आजमगढ़: पीएम मोदी ने विपक्ष की दुखती रग पर रखा हाथ, विकास का एजेंडा सेट करने की कोशिश
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पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास करने आजमगढ़ पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव का एजेंडा सेट कर दिया। उन्होंने मुद्दों को धार दी और सरोकारों का सहारा लेकर विरोधियों पर प्रहार किया। उन्होंने साफ कर दिया कि 2019 का चुनावी समर 2014 से बहुत अलग नहीं होगा।
चार साल से अधिक सरकार चलाने के बाद भी न तो वह समझौतावादी हुए हैं और न ही तुष्टीकरण को तैयार हैं। संवेदनशील मुद्दों पर उनका नजरिया 2014 जैसा ही है। फर्क बस इतना है कि तब वह इन मुद्दों पर काम करने के लिए समर्थन मांगने आए थे।
इस बार वह काम का हिसाब देने और यह जानकारी देने आए हैं कि कहां किसके कारण कौन-सी कठिनाई हो रही है। इसलिए उन सरोकारों से जुड़े लोग ही फैसला करें कि कठिनाई खड़ी करने वालों के साथ वे क्या सलूक करेंगे।
कभी दिल्ली के बाटला हाउस कांड को लेकर भाजपा बनाम दूसरे दलों के बीच सियासी आरोप-प्रत्यारोप के केंद्र में आए आजमगढ़ से उन्होंने संकेतों के साथ लोगों की दुखती रग पर हाथ रखते हुए तीन तलाक सहित अन्य मुद्दों के सहारे मुस्लिम सियासत करने वालों के समीकरणों को भी तितर-बितर करने की कोशिश की।
आजमगढ़ छोड़कर सभी सीटें मिली थीं भाजपा व अपना दल को
2014 में आजमगढ़ छोड़कर पूर्वांचल की लोकसभा की सभी सीटें भाजपा और सहयोगी अपना दल की झोली में आई थीं। इसके पीछे कहीं न कहीं आजमगढ़ की मुस्लिम और यादव आबादी के समीकरण भी थे।
उसी आजमगढ़ में लखनऊ और गाजीपुर के बीच बनने वाले पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के शिलान्यास से विकास का एजेंडा सेट करने आए मोदी ने मुस्लिम सियासत को लेकर संवेदनशील इस धरती पर मुस्लिम महिलाओं के तीन तलाक का सवाल उठाकर सपा, बसपा और कांग्रेस को कठघरे में यूं ही नहीं खड़ा किया।
बाटला हाउस कांड के बाद आजमगढ़ का संजरपुर काफी चर्चित रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित भाजपा के तमाम नेताओं ने संजरपुर के नाते आजमगढ़ को आंतकियों की नर्सरी तक कहा था।
उसी धरती पर मोदी ने यह कहकर कि भाजपा करोड़ों मुस्लिम महिलाओं की तीन तलाक बंद करने की मांग पर आगे बढ़ रही है लेकिन सपा, बसपा और कांग्रेस सहित अन्य विरोधी दल रुकावट डाल रहे हैं, मुस्लिम वोटों में सेंध लगाने की कोशिश के साथ भाजपा विरोधी दलों के वोट छितराने की चाल भी चल दी।
मुसलमानों पर कही बात का असर तेजी से और दूर तक
मोदी को मालूम है कि आजमगढ़ में मुसलमानों पर कही बात का असर तेजी से और दूर तक होता है। चुनाव लोकसभा का है, इसलिए अलग-अलग राज्यों में किसी से मुकाबला हो लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर आमना-सामना कांग्रेस से ही होना है।
शायद इसीलिए उन्होंने तीन तलाक पर कांग्रेस सहित सपा और बसपा को घेरते हुए पूछा कि क्या वे मुस्लिम बहन व बेटियों का जीवन नरक बनाए रखना चाहते हैं? मोदी यही नहीं रुके और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान ‘देश के संसाधनों पर पहला हक मुसलमानों का’ और राहुल की एक बैठक के हवाले से छपी खबरों ‘कांग्रेस मुस्लिमों की पार्टी है’ पर भी कांग्रेस को घेरा।
पूछा कि क्या मुस्लिम महिलाओं का कोई हक नहीं है। उन्होंने योगी की पीठ थपथपाई तो यह कहते हुए बड़े-बड़े अपराधियों की आज क्या हालत है, कानून-व्यवस्था को लेकर उठने वाले सवालों पर विराम लगाने की कोशिश की।
सभी सरोकारों पर नजर रखकर सपा-बसपा पर इस तरह हमला
मोदी ने यह कहते हुए कि बाबा साहब और राम मनोहर लोहिया पर सिर्फ राजनीति की जा रही है, लोगों को यह समझाने की कोशिश की कि भाजपा विरोधी दलों के लिए महापुरुषों से भी सरोकार सिर्फ सियासी समीकरण दुरुस्त करने तक है। इसके विपरीत भाजपा इनके सम्मान और सिद्धांतों पर काम करने वाली पार्टी है।
उन्होंने अपने और योगी का परिवार पूरा देश बताते हुए परिवारवाद पर हमला किया। यह बताने की कोशिश की कि भाजपा को सत्ता मिलेगी तो देश के आम आदमी के विकास की बात होगी। विरोधियों को मिलेगी तो बात सिर्फ उनके परिवार तक सिमटकर रह जाएगी।
पूर्वांचल से ही की थी उज्ज्वला योजना की शुरुआत
गरीब महिलाओं के लिए उज्ज्वला योजना की शुरुआत मोदी ने पूर्वांचल से ही की थी, शायद इसीलिए उन्होंने आजमगढ़ में गरीबों और दलितों के अन्य सरोकारों के साथ खड़े होने का संदेश देते हुए यह बताने का प्रयास किया कि केंद्र में भाजपा सरकार आने पर पूर्वांचल की बदहाली की तस्वीर बदलने की हुई शुरुआत ने प्रदेश में योगी सरकार आने से तेजी पकड़ी है।
ऐसे में किन्हीं कारणों से यदि 2019 में स्थिति बदली तो बदहाली की तस्वीर बदलनी फिर मुश्किल हो जाएगी। शायद इसी वजह से मोदी ने आजमगढ़ में विकास के कामों को विस्तार से बताया भी।