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Shravasti: श्रावस्ती ने नहीं जमने दिए माफिया अतीक अहमद के पांव, पानी की तरह बहाए थे करोड़ों रुपये
Fri, 05 Apr 2024 03:45 PM IST
ishwar ashish
संजय तिवारी, अमर उजाला, बलरामपुर
संजय तिवारी, अमर उजाला, बलरामपुर
Published by: ishwar ashish
Updated Fri, 05 Apr 2024 03:45 PM IST
सार
श्रावस्ती में धनबल और बाहुबल लगाने के बाद भी माफिया अतीक अहमद को जीत नहीं मिल सकी। प्रचार में उसने करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा दिए थे।
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माफिया अतीक अहमद।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
सियासत में वोटों के समीकरण से माफिया पांव जमाने की फिराक में लंबे समय से लगे रहे हैं। इसी फेर में मुस्लिम और पिछड़े मतदाताओं के वर्चस्व को देखकर माफिया अतीक अहमद भी श्रावस्ती संसदीय सीट में भाग्य अजमाने साल 2014 में पहुंचा। वाहनों के काफिले और लंबी- लंबी बातों से माहौल तो बनाया लेकिन श्रावस्ती की जनता ने माफिया राज को सिरे से खारिज कर दिया। भाजपा के दद्दन मिश्रा को जीत मिली।
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देश में बदलाव की चल रही बयार को रोकने के लिए सपा ने श्रावस्ती में बड़ा दांव चला था। उस समय सूबे में माफिया अतीक का खासा दबदबा था। तत्कालीन सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने श्रावस्ती सीट हथियाने के लिए अतीक को प्रत्याशी बनाया।
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श्रावस्ती की दो के साथ ही जिले की तीन विधानसभाओं में पहले अतीक ने मतदाताओं की नब्ज टटोली और उसे भरोसा हो गया कि यहां उसका दबदबा कायम हो जाएगा। इसके बाद वह मैदान में उतर पड़ा। परिणाम आए तो अतीक के होश उड़ गए, करोड़ों रुपये पानी की तरह खर्च करने के बाद भी वह जीत के करीब भी नहीं पहुंच सका। फिलहाल अतीक की पराजय से बड़ा सियासी संदेश गया।
प्रमुख दल के प्रत्याशियों को मिले मत
दद्दन मिश्रा -- भाजपा -- 345964
अतीक अहमद -- सपा -- 260051
लालजी वर्मा -- बसपा -- 194890
रिजवान जहीर -- पीस पार्टी -- 101817
विनय पांडेय -- कांग्रेस -- 20006
नोटा -- 14587
2014 के चुनाव में मतदाता व मतदान की स्थिति
कुल मतदाता -- 17,88,080
पुरूष मतदाता -- 9,76,415
महिला मतदाता -- 8,11, 665
इतनों ने किया
मतदान -- 9,79,638
वैध मत -- 9,65,051
मतदान -- 54.8 प्रतिशत
श्रावस्ती लोकसभा में
जातिय समीकरण
मुस्लिम -- 29 प्रतिशत
दलित -- 17 प्रतिशत
ब्राह्मण -- 8 प्रतिशत
क्षत्रिय -- 7 प्रतिशत
वैश्य -- 6 प्रतिशत
कायस्थ -- 3 प्रतिशत
जनजाति -- 2 प्रतिशत
अन्य जातियां -- 2 प्रतिशत
यादव -- 8 प्रतिशत
कुर्मी -- 10 प्रतिशत
अन्य पिछड़ी जातियां -- 8 प्रतिशत
पार्टियों को मिले मत
भाजपा -- 35.9 प्रतिशत
सपा -- 27 प्रतिशत
बसपा -- 20.2 प्रतिशत
पीस पार्टी -- 10.6 प्रतिशत
कांग्रेस -- 2.1 प्रतिशत
जातीय समीकरण पर भारी पड़ी थी एकता
माफिया अतीक ने मुस्लिम व पिछड़े वर्ग के साथ के समीकरण को साधा था। सपा के परंपरागत मतों को भी साथ जोड़े रखने के साथ ही कुछ अन्य वर्ग के मतों को साधने के लिए कई हथकंडे अपनाए थे। लेकिन देश में चल रही बदलाव की बयार में स्थानीय मतदाताओं की एका काम आई। पीस पार्टी से पूर्व सांसद रिजवान जहीर ने भी मतों का बंटवारा किया। इसका असर परिणाम पर पड़ा।