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ओवैसी मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में इस तरह बिगाड़ेंगे सपा-बसपा का खेल
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Wed, 11 Jan 2017 03:20 PM IST
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असदुद्दीन ओवैसी
- फोटो : demo pic
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सांसद असदुद्दीन ओवैसी की अगुवाई वाली ऑल इंडिया मजलिसे इत्तेहादुल मुसलमीन (एआईएमआईएम) यूपी के चुनाव में लगभग 100 सीटों पर ताल ठोकेगी। उसकी नजर सूबे की मुस्लिम बहुल सीटों पर है।
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सूबे में 122 सीटों पर 20 प्रतिशत से ज्यादा मुस्लिम मतदाता हैं। 60 सीटों पर उनकी तादाद 25 फीसदी से ज्यादा है। 40 सीटों पर इनकी आबादी 30 प्रतिशत से अधिक है।
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एक दर्जन सीटों पर 40 से 52 प्रतिशत मुसलमान हैं। ऐसे में मजलिस के अधिकतर प्रत्याशी मुसलमान और कुछ दलित होंगे। एक-दो प्रत्याशी पिछड़े वर्ग से हो सकते हैं। इससे मुस्लिम वोटों की लामबंदी में जुटी सपा-बसपा को कई सीटों पर झटका लग सकता है।
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एआईएमआईएम ने पहली बार फरवरी 2016 में फैजाबाद जिले की बीकापुर सीट पर उपचुनाव में अपना प्रत्याशी उतारा था, जो 11,857 वोट लेकर चौथे स्थान पर रहा था। भाजपा को 11,953 और कांग्रेस को मात्र 2945 वोट मिले थे।
इसके बाद से ओवैसी सूबे में लगातार सक्रिय हैं। जहां-जहां अनुमति मिली, उनकी सभाएं हुईं। एआईएमआईएम ने 2017 में सूबे की विधानसभा में एंट्री को लक्ष्य बनाया है। पहले और दूसरे चरण में चुनाव वाले वेस्ट यूपी के जिलों में 10 सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए जा चुके हैं।
‘सपा का रिमोट भाजपा के हाथ में’
असदुद्दीन ओवैसी
- फोटो : demo pic
पसमांदा मुसलमानों की अनदेखी
एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली कहते हैं कि प्रदेश में सपा की सरकार रही हो या बसपा की, गरीब, पसमांदा मुसलमानों की अनदेखी हुई है। भले ही सपा के 45 मुसलमान विधायक जीते हों लेकिन किसी ने मुसलमानों, खास तौर से वंचितों की चिंता नहीं की।
इन विधायकों ने मुलायम, अखिलेश और शिवपाल के बंधुआ मजदूर की तरह काम किया। मुजफ्फरनगर दंगा हुआ तो एक भी मुस्लिम मंत्री या विधायक वहां नहीं गया। बसपा ने भले ही 97 मुस्लिम प्रत्याशी उतारे हैं, वे मुसलमानों के किस काम के हैं?
सपा-बसपा जिताती हैं भाजपा को
शौकत कहते हैं कि हम पर भाजपा को जिताने का आरोप लगाने वाले खुद भाजपा की मदद करते हैं। जिन सीटों पर मुस्लिम आबादी ज्यादा है, वहां ये तीनों दल मुसलमान उम्मीदवार उतारते हैं। मुस्लिम मतों का बंटवारा होता है और इसका लाभ भाजपा को मिलता है। मुस्लिम बहुल सीटों से सपा, बसपा व कांग्रेस अपने उम्मीदवार हटा लें, हम भाजपा को हारकर दिखाएंगे।
सपा का रिमोट भाजपा के हाथ में
शौकत ने कहा, एआईएमआईएम चुनाव में बताएगी कि सपा के फैमिली ड्रामे की स्क्रिप्ट भाजपा ने लिखी है। सपा का रिमोट भाजपा के हाथ में है। बिहार चुनाव में हम केवल 6 सीटों पर इसलिए लड़े थे कि भाजपा की मदद का आरोप न लगे, लेकिन महागठबंधन से अलग होकर सपा ने 150 सीटों पर चुनाव लड़कर किसकी मदद की?
एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली कहते हैं कि प्रदेश में सपा की सरकार रही हो या बसपा की, गरीब, पसमांदा मुसलमानों की अनदेखी हुई है। भले ही सपा के 45 मुसलमान विधायक जीते हों लेकिन किसी ने मुसलमानों, खास तौर से वंचितों की चिंता नहीं की।
इन विधायकों ने मुलायम, अखिलेश और शिवपाल के बंधुआ मजदूर की तरह काम किया। मुजफ्फरनगर दंगा हुआ तो एक भी मुस्लिम मंत्री या विधायक वहां नहीं गया। बसपा ने भले ही 97 मुस्लिम प्रत्याशी उतारे हैं, वे मुसलमानों के किस काम के हैं?
सपा-बसपा जिताती हैं भाजपा को
शौकत कहते हैं कि हम पर भाजपा को जिताने का आरोप लगाने वाले खुद भाजपा की मदद करते हैं। जिन सीटों पर मुस्लिम आबादी ज्यादा है, वहां ये तीनों दल मुसलमान उम्मीदवार उतारते हैं। मुस्लिम मतों का बंटवारा होता है और इसका लाभ भाजपा को मिलता है। मुस्लिम बहुल सीटों से सपा, बसपा व कांग्रेस अपने उम्मीदवार हटा लें, हम भाजपा को हारकर दिखाएंगे।
सपा का रिमोट भाजपा के हाथ में
शौकत ने कहा, एआईएमआईएम चुनाव में बताएगी कि सपा के फैमिली ड्रामे की स्क्रिप्ट भाजपा ने लिखी है। सपा का रिमोट भाजपा के हाथ में है। बिहार चुनाव में हम केवल 6 सीटों पर इसलिए लड़े थे कि भाजपा की मदद का आरोप न लगे, लेकिन महागठबंधन से अलग होकर सपा ने 150 सीटों पर चुनाव लड़कर किसकी मदद की?