10 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों को 'अपना' बनाएगी सरकार
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प्रदेश के 10 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों को अब अपनी छत मिल सकेगी। अभी तक
केंद्र सरकार ने इसकी मंजूरी दे दी है। साथ ही इसी वित्तीय वर्ष में पांच हजार केंद्र बनाने के लिए पैसा भी दे दिया है।
प्रदेश
में अभी भी कई आंगनबाड़ी केंद्र ऐसे हैं जो पेड़ों के नीचे या फिर
प्राइमरी स्कूलों के बरामदों में चलाए जा रहे हैं। बारिश के समय ये केंद्र
ठीक से नहीं चल पाते हैं।
पोषाहार व अन्य जरूरी सामान भी इधर-उधर रखे जाते
हैं। इससे पोषाहार की भी बर्बादी होती है। इस समस्या को देखते हुए प्रदेश
सरकार ने केंद्र सरकार से बिना भवन वाले आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए भवन
निर्माण की मांग की थी।
केंद्र सरकार ने अब इसे अपनी मंजूरी प्रदान कर दी
है। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के 10 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों को अपना
भवन मिल जाएगा। इसी वित्तीय वर्ष पांच हजार केंद्र बनाने का पैसा भी भेज
दिया है।
समग्र ग्राम विकास योजना में भी बनेंगे 2357 आंगनबाड़ी केंद्र
डॉ.
राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना के तहत भी 2357 आंगनबाड़ी
केंद्र बनाए जाने हैं। वर्ष 2012-13 में भी 1364 आंगनबाड़ी केंद्र बनाने का
लक्ष्य रखा गया था।
लेकिन इनमें से 578 का ही पैसा समाज कल्याण निर्माण
निगम को दिया गया। 786 आंगनबाड़ी केंद्र बनने बाकी रह गए हैं। जबकि वर्ष
2013-14 में 1571 और आंगनबाड़ी केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा गया। ऐसे में
समग्र ग्राम में 2357 आंगनबाड़ी केंद्र बनाए जाने हैं। इन सभी का पैसा पहले
ही रिलीज हो चुका है।
साढ़े पांच लाख रुपये है एक आंगनबाड़ी का बजट
प्रदेश
में एक आंगनबाड़ी केंद्र बनाने के लिए साढ़े पांच लाख रुपये का बजट तय है।
इससे एक बड़ा कमरा, एक किचन, स्टोर, शौचालय व बरामदा बनाया जाता है।
जबकि
केंद्र सरकार एक केंद्र बनवाने में साढ़े चार लाख रुपये का खर्च ही मानती
है। इसी के अनुसार 75 प्रतिशत पैसा यानी 3.37 लाख रुपये प्रति आंगनबाड़ी के
हिसाब से प्रदेश को देती है।
इसके बाद बची हुई रकम प्रदेश सरकार को लगानी
होती है। आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण समय पर न होने की एक बड़ी वजह यह
भी है कि प्रदेश सरकार को 2.13 लाख रुपये प्रति आंगनबाड़ी पैसा लगाना पड़ता
है।