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यूपी: धार्मिक भावनाएं भड़काने के मामले में स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी, सात साल से चल रहा केस

Wed, 12 Jan 2022 08:48 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, सुल्तानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, सुल्तानपुर Published by: ishwar ashish Updated Wed, 12 Jan 2022 08:48 PM IST
सार

धार्मिक भावनाएं भड़काने के मामले में यूपी सरकार में मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।

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Arrest warrant issued against Swami Prasad maurya.
स्वामी प्रसाद मौर्य - फोटो : amar ujala

विस्तार

देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में बुधवार को पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ स्पेशल मजिस्ट्रेट एमपी-एमएलए/एसीजेएम द्वितीय योगेश यादव ने गैर जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह आदेश पूर्व मंत्री के अदालत में हाजिर नहीं होने पर सुनाया। मामले में अगली सुनवाई 24 जनवरी को होगी।

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धनपतगंज ब्लॉक के जूडापट्टी गांव निवासी अधिवक्ता अनिल तिवारी ने देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ अदालत में मुकदमा (परिवाद) दायर किया था। कोर्ट ने परिवादी व अन्य गवाहों का बयान दर्ज करने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य को विचारण के लिए तलब किया था। अदालत में हाजिर न होने पर कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। इसे स्वामी प्रसाद मौर्य ने याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने वर्ष 2016 में कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।
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बीती छह जनवरी को एमपी-एमएलए कोर्ट ने पूर्व मंत्री को हाजिर होने का आदेश देते हुए 12 जनवरी तिथि तय की थी। मामले में बुधवार को पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य अदालत में हाजिर नहीं हुए। इस पर स्पेशल मजिस्ट्रेट एमपी-एमएलए/एसीजेएम द्वितीय योगेश यादव ने पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया है। मामले में अगली सुनवाई 24 जनवरी को होगी।
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यह था मामला
वर्ष 2014 में लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने हिंदू देवी-देवताओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उस समय वे बसपा में थे। समाचार पत्रों में उनका बयान छपने के बाद अधिवक्ता अनिल तिवारी ने उनके खिलाफ कोर्ट में मुकदमा (परिवाद) दायर किया था। कोर्ट ने उन्हें तलब किया था। मजिस्ट्रेट के तलबी आदेश को स्वामी प्रसाद मौर्य की ओर से जिला जज की कोर्ट में निगरानी अर्जी दायर कर चुनौती दी गई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ स्वामी प्रसाद मौर्य हाईकोर्ट गये थे। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने जन प्रतिनिधियों से जुड़े मामले में नया दिशा-निर्देश जारी किया था। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि छह माह बीत जाने के बाद स्टे आदेश निरस्त हो जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश के अनुपालन में कोर्ट ने पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य को 12 जनवरी को अदालत में हाजिर होने का आदेश दिया था।

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