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अखिलेश की फोटो लगाकर उड़ाया गरीबों का मजाक!
ऋषि मिश्र/लखनऊ
Updated Wed, 04 Sep 2013 12:51 PM IST
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सीएम अखिलेश यादव की तस्वीर के साथ गरीबों को आवास देने की सूचना प्रकाशित कर अंसल एपीआई ने गरीबी का गजब मजाक उड़ाया है।
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अंसल एपीआई ने अपनी हाइटेक टाउनशिप में शासन की नीति के तहत ईडब्ल्यूएस और एलआईजी मकान देने की घोषणा की थी। लेकिन अब मकान देने के लिए जो योजना सामने आई है उसमें कई विसंगतियां हैं।
योजना के तहत ईडब्ल्यूएस फ्लैट के लिए उन्हें पात्र माना जाएगा जिनकी मासिक आय छह हजार रुपये है। लेकिन इस फ्लैट के लिए हर महीने 9025 रुपये मासिक किस्त देनी होगी।
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एलआईजी फ्लैट के लिए 12 हजार मासिक आय होनी चाहिए लेकिन इसके लिए हर महीने 16250 हजार रुपये की किस्त देनी होगी।
जबकि, हाईकोर्ट के एक हालिया आदेश के मुताबिक, गरीब आवासों की किस्त मासिक आय से 50 फीसदी से अधिक नहीं की जा सकती है। इन मकानों की कीमत इतनी है कि, मासिक वेतन के आधार इतना अधिक होम लोन कोई भी बैंक नहीं देगा।
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यही नहीं कंपनी ने शासन की लॉटरी नीति का भी अनुपालन नहीं किया है। नियम है कि तय समय सीमा में जितने भी आवेदन आएंगे सभी का पंजीकरण किया जाएगा और बाद में लॉटरी के आधार पर भवनों का आवंटन होगा।
जबकि यहां पंजीकरण पहले आओ पहले पाओ के आधार पर किया जाना है। उपलब्ध भवनों के बराबर आवेदन आ जाने पर पंजीकरण बंद कर दिया जाएगा। लॉटरी केवल फ्लैट्स की फ्लोर तय करने के लिए की जाएगी।
इन विसंगतियों को लेकर एलडीए उपाध्यक्ष ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने इन नियमों में बदलाव करने के लिए कंपनी से जवाब मांगा है। दूसरी तरफ कंपनी के अधिकारियों ने भी इन विसंगतियों को सुधारने पर भी हामी भरी है।
अंसल एपीआई ने अपनी सुल्तानपुर रोड स्थित हाइटेक टाउनशिप में गरीबों के लिए 4468 फ्लैटों की स्कीम पिछले दिनों लांच की है। इसमें दो हजार ईडब्ल्यूएस और 2468 एलआईजी फ्लैट बनाए जाने की योजना है।
ईडब्ल्यूएस की कीमत 3.25 लाख रुपये और एलआईजी की कीमत 5.85 लाख रुपये तय की गई है। दोनों स्कीमों के लिए क्रमश: 10 और 20 हजार रुपये पंजीकरण राशि जमा कराई जा रही है। यहां तक तो सब ठीक है, मगर इसके आगे की नियम और शर्तें खासी विसंगतिपूर्ण हैं।
36 महीने में जमा करें 3.25 लाख रुपये
ईडब्ल्यूएस के आवंटियों के लिए नियम है कि वे 36 महीने में ये सारे रुपए जमा कर दें। मगर आय सीमा है, छह हजार रुपये महीना।
इसका अर्थ है कि जो छह हजार रुपये महीना कमाता है उसे 9025 रुपये की किश्त जमा करनी होगी। इसी तरह एलआईजी में आय सीमा है, 12 हजार रुपये महीना लेकिन 5.85 लाख रुपये वाले फ्लैट के लिए हर महीने 16250 रुपए जमा करने होंगे।
अगर होम लोन की बात की जाए तो कोई बैंक छह हजार रुपये वेतन वाले व्यक्ति को तीन लाख रुपये और 12000 वेतन वाले को 5 लाख रुपए लोन देने को राजी नहीं होगा।
अगर राजी भी हो गया तो किस्त क्रमश: तीन हजार रुपये और पांच हजार रुपये होगी। ऐसे में इतने कम वेतन वाला व्यक्ति अपने परिवार का भरण पोषण कैसे करेगा, इस सवाल का जवाब कंपनी के पास नहीं है।
शासन की नीति के हिसाब से इस तरह के भवनों के लिए एजेंसी को 15 साल की किस्तें बना कर कीमत वसूल करनी चाहिए। मगर यहां ऐसा नहीं हो रहा है।
भवनों की उपलब्धता तक ही पंजीकरण
यहां एक और नियम शासनादेश के विपरीत बना दिया गया है। जिसमें भवनों की उपलब्धता तक ही पंजीकरण खोलने की बात कही गई है। वैसे इसकी समय 31 अगस्त से 15 अक्तूबर रखी गई है।
इस बीच में अगर 4468 पंजीकरण हो जाते हैं, तो उसके आगे पंजीकरण नहीं किए जाएंगे। यह प्रथम आगत, प्रथम स्वागत की नीति के आधार पर होना है।
जबकि, सभी तरह के आवंटनों को लॉटरी के जरिए करने का नियम है। सभी आवेदन निर्धारित समय के भीतर स्वीकार किए जाना जरूरी है। मगर यहां जो लॉटरी होनी है, वह केवल फ्लोर के लिए होगी।
मुख्यमंत्री सात को देंगे पुराने भवनों की चाभी
इस स्कीम में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सात सितंबर को पुराने बने गरीब आवासों की चाभी आवंटियों को सौंपेंगे। करीब 100 पूर्व में बने भवन आवंटियों को सौंपे जाएंगे। जबकि, नए प्रस्तावित भवनों का शिलान्यास कार्यक्रम भी हाइटेक टाउनशिप में किया जाएगा।
36 महीने की किस्त सचमुच बहुत अधिक है। मैंने अभी कुछ समय पहले ही कंपनी ज्वाइन की है। ऐसे में ऐसा कैसे हुआ नहीं बता सकता मगर, इसे बदलवाया जाएगा। प्रथम आगत और प्रथम स्वागत से भी पंजीकरण का नियम भी ठीक नहीं है सभी विसंगतियां जल्द दूर की जाएंगी।
बीबी सिंह, सेवानिवृत्त आईएएस और डायरेक्टर ऑपरेशन, एपीआई अंसल
यह शासनादेश का उल्लंघन है। प्रथम आगत और प्रथम स्वागत जैसी नीति आवंटन के लिए नहीं अपनाई जा सकती है। कंपनी को विसंगतियां दूर करने का निर्देश दिया जा रहा है। लाटरी प्राधिकरण अपने तरीके से कराएगा। जिसमें सभी को पंजीकरण कराने का हक होगा।
अष्टभुजा प्रसाद तिवारी, उपाध्यक्ष, लविप्रा