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मुलायम के नाम एक आम आदमी का खुला खत

Sat, 12 Apr 2014 07:01 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 12 Apr 2014 07:01 PM IST
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an open letter to mulayam singh yadav

मुलायम सिंह जी,

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कल रात भी और रात की तरह आप चैन से सोये होंगे, पर मैं नहीं सो पाया।

जानते हैं क्यूँ? मुझे डर लग रहा था। यूँ तो ऐसे भी मैं काफी डरपोक आदमी हूँ पर कल रात ज्यादा डर लग रहा था।

जानते हैं क्यूँ? मेरे जीवन में बहुत कम लोग हैं। जो हैं भी, उनमें महिलायें ज्यादा हैं। चाहे मेरी माता जी हों पत्नी हो या मेरी मित्र जो मेरा संबल हैं।

मुझे उनसे हौसला और ताकत मिलती है। मुझे नहीं पता आपके जीवन में महिलाओं की क्या भूमिका है। सच बताऊँ, मेरे जैसा डरपोक आदमी भी इनके साथ सुरक्षित महसूस करता है।

मेरी माँ अक्सर तुलसीदास की एक चौपाई दोहराती हैं, "जाकी रही भावना जैसी हरी मूरत देखी तिन तैसी"। आप पढ़े लिखे नेता हैं, इसका मतलब तो समझते होंगें। जो आपने कहा वो यूँ ही तो नहीं कहा होगा।
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वैसे मेरी पत्नी कहती हैं इस देश में बहुत कुछ सिखाया जाता है पर लड़कियों, औरतों के साथ कैसा व्यवहार किया जाए ये नहीं सिखाया जाता।

आपकी माता जी तो अब इस दुनिया में नहीं हैं, नहीं तो उनसे जरुर पूछता आपने अपने बेटे को बहुत कुछ सिखाया लेकिन महिलायें कितनी पूजनीय है, ये बात क्यूँ सिखाना भूल गयीं।
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मुझे पता है आपके पास एक डरपोक आदमी की चिठ्ठी पढ़ने का वक्त नहीं है। वैसे भी आप पहलवान रहे हैं, कुश्ती के दांव पेंच लड़ते-लड़ाते आपका मुलायम मन स्त्रियों के प्रति काफी कठोर हो गया है।

मेरी महिला मित्र कहती हैं कि पुरुषों की कमजोरी ये होती है कि वो कुछ छुपा नहीं पाते, आप भी कुछ छुपा नहीं पाए। मैं अपने बेटे को और कुछ तो नहीं सिखा पा रहा है पर एक बात जरूर कहता हूँ।

लड़कियों औरतों की इज्ज़त करना सीखो, क्यूंकि ये ही हमें इंसान बनाती हैं। मेरी बात से आपको बुरा नहीं लगेगा क्यूंकि आपको लगता है कि आप सही हैं पर विश्वास रखिये गलतफहमी का कोई ईलाज नहीं है।


मैंने कहीं पढ़ा था जब आदमी की उम्र बढ़ती है तो उसे बीती बातें बहुत याद आती हैं.हो सकता हो ऐसा ही कुछ आपके साथ हुआ हो।

एक बात बताऊँ...मुझे डर बहुत लगता है पर आपको चिठ्ठी लिखते वक्त मुझे बिलकुल डर नहीं लग रहा क्यूंकि मेरी माँ, मेरी पत्नी और मेरी मित्र ये मानती हैं कि मैं सही बात कह रहा हूँ। मैंने सुना है आपका भी भरा पूरा परिवार है जरा घर की महिलाओं से बात करके अगर आप मेरे पत्र का जवाब देंगे तो शायद मैं भी रात को आपकी तरह चैन से सो पाऊंगा।

आपका,
एक डरा हुआ इंसान

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