिकल ऑर्गेनाइजेशन ने सवाल उठाए हैं। आरोप लगाया कि जांच के नाम पर खानापूरी की तैयारी है।

विज्ञापन
Attempted conversion at KGMU: No woman in committee probing harassment, NMO raises questions
एनएमओ और मेडिकल छात्रों ने कैंडल मार्च निकाला - फोटो : amar ujala

विस्तार

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में महिला के धर्मांतरण के प्रयास मामले में बनी जांच समिति पर सवाल खड़े किए गए हैं। नेशनल मेडिकल ऑर्गेनाइजेशन (एनएमओ) ने जांच समिति में किसी महिला को शामिल न करने पर आपत्ति जताई है। एनएमओ के महानगर संयोजक डॉ. शिवम कृष्णन ने आरोप लगाया कि जांच के नाम पर खानापूरी की तैयारी है। आरोप है कि समिति को धर्मांतरण के साथ ही यौन उत्पीड़न मामले की जांच करनी है, लेकिन इसमें एक भी महिला नहीं है।

विज्ञापन


केजीएमयू प्रशासन ने इस मामले में बृहस्पतिवार को पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी। इसमें रेस्पिरेटरी मेडिसिन, गैस्ट्रो मेडिसिन विभाग के चिकित्सक और एक सर्जन शामिल हैं। इनके पास इलाज का तो अनुभव है, लेकिन इस तरह के संवेदनशील प्रकरण की जांच का कोई अनुभव नहीं है। ऐसे में जांच भटक सकती है।
विज्ञापन


एनएमओ ने इसके साथ ही समिति के सभी सदस्यों के केजीएमयू में अहम पदों पर होने को लेकर भी सवाल उठाया है। इससे जांच प्रभावित हो सकती है। केजीएमयू प्रशासन के अधिकारी होने से छात्र और कर्मचारी कभी भी स्वतंत्र रूप से अपना बयान नहीं दे पाएंगे। ऐसे में प्रदेश सरकार को एटीएस या एसटीएफ से इस संवेदनशील मामले की जांच करानी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


एनएमओ ने उठाए ये सवाल
- महिला रेजिडेंट के धर्म परिवर्तन के प्रयास और यौन शोषण का मामला होने के बावजूद समिति में कोई महिला क्यों नहीं है।
- समिति के सदस्य केजीएमयू प्रशासन के जिम्मेदार हैं, ऐसे में संस्थान की छवि को देखते हुए जांच को प्रभावित कर सकते हैं।
- यौन शोषण और धर्मांतरण दोनों आपराधिक मामले हैं, न कि चिकित्सीय। ऐसे में समिति जांच कैसे करेगी।
- केजीएमयू प्रशासन के अधिकारियों के सामने खुलकर अपने बयान नहीं दे पाएंगे।
- केजीएमयू प्रशासन को मामले की जांच कराने के लिए प्रदेश सरकार को पत्र भेजना चाहिए।

एनएमओ और मेडिकल छात्रों ने निकाला कैंडल मार्च
धर्मांतरण के प्रयास मामले में शनिवार को 1090 चौराहे के पास शाम को बड़ी संख्या में एनएमओ के पदाधिकारी व मेडिकल छात्रों ने कैंडल मार्च निकाला। प्रदर्शन में शामिल डॉ. अभिषेक पांडेय के मुताबिक, केजीएमयू का दुनिया भर में नाम है। इस तरह की घटनाओं से संस्थान की साख को धक्का लगा है। इस घटना में शामिल लोगों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। डॉ. ताविषि मिश्रा के मुताबिक, पूरी घटना में केजीएमयू प्रशासन की लापरवाही उजागर हो रही है। एक महिला के लिए कमेटी गठित की गई और उसमें कोई महिला ही नहीं है। यह संवेदनहीनता है। यह सिर्फ डॉक्टर ही नहीं, बल्कि इंसानियत और न्याय की बात है। इसी मामले में नेशनल मेडिकल ऑर्गेनाइजेशन व आम नागरिक के बैनर तले विभिन्न अस्पताल के चिकित्सकों , मेडिकल छात्रों अधिवक्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और एसिड पीड़िताओं ने प्रदेश भर में कैंडल मार्च निकाला।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed