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आशीष पांडेय की गिरफ्तारी के लिए लगातार की जा रही छापेमारी: यूपी एडीजी लॉ एंड ऑर्डर

Wed, 17 Oct 2018 11:22 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 17 Oct 2018 11:22 AM IST
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ashish pandey may surrender in court.
एडीजी लॉ एंड ऑर्डर आनंद कुमार - फोटो : amar ujala

दिल्ली में पिस्टल लहराकर लड़की को धमकाने के मामले में अभी तक फरार चल रहा बसपा के पूर्व सांसद राकेश पाण्डेय के बेटे आशीष पाण्डेय की गिरफ्तारी पर एडीजी लॉ एंड ऑर्डर आनंद कुमार का कहना है कि आशीष पांडेय की तलाश में अलग-अलग जगहों पर छापेमारी की जा रही है। इसके लिए यूपी एसटीएफ का भी सहयोग लिया जा रहा है। वहीं, पिस्टल का लाइसेंस रद्द होने पर उन्होंने कहा कि पिस्टल के लिए एक लाइसेंस जारी किया गया था, पर ये पता नहीं कि वारदात में इस्तेमाल की गई पिस्टल वही है या नहीं।

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वहीं, उसके कोर्ट में भी सरेंडर करने की अटकलें लग रही हैं। आशीष के चाचा पूर्व विधायक पवन पाण्डेय ने कहा कि आशीष भगोड़ा नहीं है। वह अपने वकीलों से बात कर रहा है। वीडियो में दिख रही बात अगर सच है तो कानून जो भी सजा देगा वह उसे भुगतने के लिए तैयार है। पवन पाण्डेय ने कहा कि ये हमारे परिवार को बदनाम करने के लिए साजिश रची जा रही है। इसके पीछे कौन है उन्होंने बताने से इन्कार कर दिया।
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एसटीएफ भी कर रही तलाश
आशीष पांडेय की तलाश में मंगलवार दोपहर बाद दिल्ली पुलिस की एक टीम ने लखनऊ पहुंचकर ताबड़तोड़ छापेमारी की। हालांकि शाम तक आशीष हाथ नहीं आया। डीजीपी ओपी सिंह ने आशीष की तलाश में एसटीएफ को भी लगा दिया है। अंबेडकरनगर में भी स्थानीय पुलिस ने आशीष के दो घरों पर दबिश दी, वहां भी वह पुलिस को नहीं मिला। आशीष के पिस्टल का लाइसेंस निरस्त किया जाएगा। लाइसेंस अंबेडकरनगर से बना था।
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भीतर से बंद था मकान, घुसने की हिम्मत नहीं जुटा सकी पुलिस
विभवखंड स्थित आशीष के आलीशान मकान के दरवाजे भीतर से बंद थे। दोपहर लगभग दो बजे क्राइम ब्रांच व विभूति खंड थाने की पुलिस के अलावा एसटीएफ की एक टीम मकान पर पहुंची लेकिन पूर्व सांसद और बाहुबली पवन पांडेय के रसूख के चलते किसी की भी भीतर जाने की हिम्मत नहीं हुई। काफी देर तक पुलिस मकान के भीतर की गतिविधियों की टोह लेती रही पर कोई हलचल नहीं दिखी।


डोर बेल बजाने पर भी भीतर से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो एक पुलिसकर्मी अंदर गया। वहां पता चला कि दरवाजे भीतर से बंद हैं। यानी मकान में कोई न कोई व्यक्ति मौजूद था। पुलिस देर रात तक मकान के बाहर रही लेकिन यह पता नहीं चल सका कि भीतर कौन है।

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