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कैंसर पीड़ित बच्चों के चेहरे पर मुस्कान ला रही प्रो. अर्चना

Mon, 13 Nov 2017 11:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 13 Nov 2017 11:31 PM IST
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archana kumar working for cancer patients.
प्रो. अर्चना - फोटो : amar ujala

दिनभर कैंसर पीड़ित बच्चों का इलाज। कभी उनके लिए दवाइयां मुहैया कराने की जद्दोजहद तो कभी इलाज अधूरा छोड़ गए बच्चों के माता-पिता को मोबाइल फोन कॉल करके वापस आने के लिए समझाना... कि कैंसर का इलाज संभव है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि आप अपने बच्चे का लगातार इलाज कराएं। ऐसी ही है प्रो. अर्चना कुमार, जो न सिर्फ कैंसर पीड़ित बच्चों के इलाज में दिल से जुड़ी है, वहीं उनके माता-पिता के चेहरे की खोई हुई हंसी को वापस लाने के लिए दिन-रात जुटी है।

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केजीएमयू के बाल रोग विभाग में दो कमरों में कैंसर ग्रस्त बच्चों के इलाज से शुरू हुआ उनका सफर आज एक पीडियाट्रिक आंकोलॉजी विभाग के रूप में पूरा हो चुका है। वैसे तो कैंसर पीड़ित बच्चों के इलाज की बीएचयू व एसजीपीजीआई में भी व्यवस्था है, लेकिन पीडियाट्रिक आंकोलॉजी विभाग सिर्फ केजीएमयू में है। प्रो. अर्चना कुमार ने बताया कि एक साल में 120 से 150 नए कैंसर पीड़ित बच्चे सामने आते हैं। इस साल अब तक नए-पुराने बच्चे मिलाकर कुल 350 का इलाज उनके विभाग में चल रहा है।
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उन्होंने बताया कि सीएसएस के तहत पीडियाट्रिक आंकोलॉजी विभाग को बच्चों को खुश रखने के माहौल के अनुरूप बनाया गया है। विभाग में कुल 70 बेड हैं, जिन पर बच्चों को भर्ती किया जाता है। उन्होंने बताया कि कैंसर पीड़ित बच्चे अधिकतर बहुत गरीब परिवारों से होते हैं। वह आर्थिक परेशानी के कारण इलाज बीच में ही छोड़कर चले जाते हैं।
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ऐसे परिवारों को वापस बुलाकर समझाना पड़ता है कि इलाज अधूरा करने से कैंसर पूरी तरह से ठीक नहीं होता है। प्रो. अर्चना कुमार ने बताया कि बड़ों और बच्चों के कैंसर में अंतर है। बच्चों में कैंसर अधिकतर कोशिकाओं के डीएनए में बदलाव के कारण होता है। कभी-कभी ये बच्चों में जन्म से पहले ही हो जाता है तो कभी जन्म लेने के बाद ये बदलाव होते हैं। बच्चों का शरीर वयस्कों के मुकाबले कीमोथैरेपी के बाद अच्छे परिणाम देता है। इसलिए बच्चों के कैंसर का इलाज संभव है।


प्रदेश में चिविवि के अतिरिक्त सिर्फ बीएचयू में ही बच्चों के कैंसर की अलग से व्यवस्था है। इसके बावजूद पूरी तरह से इलाज के लिए समर्पित केंद्रों का अभाव है। इसलिए कैंसर पीड़ित बच्चों का इलाज करने के लिए केजीएमयू की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।

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