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राजीव आवास योजना में अब मुफ्त मकान
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Fri, 02 Aug 2013 09:17 AM IST
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राजीव गांधी आवास योजना में अब आवंटियों को फ्री में मकान
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बनाकर दिए जाएंगे। केंद्र की शर्तों के अनुसार उनसे लिए जाने वाले अंशदान
का भार अब राज्य सरकार उठाएगी।
यह निर्णय मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया। इसके मानक तय कर दिए गए है। केंद्र सरकार ने मलिन बस्तियों में रहने वालों को पक्के मकान बनाकर देने के लिए राजीव गांधी आवास योजना शुरू की है।
इसके तहत एक मकान पर 3.50 लाख से 4.50 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। खर्च का 50 फीसदी केंद्र देती है। सामान्य लाभार्थियों से 12 प्रतिशत व अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग व अन्य कमजोर वर्गों से 10 प्रतिशत लेने की व्यवस्था है।
शेष हिस्सा राज्य सरकार वहन करती है। नगर विकास मंत्री मो. आजम खां की अध्यक्षता में 3 अप्रैल 2013 को हुई बैठक में सहमति बनी थी कि चूंकि अति कमजोर वर्गों के लिए ये मकान बनाए जाने हैं, इसलिए इसका खर्च राज्य सरकार उठाए। इसके आधार पर यह प्रस्ताव कैबिनेट में रखा गया था, जिसे मंजूरी मिली है।
योजना में एक साथ कम से कम 20 मकान होने चाहिए। कच्चे मकानों या फिर झोपड़ी डालकर रहने वालों को उसी स्थान पर पक्के मकान बनाकर दिए जाएंगे।
आवंटी को एक बार पक्का मकान बनाकर दिए जाने के बाद उसे हटाया नहीं जाएगा। मलिन बस्ती से यदि किसी को हटाया जाना तो उसके लिए पहले वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।
इस योजना में जवाहर लाल नेहरू अरबन नवीनीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत सात सूत्री चार्टर व्यवस्था लागू की गई है। इसमें जमीन की सुरक्षा, किफायती आवास, पानी, सफाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी होगी।
आवासीय योजना में निर्माण शुरू होने के बाद भवन निर्माण सामग्री में समय-समय पर बाजार मूल्य में होने वाली वृद्धि का खर्च राज्य सरकार उठाएगी। मकान का निर्माण करने वाली कार्यदायी संस्था को 12.5 प्रतिशत सेंटेज दिया जाएगा।
यह निर्णय मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया। इसके मानक तय कर दिए गए है। केंद्र सरकार ने मलिन बस्तियों में रहने वालों को पक्के मकान बनाकर देने के लिए राजीव गांधी आवास योजना शुरू की है।
इसके तहत एक मकान पर 3.50 लाख से 4.50 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। खर्च का 50 फीसदी केंद्र देती है। सामान्य लाभार्थियों से 12 प्रतिशत व अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग व अन्य कमजोर वर्गों से 10 प्रतिशत लेने की व्यवस्था है।
शेष हिस्सा राज्य सरकार वहन करती है। नगर विकास मंत्री मो. आजम खां की अध्यक्षता में 3 अप्रैल 2013 को हुई बैठक में सहमति बनी थी कि चूंकि अति कमजोर वर्गों के लिए ये मकान बनाए जाने हैं, इसलिए इसका खर्च राज्य सरकार उठाए। इसके आधार पर यह प्रस्ताव कैबिनेट में रखा गया था, जिसे मंजूरी मिली है।
योजना में एक साथ कम से कम 20 मकान होने चाहिए। कच्चे मकानों या फिर झोपड़ी डालकर रहने वालों को उसी स्थान पर पक्के मकान बनाकर दिए जाएंगे।
आवंटी को एक बार पक्का मकान बनाकर दिए जाने के बाद उसे हटाया नहीं जाएगा। मलिन बस्ती से यदि किसी को हटाया जाना तो उसके लिए पहले वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।
इस योजना में जवाहर लाल नेहरू अरबन नवीनीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत सात सूत्री चार्टर व्यवस्था लागू की गई है। इसमें जमीन की सुरक्षा, किफायती आवास, पानी, सफाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी होगी।
आवासीय योजना में निर्माण शुरू होने के बाद भवन निर्माण सामग्री में समय-समय पर बाजार मूल्य में होने वाली वृद्धि का खर्च राज्य सरकार उठाएगी। मकान का निर्माण करने वाली कार्यदायी संस्था को 12.5 प्रतिशत सेंटेज दिया जाएगा।