संवाद में साध्वी बोलीं- बेटियां ठान लें तो तारे तोड़ लाएं, अनुप्रिया ने किया नारी शक्ति को प्रणाम
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केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि बेटियों को न झिझकने की जरूरत है और न ठिठकने की। बेटियों और बहनों अगर तुम ठान लो तो गगन के तारे तोड़ सकती हो। आखिर किस मामले में हम पुरुषों से कम हैं जो खुद को कमजोर समझें। नारी के बिना सृष्टि की कल्पना नहीं की जा सकती। तब भी हम खुद को हेय समझें यह ठीक नहीं। आगे बढ़ोगी तो समाज की निगाह खुद ब खुद बदल जाएगी। पहले रोकने और टोकने वाले पीठ ठोकने लगेंगे।
उन्होंने कहा कि बेटियों को चाहिए कि वह अपने भीतर हीनता नहीं बल्कि श्रेष्ठता का एहसास पालें। आखिर पुरुषों ने ही नाम नहीं कमाया है। वीरता, अध्यात्म, खेल, सेना और परिवार की देखरेख में महिलाएं पुरुषों से पीछे नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘बहनों अपनी शक्ति जगाकर जुट जाओ निर्माण में,
संस्कृति का सौभाग्य छिपा है, नारी के उत्थान में।’
साध्वी निरंजन ज्योति ने संवाद में आई बेटियों के अंदर हौसला भरते हुए कहा, हमारे अंदर कौन सी काबिलियत नहीं है। मैं तो कहतीं हूं कि हमारे अंदर वह विशेषता है जो पुरुषों में नहीं है। बच्चे को जन्म हम देते हैं। उसे नौ महीने गर्भ में रखने की क्षमता हममे है। बच्चे को अच्छी शिक्षा देने का काम भी मातृ शक्ति ही कर सकती है। लोग कहते हैं कि पुरुषों का जमाना है। पर, केंद्र सरकार में रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, वस्त्र मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और फूड प्रोसेसिंग मंत्रालय महिलाओं के हाथ में हैं। इससे साबित होता है कि कोई भी काम ऐसा नहीं है जिसे महिला नहीं कर सकती।
जीवन के चार प्रमुख विद्यालय हमारे हाथ
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जीवन के चार विद्यालय, गर्भ विद्यालय, गोद विद्यालय, परिवार विद्यालय और शिक्षा विद्यालय प्रमुख हैं। चार में तीन विद्यालय तो सिर्फ नारी के ही अधीन है। चौथे शिक्षा विद्यालय में भी महिलाओं की श्रेष्ठता साबित हो चुकी है। नारी वह शक्ति है जो व्यक्ति के जीवन की दिशा तय करती है। जीजाबाई ने गोद में ही दूध से अपने पुत्र में संस्कार दिए। विद्यावती ने अपने दूध के बल पर भगत सिंह को हंसते हंसते फांसी पर चढ़ने का साहस दिया था।
जो कोसते थे, वही स्वागत में खड़े थे
उन्होंने कहा कि 14 वर्ष की आयु में जब वह संन्यास लेने घर से निकली थीं तब पूरे गांव ने उनके परिवार को कोसा था। पूरे गांव ने परिवार से कहा था, ‘तुम्हारी बेटी तो पूरे गांव की नाक कटाकर साधु हो गई। पर, उसी गांव में जब मैं विधायक बनकर पहुंची तो पूरा गांव स्वागत के लिए आ गया।’ उन्हें एहसास हुआ कि गांव की बेटी ने कुछ मुकाम हासिल किया है। कहा कि बेटियां काबिलियत हासिल कर जवाब देने का साहस पैदा करें। कहा कि वे 14 वर्ष की आयु से संन्यासी हैं। आज तक एक व्यक्ति ने गलत निगाह उठाकर देखने की हिम्मत नहीं की।
कैकई के रूप में भी वंदनीय
साध्वी ने कहा कि बेटियों को तो कैकई के चरित्र पर भी गर्व करना चाहिए। जिन्हें इतिहास याद होगा तो उन्हें पता होगा कि युद्ध के समय राजा दशरथ के रथ के पहिये की कील निकलने पर कैकई ने ही अपनी अंगुली लगाकर रथ का पहिया रोका था। तभी राजा दशरथ युद्ध जीत पाए थे।
मन के जीते जीत है
उन्होंने कहा कि मनुष्य काम करने से नहीं थकता। मन से थकता है। कहा, ‘मेरे पिता मजदूरी करते थे और कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं थी। पर, अपने मन को मजबूत कर लगातार मेहनत और प्रयास से मैं आज केंद्र में मंत्री तक पहुंच गई।’ कहा कि मनुष्य के जीवन में उसका मन ही बाधा है। मन कमजोर पड़ गया तो अच्छे खासे रास्ते से विचलित हो सकते है। कहा कि आगे बढ़ने में गरीबी और समाज कहीं बाधक नहीं है।
अनुप्रिया पटेल बोलीं, मंत्रिमंडल में ज्यादातर काम महिलाएं ही संभाल रही हैं
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा, अपराजिता अमर उजाला की बेहतरीन पहल है। हम नारी शक्ति को प्रणाम करते हैं। हमारे मंत्रिमंडल में ज्यादातर काम महिलाएं ही संभाल रही हैं। आप ज्यादा दूर न जाएं हमारे देश की रक्षा मंत्री भी एक महिला है, निर्मला सीतारमण ने वह कर दिखाया है जो पुरुष नहीं कर पाए। उन्होंने पाकिस्तान को उसी की भाषा में दिया।
बेटियां शिक्षित हो इसके लिए बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ अभियान चलाया गया। हमने खुले में शौच को बंद करने के लिए शौचालयों का निर्माण कराया। मैटरनिटी लीव की अवधि बढ़ाई गई। लक्षय अभियान से मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य में सुधार लाया गया है। सरकार ने अपने प्रयासों से यह सुनिश्चित किया कि महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार हो। महिलाओं को अस्तित्व से प्यार करना सीखना होगा। महिलाओं को अपनी शक्ति को दुनिया को दिखाना होगा।
उन्होंने कहा कि मैं अपने दिल में महसूस करती हूं, मजबूत महिलाएं एक दूसरे का सहारा बनती हैं। एक आदमी कामयाब होता है तो कहा जाता है कि वह काबिल है। वहीं औरत कामयाब होती है तो कहा जाता है कि कुछ तो कारण होगा। यह मानसिकता हमे बदलनी होगी। कभी भी किसी लड़की की जिंदगी आसान नहीं होती। बेटियों को तो खूब समझाते हैं पर लड़कों को समझाना भूल जाते हैं।