पार्टी दफ्तरों पर झोली फैलाए पहुंच रहे दावेदार, पैर छूने वालों की लाइन
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सूबे में विधानसभा चुनाव की चौसर बिछ चुकी है। हर राजनीतिक दल अपने हिसाब से चुनावी बिसात पर पासे फेंक रहा है। पहले चरण की अधिसूचना जारी होने के साथ ही राजधानी लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालयों पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। बुधवार को सूबे के प्रमुख सियासी दलों के दफ्तरों पर कुछ ऐसा रहा माहौल :
सपा : टिकट मांगने आए, नारे सीखकर लौटे
सपा के प्रदेश मुख्यालय पर बुधवार को टिकट के दावेदारों की भीड़ इतनी ज्यादा थी कि प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम अपने कमरे से निकलकर बाहर पेड़ के नीचे आ गए।
कई दावेदार तो इतने दीन-हीन दिख रहे थे कि यकीन ही नहीं हो रहा था कि वे चुनाव लड़ने की सोच सकते हों! देवरिया से आए एक ऐसे ही दिव्यांग दावेदार की पैरवी एक वकील साहब कर रहे थे।
उन्होंने दावेदार को सलाह दी, क्षेत्र में जाकर नारा लगाओ-‘मुफ्त पढ़ाई, मुफ्त दवाई...जय, जय, जय...जय अखिलेश।’ कुछ अन्य दावेदारों को भी उत्तम ने नए नारे थमा दिए। इस दौरान उनके पैर छूने वालों की लाइन लगी रही।
इस बीच सपा एमएलसी सुनील कुमार साजन के आते ही उनके साथ सेल्फी लेने की होड़ मच गई। उत्तम के इर्द-गिर्द काफी देर से मंडरा रहे एक दावेदार ने कहा, इनके पैर छूने से नारे के अलावा कुछ नहीं मिल रहा है। उसने हंसते हुए खुद ही नया नारा गढ़ लिया-‘न’ से नरेश, ‘ना’ से नारा, नसीब का मारा, कार्यकर्ता बेचारा।
बसपा : नेताजी ने अकलीयत को समझा दी बबुआ की असलियत
बसपा कार्यालय के सामने माल एवेन्यू पुल के नीचे बसपा समर्थकों का जमावड़ा लगा है। सर्द मौसम में पजेरो से पधारे संतरविदासनगर के रईस मियां गाड़ी से उतरते ही सामने वाले से सलाम वालेकुम कहते हैं।
सामने वाला जवाब में वालेकुम अस्सलाम कहने के साथ ही सवाल करता है-रईस भाई, ई पप्पू और बबुआ के मिलन का कुछ फर्क पड़ेगा? बगल में चने के ठेले पर खड़े दूसरे पाजामा-कुर्ता धारी सज्जन फटाक से जवाब देते हैं, कुछ तो फर्क जरूर पड़ेगा।
ड्रामे का पटाक्षेप जिस अंदाज में हुआ है, उससे पता चल ही रहा होगा ऐसा क्यूं हुआ है? हालांकि रईस मियां बड़े आत्मविश्वास से समझाते हैं कि पप्पू और बबुआ दोनों की असलियत अकलीयत जान गई है।
चाचा और जीजा को सीबीआई से बचाने के लिए अकलीयतों को बांटने का खुला नाटक खेला जा रहा है। नेताजी ने अपने नाटक का पटाक्षेप करते हुए बबुआ की असलियत अकलीयत को समझा दी है। पप्पू और बबुआ लाख गले मिल लें, अकलीयत ऐसा जवाब देगी कि दोनों याद रखेंगे।
भाजपा : नेता-दावेदार दिल्ली में, ताले देख लौट रहे कार्यकर्ता
इस वजह से पहले चरण की अधिसूचना जारी होने के बावजूद राजधानी लखनऊ स्थित प्रदेश मुख्यालय पर चुनावी रंग नहीं चढ़ सका है। यहां कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ पदाधिकारी ही नजर आ रहे हैं।
बुधवार को कुछ जिलों से आए कार्यकर्ताओं को प्रदेशाध्यक्ष का कक्ष खाली मिला। अन्य पार्टी पदाधिकारियों के कक्ष पर भी ताले लटके देख उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। भाजपा मुख्यालय के प्रभारी भारत दीक्षित, सह प्रभारी चौधरी लक्ष्मण सिंह सहित पार्टी के अन्य बुजुर्ग नेता इन दिनों कार्यालय संभाल रहे हैं।
वहीं पार्टी ने मीडिया से बातचीत के लिए प्रवक्ताओं को डे ऑफिसर नियुक्त किया है। वे मीडिया को संगठन की गतिविधियों के बारे में बताने के साथ ही विरोधी दलों के खिलाफ हमला भी बोल रहे हैं।
कांग्रेस : सपा से गठबंधन में सीटों के बंटवारे की अटकलें
सपा व कांग्रेस के बीच गठबंधन की औपचारिक घोषणा की चर्चाओं के मद्देनजर बुधवार को सुबह से ही कुछ बड़े नेता और कार्यकर्ता पार्टी मुख्यालय पहुंच गए थे। इनमें प्रमोद तिवारी, डॉ. संजय सिंह, जेपी अग्रवाल भी शामिल थे।
हर नेता गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर अटकलें लगा रहा था। कोई कह रहा था कि 100 सीटें मिलेंगी, तो कोई 80 सीटों का कयास लगा रहा था। अपना टिकट पक्का मानकर चल रहे नेताओं की चिंता थी कि समझौते के तहत यदि उनकी सीट कहीं सपा के खाते में चली गई तो उनके सियासी भविष्य का क्या होगा?
कुछ इसी तरह की चर्चा मौजूदा विधायकों की सीटों को लेकर भी थी। चर्चा यह भी थी कि प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद के आने पर गठबंधन का एलान होगा, लेकिन शाम तक वे नहीं पहुंचे।