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महाराष्ट्र और यूपी को एक सूत्र में पिरोती है कला, अनूठे रंगों से जुड़ा है यह रिश्ता
Tue, 11 Jun 2019 11:06 AM IST
sahaj sahaj
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
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Published by: sahaj sahaj
Updated Tue, 11 Jun 2019 11:06 AM IST
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चित्रकला कार्यशाला
- फोटो : अमर उजाला
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कला लोगों को जोड़ती है। विश्व में भारत की पहचान भी कला से है। भारत में कला का इतिहास बहुत ही समृद्ध रहा है। हमारे देश में 64 कलाएं विद्यमान हैं। इस गौरवशाली परंपरा को आज भी गुफाओं में देखा जा सकता है। यूपी और महाराष्ट्र को कला ही एक सूत्र में पिरोती है। यह चित्रकला कार्यशाला महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश को एक-दूसरे के और करीब लाने का प्रयास है। कलाकारों ने चित्रों में राजभवन के अनूठे रंगों को उभारा है।
यह कहना है राज्यपाल राम नाईक का, जो सोमवार को राजभवन में गत छह जून से चल रही पांच दिवसीय चित्रकला कार्यशाला के समापन पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। कार्यशाला का आयोजन ललित कला अकादमी, राष्ट्रीय कला संस्थान व संस्कार भारती के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था। इस मौके पर कलाकारों को सम्मानित भी किया गया।
राज्यपाल ने कहा कि 22 जुलाई, 2014 को जब राज्यपाल के पद की शपथ ली थी तो राजभवन के दरवाजे सभी के लिए खोल दिए और उसे लोकभवन बनाने का प्रयास किया। इन पांच सालों में तीस हजार से अधिक लोगों से भेंट की। उन्होंने कहा कि राजभवन की सुंदरता चित्रों के माध्यम से और सुंदर होकर बाहर आई है।
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नाईक ने कहा कि कलाकारों ने महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के बीच सेतु का काम किया। मुंबई को आर्थिक राजधानी बनाने में उत्तर भारतीयों का महत्वपूर्ण योगदान है। भगवान रामचंद्र ने अयोध्या से वनवास प्रस्थान पर महाराष्ट्र की पंचवटी को चुना था।
ऐसे ही छत्रपति शिवाजी का राज्याभिषेक काशी के विद्वान गागा भट्ट ने किया था। 1857 में स्वतंत्रता संग्राम उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ, लेकिन रानी लक्ष्मीबाई, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जैसे महानुभाव ऐसे थे, जिनका संबंध महाराष्ट्र से था।
इस मौके पर महापौर संयुक्ता भाटिया ने कहा कि कलाकारों ने चित्रों को मोती की तरह चुनकर माला में पिरोया है। समारोह में राज्यपाल की पत्नी कुंदा नाईक, अपर मुख्य सचिव हेमंत राव, पद्मश्री बाबा योगेंद्र, संस्कार भारती के संगठन मंत्री गिरीश चंद्र, ललित कला अकादमी के धर्मसिंह सहित कई कलाकार उपस्थित रहे।
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यह कहना है राज्यपाल राम नाईक का, जो सोमवार को राजभवन में गत छह जून से चल रही पांच दिवसीय चित्रकला कार्यशाला के समापन पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। कार्यशाला का आयोजन ललित कला अकादमी, राष्ट्रीय कला संस्थान व संस्कार भारती के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था। इस मौके पर कलाकारों को सम्मानित भी किया गया।
