माउंट एवरेस्ट विजेता अरुणिमा सिन्हा ने मेधावियों को दी संघर्ष की सीख, जानें-क्या कहा
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एक पैर न होने के बाद भी माउंट एवरेस्ट को अपने हौसले से झुका देने वाली पद्मश्री पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा ने मेधावियों को संघर्ष की सीख दी। कहा, अगर सूरज की तरह चमकना चाहते हैं तो उसी की तरह तपना भी पड़ेगा। कई बार हम अक्सर अपने गोल के बिल्कुल पास आकर ठिठक जाते हैं, लोग टूट जाते हैं, लेकिन जीतते वही हैं जो खुद नहीं टूटते बल्कि रिकॉर्ड तोड़ते हैं। वो लक्ष्य ही क्या है जिसे हम याद रखें, लक्ष्य तो वह होता है जो हमें सोने न दे। ऐसे में हमें अपना उद्देश्य ऐसा बनाना होगा, जो हमारी आत्मा में रच बस जाए। वे मंगलवार को प्रदेश भर के मेधावियों से मुखातिब थीं।
जो ठान लो उसे पूरा करके ही दम लो
अरुणिमा ने कहा, मैं भले ही आप लोगों जैसी टॉपर नहीं, लेकिन एक बार अपना कोई उद्देश्य ठान लिया तो पूरा किए बिना पीछे नही हटती। जिंदगी में सफल होने के लिए जोखिम लेना बहुत जरूरी है और उसके लिए खुद पर विश्वास होना भी उतना ही जरूरी है। बिल्कुल उसी तरह जैसा कि हम अपनी छतरी पर करते हैं, कि बारिश में जब हम इसे खोलेंगे तो यह भीगने नहीं देगा।
खुद को सबसे अलग बनाइए, लोग आपको असाधारण बना देंगे
बताइए, जिंदगी का उतार-चढ़ाव (जिगजैग) बढ़िया है या ईसीजी की तरह सीधी लाइन। अप तय कर लीजिए, जिंदगी को बस ट्विस्ट दीजिए, फिर देखिए जिंदगी कैसे बदलती है। हां, आप को लगातार संघर्ष करते रहना है, वर्ना कोई दूसरा जो आप से ज्यादा कड़ी मेहनत कर रहा है, वह आपका स्थान ले लेगा। आपको हटा देगा। आप बस एक बार खुद को सबसे अलग बनाइए, लोग आपको असाधारण बना देंगे।
बड़े लक्ष्य के लिए छोटे-छोटे लक्ष्य साधें
जरूरी नहीं कि आप सबसे मजबूत हों, अपनी कमजोरी को अपनी मजबूती बना सकते हैं। बाज को ही देखिए, कैसे वह अपनी दूसरी जिंदगी के लिए खुद को मृत्यु जैसा कष्ट देकर नया जीवन पा लेता है ताकि अपने बलबूते दुनिया जी सके। अगर कोई भी बड़ा लक्ष्य पाना है तो छोटे-छोटे लक्ष्य तय करते जाइए। उन्हें हासिल करते जाइए, सफलता आपकी झोली में होगी।’