अखिलेश से अपमान का बदला लेने के लिए अंसारी बंधुओं ने उठाया ये कदम
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सपा की कमान हाथ में आने के बाद अखिलेश यादव ने मुख्तार एंड कंपनी को जिस तरह किनारे किया है, उससे ये लोग अपमान का बदला लेने के लिए किसी नए ठौर की तलाश में थे।
वे किसी ऐसे मजबूत दल से दोस्ती करना चाहते थे जिससे मिलकर सपा को सबक सिखा सके। उधर, सपा में घमासान के बाद मुस्लिम समुदाय की दुविधा को देखते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती भी खुद को मुसलमानों का सच्चा हमदर्द बता रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, हर तरह से बेइज्जती के बाद भी अंसारी बंधुओं को उम्मीद थी कि सपा अपने सिंबल पर उन्हें भले ही चुनाव न लड़ाए, पर उनकी सीटों पर अपने उम्मीदवार न उतार करमदद कर सकती है। लेकिन सपा ने जब मुख्तार अंसारी के खिलाफ मऊ सीट पर अपना प्रत्याशी उतार दिया तो उनकी बची-खुची उम्मीद भी टूट गई।
बहनजी को समझा चुके हैं समीकरण
इस बात की अटकलें हैं कि सपा से मदद की उम्मीद समाप्त होने के बाद अंसारी बंधुओं ने बसपा की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। बसपा के एक मुस्लिम नेता ने पहल शुरू की है। अंसारी बंधुओं की ओर से दोस्ती की इच्छा जताने के बाद बातचीत शुरू हुई है।
मंगलवार को दिल्ली से लौटे अफजाल अंसारी के पार्क रोड स्थित आवास पर उनसे बसपा केएक कोऑर्डिनेटर ने लंबी वार्ता की। कई अन्य नेताओं ने भी अफजाल से भेंट की है। इस पहल में वह नेता भी शामिल हैं, जिन्होंने सपा में कौएद का विलय कराने में खास भूमिका निभाई थी और अब खुद बसपा में आ चुके हैं।
सूत्रों के अनुसार, मध्यस्थों ने बसपा सुप्रीमो को समझाया है कि अंसारी बंधुओं को साथ लेने से गाजीपुर, मऊ, बलिया, वाराणसी सहित पूर्वांचल की कई सीटों पर पार्टी को फायदा होगा। ज्यादातर बसपा नेता मानते हैं कि गाजीपुर की मोहम्मदाबाद सीट पर घोषित उम्मीदवार विनोद राय की चुनाव मैदान में मौजूदगी महज औपचारिकता साबित होगी।
अंसारी बंधुओं के लिए नई नहीं है बसपा
जबकि सपा के साथ रहते हुए मुख्तार कभी ‘साइकिल’ की सवारी नहीं कर सके। 2009 के लोकसभा चुनाव में मुख्तार वाराणसी से बसपा उम्मीदवार थे। तब मायावती ने कई सभाओं में साफ तौर पर कहा था कि अंसारी बंधु अपराधी नहीं हैं।