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असंभव नहीं है अयोध्या मुद्दे का हल, मुसलमान भी चाहते हैं राम मंदिर: श्रीश्री रविशंकर

Fri, 17 Nov 2017 11:14 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 17 Nov 2017 11:14 AM IST
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अयोध्या में श्री श्री रविशंकर - फोटो : amar ujala

राम मंदिर विवाद के हल का फॉर्मूला तलाशने अयोध्या पहुंचे आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि 25 साल में बहुत कुछ बदल गया है। आज हिन्दू समाज ही नहीं बल्कि बड़ी संख्या में मुसलमान भी मंदिर निर्माण चाहते हैं। श्रीश्री गुरुवार को अयोध्या विवाद से जुड़े पक्षकारों और संत-महात्माओं से मिलने के बाद निर्मोही अखाड़ा में पत्रकारों से बात कर रहे थे।

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श्रीश्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आएगा उसे हर कोई मानेगा, लेकिन यह सुनहरा अवसर है जब कोर्ट के निर्णय से पहले आपसी सुलह समझौते के जरिये इस विवाद का हल हो जाए। आशा के साथ निकला हूं, किसी फॉर्मूले को लेकर नहीं। मैं सभी पक्षों से बात करूंगा व अपना प्रयास जारी रखूंगा।
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पढ़ें:- राम मंदिर मुद्दे पर कई पक्षों से मिले श्री श्री रविशंकर, बोले-कोई फॉर्मूला नहीं, बातचीत जारी रहेगी
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उन्होंने कहा कि यह सौहार्द्र, स्नेह और भाईचारा दिखाने का अवसर है। जो न्यायालय में होगा वह सर्वसम्मत से नहीं होगा तो आगे 50 साल बाद यह मुद्दा फिर उठ सकता है। यदि स्थायी हल चाहते हैं तो दोनों समुदायों के सौहार्द्र से सहयोग से भव्य मंदिर बने।


यह सपना बहुत बड़ा दिखता है, कभी-कभी लगता है यह असंभव है, लेकिन मैं नहीं मानता, इसको संभव करा सकते हैं। उन्होंने श्रीरामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास, बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी व हाजी महबूब से बंद कमरे में चर्चा की। श्रीश्री रविशंकर ने रामलला के दरबार में भी हाजिरी लगाई।

चंद दिनों की जिंदगी, इसमें नफरत की जगह कहां

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अयोध्या विवाद में सुलह-समझौते की कोशिशें पहले भी हुई हैं जो नाकाम हुई हैं। इसके बावजूद हम एक प्रयास और कर रहे हैं। मुझे पता है कि ये आसान नहीं हैं लेकिन ये असंभव भी नहीं है। ये बात श्रीश्री रविशंकर ने फार्ब्स इंटर कॉलेज में आयोजित इस्तकबालिया जलसे में मुसलिम समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए कही।

चंद दिन की जिंदगी है, इसमें नफरत की जगह कहां... इन शब्दों से अपनी बात शुरू करते हुए श्रीश्री ने कहा कि आज दोनों समुदाय के बीच इतनी दूरियां नहीं बन गई हैं कि हम बैठकर बात भी ना कर सकें। इसमें किसी नेता व कोर्ट की जरूरत नहीं है, हमें एक ऐसी मिसाल पेश करनी होगी जो पूरे विश्व के लिए प्रेरणा की बात बन जाए।

कहा कि सम्मान, सहयोग, सद्भाव व सौहार्द्र को मानने वाली शख्सियतें आज भी हैं और वो इस विवाद का हल चाहती हैं, ये विवाद आपसी प्रेम व भाईचारे से ही हल होना चाहिए। कहा कि इसका हल दोनों समुदायों की सहमति से ही होना चाहिए।

पूर्व आईएएस सूर्य प्रताप सिंह की अगुवाई में आयोजित इस जलसे में मंच पर मौजूद मुफ्ती मेराज, सै. निजाम अशरफ, इकबाल मुस्तफा व मंजर मेंहदी ने श्रीश्री का स्वागत किया तो उन्होंने भी इनको अंगवस्त्र व माल्यार्पण कर शांति और सद्भाव से विवाद का हल निकालने की अपील की।

मुस्लिम पक्षकारों को कोई खरीद नहीं सकता: हाजी महबूब

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श्री श्री रविशंकर व इकबाल अंसारी - फोटो : amar ujala

श्रीश्री रविशंकर शाम को बाबरी मस्जिद के पक्षकार हाजी महबूब से उनके आवास पर जाकर मिले। श्रीश्री के जाने के बाद हाजी महबूब ने कहा कि मुस्लिम पक्षकारों को कोई खरीद नहीं सकता। इकबाल अंसारी भले ही कम पढ़ा-लिखा हो लेकिन मुद्दे की बात करता है। जो 1992 के हालात थे वह न दोहराए जाएं, प्यार-मोहब्बत से मसला हल हो। कहा कि श्रीश्री कुछ बात हुई है, जब वे बताएंगे तब मैं सामने रखूंगा।

मेरा शुरू से ये कहना है कि मस्जिद की जमीन छोड़ दीजिए, उसके बाद शेष जमीन जो मुसलमानों की है उस पर मंदिर बना लीजिए हमें ऐतराज नहीं है। हमें केवल मस्जिद के लिए 120-90 फुट का इलाका छोड़ दीजिए। कहा, हमेशा चाहते हैं बातचीत से मसला हल हो जाए। कुछ बातें मेरी उनकी हुई हैं, यदि वे उस पर कायम हैं तो हो सकता है।

कहा कि चंद पार्टियां ऐसी हैं जो नहीं चाहतीं कि मंदिर बने उनकी दुकान बंद हो जाएगी। विहिप तो हमेशा ये चाहती रही है। विहिप पार्टी नहीं, हिन्दूमहासभा भी नहीं है फिर भी दावेदारी ठोकती है। निर्मोही अखाड़ा, महंत धर्मदास पार्टी हैं, धर्मदास के गुरू ने मूर्ति रखी थी। इसके बाद मुकदमा हुआ। आडवाणी साहब ने आवाज उठाकर मस्जिद को शहीद करा दिया। इसके बाद मैंने रिट दायर की और मुल्जिम बना दिया। इन सब चीजों को किनारे रखकर मुहब्बत से सुलह हो सकती है।

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