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बीएड प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन 12 फरवरी से, वेब कैमरों की निगरानी में होगा एग्जाम, यहां देखें- डेट
Wed, 12 Feb 2020 12:39 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Wed, 12 Feb 2020 12:39 PM IST
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- फोटो : amar ujala
लखनऊ विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित की जा रही बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन बुधवार से किए जाएंगे। आवेदन की अंतिम तारीख 6 मार्च है, जबकि विलंब शुल्क के साथ 11 मार्च तक फॉर्म जमा होंगे। 8 अप्रैल को प्रवेश परीक्षा और 11 मई को रिजल्ट घोषित किया जाएगा। काउंसलिंग एक जून से शुरू होगी।
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यह जानकारी लखनऊ विवि. के कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय और बीएड प्रवेश समन्वयक प्रो.अमिता बाजपेयी ने मंगलवार को मीडियाकर्मियों को दी। प्रो. बाजपेयी ने बताया कि प्रदेश भर के कॉलेजों में बीएड की करीब दो लाख सीटें हैं। सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 1500 रुपये और एससी-एसटी वर्ग के लिए 750 रुपये फीस निर्धारित की गई है।
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सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए विलंब शुल्क 500 रुपये और एससी-एसटी के लिए 250 रुपये है। 15 शहरों में दो पालियों में होने वाली परीक्षा के लिए केंद्रों की संख्या अभ्यर्थियों के हिसाब से तय होगी। अभ्यर्थियों को दोनों प्रश्नपत्रों की परीक्षा देना अनिवार्य है। प्रवेश परीक्षा सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में होगी। इससे लखनऊ विश्वविद्यालय से किसी भी परीक्षा केंद्र की जानकारी ली जा सकेगी।
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प्रवेश समन्वयक ने बताया कि केंद्र सरकार के फैसले के बाद दाखिलों में 10 फीसदी सीटें सवर्ण वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित होगी। पिछले साल अभ्यर्थियों को इसका लाभ नहीं मिला था। एनसीटीई से अनुमति के बाद इस साल इसका फायदा दिया जाएगा।
अंतिम बार हो सकता है दो वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम में दाखिला
पिछले दो वर्ष से बीएड पाठ्यक्रम की अवधि दो साल से बढ़ाकर चार साल करने पर विचार किया जा रहा है। एनसीटीई भी इंटीग्रेटेड बीएड कराने के बारे में निर्देश जारी कर चुका है। ऐसे में संभव है कि इस साल दो वर्षीय बीएड प्रवेश परीक्षा का अंतिम वर्ष हो। अगले वर्ष से बीएड की अवधि चार साल कर दी जाए।
प्रवेश समन्वयक ने बताया कि केंद्र सरकार के फैसले के बाद दाखिलों में 10 फीसदी सीटें सवर्ण वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित होगी। पिछले साल अभ्यर्थियों को इसका लाभ नहीं मिला था। एनसीटीई से अनुमति के बाद इस साल इसका फायदा दिया जाएगा।
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पिछले दो वर्ष से बीएड पाठ्यक्रम की अवधि दो साल से बढ़ाकर चार साल करने पर विचार किया जा रहा है। एनसीटीई भी इंटीग्रेटेड बीएड कराने के बारे में निर्देश जारी कर चुका है। ऐसे में संभव है कि इस साल दो वर्षीय बीएड प्रवेश परीक्षा का अंतिम वर्ष हो। अगले वर्ष से बीएड की अवधि चार साल कर दी जाए।
कुलपति ने बताया कि परीक्षा का आयोजन ऑनलाइन करने पर विचार किया गया था, पर फिलहाल इसे ऑफलाइन ही कराया जाएगा। यदि अगली बार प्रवेश परीक्षा की जिम्मेदारी लखनऊ विश्वविद्यालय को मिली तो परीक्षा ऑनलाइन कराई जा सकती है।