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पूर्व मंत्री रविदास के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी, वर्षों पुराने मामलों में चल रहे हैं गैरहाजिर
Wed, 05 Feb 2020 02:51 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Wed, 05 Feb 2020 02:51 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
बलवा, जानलेवा हमला करने के वर्षों पुराने तीन अलग-अलग मामलों में सालों से गैरहाजिर चल रहे पूर्व मंत्री रविदास मेहरोत्रा समेत 3 के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश पवन कुमार राय ने तीनों मामलों में सुनवाई के लिए 17 फरवरी की तारीख तय की है।
लखनऊ में हजरतगंज के पहले मामले में कोर्ट ने रविदास, समरबहादुर सिंह और अशोक कुमार सिंह के खिलाफ वारंट जारी कर कहा कि आरोपी लगातार गैरहाजिर हैं। वहीं यह मामला 36 वर्षों से लंबित है। हजरतगंज के दरोगा अखलाक अहमद ने 27 फरवरी 1984 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि रविदास मेहरोत्रा के नेतृत्व में 15 से 20 लोग बगैर अनुमति जुलूस के रूप में सरकार विरोधी नारे लगाते हुए हलवासिया मार्केट की तरफ से आए और दुकानदारों से मारपीट करते हुए दुकान बंद करने लगे।
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लखनऊ में हजरतगंज के पहले मामले में कोर्ट ने रविदास, समरबहादुर सिंह और अशोक कुमार सिंह के खिलाफ वारंट जारी कर कहा कि आरोपी लगातार गैरहाजिर हैं। वहीं यह मामला 36 वर्षों से लंबित है। हजरतगंज के दरोगा अखलाक अहमद ने 27 फरवरी 1984 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि रविदास मेहरोत्रा के नेतृत्व में 15 से 20 लोग बगैर अनुमति जुलूस के रूप में सरकार विरोधी नारे लगाते हुए हलवासिया मार्केट की तरफ से आए और दुकानदारों से मारपीट करते हुए दुकान बंद करने लगे।
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जमानतदारों को नोटिस भी जारी किया
वहीं, हजरतगंज के अन्य मामले की रिपोर्ट दरोगा उमाशंकर मिश्र ने 15 अप्रैल 2003 को दर्ज कराई थी कि रविदास मेहरोत्रा, फाकिर सिद्दीकी साथियों के साथ आए और परिवर्तन चौक के अंदर घुसकर सरकार विरोधी नारे लगाए और पुतला जलाकर भाग गए। कोर्ट ने इस मामले में रविदास के खिलाफ वारंट जारी किया है।
तीसरे मामले में कोर्ट ने रविदास के खिलाफ जहां वारंट जारी किया, वहीं जमानतदारों को नोटिस भी जारी किया है। चौक के तत्कालीन प्रभारी केपी सिंह ने 20 मार्च 1993 को दर्ज कराई थी कि रविदास के भड़काने पर और नेतृत्व में भीड़ ने उत्तेजक नारे लगाए। वाहनों को रोककर नुकसान पहुंचाया और जब भीड़ को रोकने का प्रयास किया गया तो रविदास के भड़काने पर भीड़ ने पत्थर और बम से हमला किया।
तीसरे मामले में कोर्ट ने रविदास के खिलाफ जहां वारंट जारी किया, वहीं जमानतदारों को नोटिस भी जारी किया है। चौक के तत्कालीन प्रभारी केपी सिंह ने 20 मार्च 1993 को दर्ज कराई थी कि रविदास के भड़काने पर और नेतृत्व में भीड़ ने उत्तेजक नारे लगाए। वाहनों को रोककर नुकसान पहुंचाया और जब भीड़ को रोकने का प्रयास किया गया तो रविदास के भड़काने पर भीड़ ने पत्थर और बम से हमला किया।