गुमनामी बाबा के बक्से में मिले नेताजी बोस के छह चश्में
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गुमनामी बाबा उर्फ भगवन जी के आखिरी बक्से से गुरुवार को गोल फ्रेम वाले छह ऐसे चश्मे मिले जैसे नेताजी सुभाषचंद्र बोस लगाया करते थे। इसके अलावा नेताजी से जुड़ी कई दुर्लभ तस्वीरें भी मिली हैं। ज्यादातर फोटो आजाद हिंद फौज के प्रमुख अफसरों की हैं।
साथ ही अस्पताल में किसी शख्स के भर्ती होने की फोटो में नर्स डेनियल दिख रही हैं, जिन्हें नेताजी का करीबी माना जाता है।
गुमनामी बाबा के सामान को अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय में रखने से पहले बन रही सूची और उसका ब्यौरा तैयार करने का काम गुरुवार को पूरा होना था, मगर अब भी करीब 50 चीजों की सूची नहीं बन पाई है। शुक्रवार को इनकी सूची बनाई जाएगी।
नेताजी की मौत की जांच करने वाले मुखर्जी आयोग को भेजे गए दो बक्सों में आखिरी बक्से के सामान का ब्यौरा कोषागार में तैयार किया गया।
समर गुहा ने कहा था कि वह जीवित थे पर रूस चले गए
गुरुवार को मिली एक फोटो वह है, जिसे 13 मार्च 1978 को ‘युगांतर’ में प्रकाशित कर सांसद व नेताजी सुभाषचंद्र बोस के करीबी रहे समर गुहा ने उनके जिंदा होने का दावा कर कहा था कि वे रूस चले गए थे।
बक्से से लीला राय, समर गुहा, डॉ. पवित्र राय, सुनीलकृष्ण गुप्ता जैसे आजाद हिंद फौज से जुड़े लोगों की तस्वीरें मिली हैं। कुछ तस्वीरें किसी अस्पताल की हैं, जिसमें बेड पर भर्ती शख्स के साथ नर्स डेनियल दिख रही हैं। मुखर्जी आयोग की ओर से कई उल्लेखनीय बयानों के विवरण भी मिले हैं।
आजाद हिंद फौज के सदस्य रहे निजामुद्दीन के बेटे अकरम ने जर्मनी में बनी दूरबीन को पहचाना है, जिसका इस्तेमाल नेताजी और आजाद हिंद फौज के दूसरे सदस्य करते थे।
डॉ. प्रतिभा मोहन रॉय की लिखीं अंतर्देशीय चिट्ठियां और टेलीग्राम भी बक्से में मिले हैं। डॉ. रॉय नेताजी की इंडियन नेशनल आर्मी की इंटेलिजेंस विंग में सीनियर अधिकारी थे।
सभी फोटो नेताजी व उनकी आर्मी से जुड़ी
गुमनामी बाबा के सामान की सूची बना रही टीम में शामिल शक्ति सिंह ने बताया कि बहुत से फोटो की पहचान करना मुश्किल है।
एक फोटो में शोकसभा का दृश्य है, दूसरे में सैकड़ों लोगों से भरा एक हॉल दिख रहा है। एक फोटो में एक युवती तिलक लगा रही है। सभी फोटो नेताजी के परिवार व उनकी आर्मी से जुड़ी लग रही हैं। इसके पहले सामान में पद्मा समेत दूसरी नदियों वाला बांग्लादेश का हाथ से बना चित्र मिला है।
सुरेश चंद्र बोस की नेताजी पर लिखी किताब ‘सिंटिएंट रिपोर्ट्स’ भी मिली है। इसमें एक प्लेन का सीटिंग प्लान है, जिसमें दिखाया गया है कि नेताजी किस सीट पर बैठे थे। दूसरे नक्शे में हवाई जहाज की ही कुछ और जानकारी है।
बक्से में ‘हिमालयन ब्लंडर्स’ किताब की प्रति भी मिली थी, इसमें कई जगह पर टेक्स्ट अंडरलाइन किया गया था और लगभग हर दूसरे पेज पर नोट्स थे।
16 सितंबर 1972 को लिखा तत्कालीन आरएसएस प्रमुख एमएस गोलवलकर का खत भी मिल चुका है, जिसमें गोलवलकर ने भगवनजी को पूज्यपाद श्रीमान स्वामी विजयानंदजी महाराज लिखा है।