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राज्यपाल ने कहा कि 22 जुलाई, 2014 को जब राज्यपाल के पद की शपथ ली थी तो राजभवन के दरवाजे सभी के लिए खोल दिए और उसे लोकभवन बनाने का प्रयास किया। इन पांच सालों में तीस हजार से अधिक लोगों से भेंट की। उन्होंने कहा कि राजभवन की सुंदरता चित्रों के माध्यम से और सुंदर होकर बाहर आई है।
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नाईक ने कहा कि कलाकारों ने महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के बीच सेतु का काम किया। मुंबई को आर्थिक राजधानी बनाने में उत्तर भारतीयों का महत्वपूर्ण योगदान है। भगवान रामचंद्र ने अयोध्या से वनवास प्रस्थान पर महाराष्ट्र की पंचवटी को चुना था।
ऐसे ही छत्रपति शिवाजी का राज्याभिषेक काशी के विद्वान गागा भट्ट ने किया था। 1857 में स्वतंत्रता संग्राम उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ, लेकिन रानी लक्ष्मीबाई, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जैसे महानुभाव ऐसे थे, जिनका संबंध महाराष्ट्र से था।
इस मौके पर महापौर संयुक्ता भाटिया ने कहा कि कलाकारों ने चित्रों को मोती की तरह चुनकर माला में पिरोया है। समारोह में राज्यपाल की पत्नी कुंदा नाईक, अपर मुख्य सचिव हेमंत राव, पद्मश्री बाबा योगेंद्र, संस्कार भारती के संगठन मंत्री गिरीश चंद्र, ललित कला अकादमी के धर्मसिंह सहित कई कलाकार उपस्थित रहे।
‘डेढ़ घंटे तक एक पोज में कलाकारों ने बैठाया’
राज्यपाल राम नाईक ने बताया कि कलाकारों ने उनका पोर्टेट भी बनाया है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि मेरा पोर्टेट सुंदर है, पर यदि मैं और सुंदर होता तो चित्र भी ज्यादा सुंदर होता। राज्यपाल ने बताया कि चित्र के लिए कलाकारों ने डेढ़ घंटे तक बैठाकर रखा।
कोई कहता इधर देखिए तो कोई बोलता उधर। पर, कलाकारों ने चित्रकारी में अपनी असीमित कल्पना शक्ति को दर्शाया है। राजभवन के भी एक से एक नायाब चित्र कलाकारों ने कैनवास पर बनाए हैं, जो लाजवाब हैं। वहीं बाबा योगेंद्र ने कहाकि कलाकारों ने जब राज्यपाल का चित्र बनाया तो उनके मन में क्या रहा होगा। उनकी साधना व तपस्या को भी कलाकारों ने चित्र में उतारने का प्रयास किया।
इन कलाकारों का हुआ सम्मान
कार्यशाला में प्रतिभाग करने वाले दस कलाकारों को अभिनंदित किया गया। उन्हें पांच-पांच हजार रुपये, अंगवस्त्र प्रदान किया गया। सम्मानित होने वालों में सांगली (महाराष्ट्र) के मंगेश आनंदराव पाटिल, औरंगाबाद के नानासाहेब भाउसाहेब येओले, पुणे के उत्तम रामचंद्र साठे, लखनऊ के अमित कुमार, महाराष्ट्र के मनोज कुमार एम साकले, लखनऊ के भारत भूषण शर्मा, कमलेश्वर शर्मा, महाराष्ट्र के सत्यजीत वारेकर, पुणे की मंजरी मोरे व सुरभि ग्वालेकर शामिल रहीं।
कोई कहता इधर देखिए तो कोई बोलता उधर। पर, कलाकारों ने चित्रकारी में अपनी असीमित कल्पना शक्ति को दर्शाया है। राजभवन के भी एक से एक नायाब चित्र कलाकारों ने कैनवास पर बनाए हैं, जो लाजवाब हैं। वहीं बाबा योगेंद्र ने कहाकि कलाकारों ने जब राज्यपाल का चित्र बनाया तो उनके मन में क्या रहा होगा। उनकी साधना व तपस्या को भी कलाकारों ने चित्र में उतारने का प्रयास किया।
इन कलाकारों का हुआ सम्मान
कार्यशाला में प्रतिभाग करने वाले दस कलाकारों को अभिनंदित किया गया। उन्हें पांच-पांच हजार रुपये, अंगवस्त्र प्रदान किया गया। सम्मानित होने वालों में सांगली (महाराष्ट्र) के मंगेश आनंदराव पाटिल, औरंगाबाद के नानासाहेब भाउसाहेब येओले, पुणे के उत्तम रामचंद्र साठे, लखनऊ के अमित कुमार, महाराष्ट्र के मनोज कुमार एम साकले, लखनऊ के भारत भूषण शर्मा, कमलेश्वर शर्मा, महाराष्ट्र के सत्यजीत वारेकर, पुणे की मंजरी मोरे व सुरभि ग्वालेकर शामिल रहीं।