भर्ती में भ्रष्टाचार: ऐसी मनमानी... राज्यपाल की मंजूरी से पहले जारी हो गया नियुक्ति आदेश, खुलासे ने उड़ाए होश
एक्सरे टेक्नीशियन भर्ती में भ्रष्टाचार मामले में एक और खुलासा हुआ है। राज्यपाल की मंजूरी से पहले ही नियुक्ति आदेश जारी कर दिया गया। हर स्तर पर जमकर मनमानी की गई। आगे पढ़ें पूरा अपडेट...
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उत्तर प्रदेश में एक्सरे टेक्नीशियन और लैब टेक्नीशियन की भर्ती में हर स्तर पर विभागीय अधिकारियों ने मनमानी की है। हालत यह है कि एक्सरे टेक्नीशियन भर्ती 2016 में नियमावली बदलाव के संबंध में राज्यपाल का आदेश जारी होने से पहले ही नियुक्ति आदेश जारी कर दिया गया था।
प्रदेश में 2013 में एक्सरे टेक्नीशियन भर्ती के लिए 287 पदों पर आवेदन मांगे गए। इस भर्ती में कई तरह के गंभीर आरोप लगे। जांच में आरोप सही पाए गए और शासन की ओर से 21 जून 2014 को भर्ती प्रक्रिया निरस्त कर दिया। 2015 में अधीनस्थ चयन आयोग का गठन हुआ। फिर 403 पदों के लिए आवेदन मांगे गए।
इस तरह किया गया बदलाव
पहले हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और डिप्लोमा इन एक्सरे टेक्नीशियन के परीक्षा परिणाम के गुणांक के आधार पर 50 अंक और साक्षात्कार के आधार पर 50 अंक को समाहित करते हुए मेरिट सूची तैयार की किए जाने का नियम था। लेकिन, इसमें बदलाव किया गया। तय किया गया कि 100 अंक के बजाय योग्यताधारियों का सिर्फ 20 अंक का साक्षात्कार लिया जाएगा।
नियमों में बदलाव के लिए राज्यपाल को प्रस्ताव भेजा गया। इसी बीच मई 2016 में 20 अंकों के आधार पर साक्षात्कार करा लिया गया। 17 मई 2016 को परिणाम जारी कर दिया गया। इतना ही नहीं 25 मई को नियुक्ति पत्र जारी कर दिया गया। जबकि 10 जून 2016 को तत्कालीन शासन के विशेष सचिव अशोक कुमार श्रीवास्तव ने आदेश जारी किया गया कि समूह ग के पदों के लिए सीधी भर्ती नियमावली 2015 के नियम 8 (1) के तहत साक्षात्कार के अधिकतम अंक 20 निर्धारित करने के लिए राज्यपाल ने मंजूरी दे दी है।
ज्यादातर लोगों ने कार्यभार ग्रहण कर लिया
जब तक यह आदेश जारी होता उससे पहले ज्यादातर लोगों ने कार्यभार ग्रहण कर लिया। मालूम हो कि इसी 2016 की भर्ती में एक चयनित के नाम से पांच से छह लोगों ने अलग-अलग जिलों में कार्यभार ग्रहण किया है। जिसमें छह लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। अन्य के खिलाफ जांच चल रही है।