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नौवीं मंजिल से कूदने से रोका तो पांचवी से कूदकर की आत्महत्या

Thu, 05 May 2016 12:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 05 May 2016 12:45 PM IST
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An employee commits suicide in Jawahar Bhawan in Lucknow.
- फोटो : amar ujala

ग्राम विकास विभाग के वरिष्ठ लिपिक-प्रधान सहायक हरिश्चंद्र यादव (59) ने बुधवार दोपहर जवाहर भवन की पांचवीं मंजिल से छलांग लगा दी। फर्श पर गिरने के बाद काफी देर तक वह तड़पते रहे।

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पुलिस और एसोसिएशन के पदाधिकारियों के पहुंचने के बाद उन्हें सिविल अस्पताल जे जाया गया, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। हरिश्चंद्र जुलाई में रिटायर हो जाते, उनका दो दिन बाद ही प्रमोशन होना था।
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हरिश्चंद्र यादव पांचवीं मंजिल से छलांग लगाकर खुदकुशी करने से पहले नौवीं मंजिल से भी कूदने की कोशिश की थी। तब कर्मचारियों ने उन्हें पकड़ लिया था।

इंस्पेक्टर हजरतगंज विजयमल यादव ने बताया कि हरिश्चंद्र मूलरूप से उन्नाव के नवाबगंज के रहने वाले थे और रोज वहीं से ऑफिस आते-जाते थे। वह जवाहर भवन में ग्राम विकास विभाग के पांचवें तल पर स्थित ऑफिस में बैठते थे।

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पुलिस को नहीं मिला कोई सुसाइट नोट

An employee commits suicide in Jawahar Bhawan in Lucknow.

बुधवार दोपहर करीब 12 बजे ऑफिस की खिड़की से वे कूद गए। पुलिस को कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। वहीं, ग्राम विकास मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह का आरोप है कि हरिश्चंद्र को 20 दिनों से अपर आयुक्त प्रशासन हेमंत कुमार प्रताड़ित कर रहे थे।

कोर्ट की अवमानना के एक मामले में जेल भेजने की धमकी दे रहे थे। बुधवार सुबह भी उन्होंने हरिश्चंद्र को धमकाया जिसके बाद उन्होंने खुदकुशी की।

आरोप बेबुनियाद
वहीं, इस पर जवाब देते हुए अपर आयुक्त प्रशासन हेमंत कुमार का कहना है कि घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। मुझे भी काफी दुख है। मैं शासन में एक बैठक में था तभी घटना की सूचना मिली। हरिश्चंद्र की गिनती कर्मठ कर्मचारियों में होती थी। उसके खिलाफ न तो कोई कार्रवाई लंबित थी और न ही उसे कभी कोई नोटिस दिया गया था। ऐसे में उत्पीड़न का कोई सवाल ही नहीं। आरोप पूरी तरह निराधार हैं।

...तब कर्मचारियों ने उन्हें पकड़ लिया था

An employee commits suicide in Jawahar Bhawan in Lucknow.

हरिश्चंद्र यादव पांचवीं मंजिल से छलांग लगाकर खुदकुशी करने से पहले नौवीं मंजिल से भी कूदने की कोशिश की थी। तब कर्मचारियों ने उन्हें पकड़ लिया था।

ग्राम विकास मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह ने बताया कि जवाहर भवन में ग्राम विकास विभाग के ऑफिस पांचवें, आठवें, नौवें और दसवें फ्लोर पर हैं। हरिश्चंद्र जिला ग्राम विकास अभिकरण में तैनात थे। पहले वह नौवें फ्लोर पर बैठते थे।

पांच दिन पहले ही उनका ऑफिस पांचवीं मंजिल में शिफ्ट हुआ था। दसवें फ्लोर पर अधिकारी बैठते हैं। हरिश्चंद्र दसवें फ्लोर पर गए जहां अपर आयुक्त प्रशासन ने उन्हें धमकाया।

इसके बाद वह नौवीं मंजिल पर आए और वहां से नीचे कूदने की कोशिश की थी। साथी कर्मचारियों ने उन्हें संभाला। उनके सामान्य होने के बाद पांचवें फ्लोर पर भेज दिया। यहां पहुंचते ही हरिश्चंद्र ने खिड़की से छलांग लगा दी।

प्रमोशन की फाइल दबाए बैठे थे अधिकारी

An employee commits suicide in Jawahar Bhawan in Lucknow.

हरिश्चंद्र विभाग के कर्मचारियों के जिला स्तरीय प्रमोशन पर दाखिल पिटीशन को लेकर परेशान थे। विभागीय सूत्रों ने बताया कि कोर्ट में पिटीशन का जवाब दाखिल करना था लेकिन अपर आयुक्त प्रशासन फाइल दबाए बैठे थे।

बुधवार को भी हरिश्चंद्र ने अपर आयुक्त प्रशासन के ऑफिस जाकर उनसे फाइल आगे बढ़ाने की गुजारिश की। हरिश्चंद्र ने कहा कि कोर्ट की अवमानना में कार्रवाई हो सकती है इसलिए फाइल आगे बढ़ा दें। इससे अपर आयुक्त प्रशासन भड़क गए और फाइल फेंक दी। उनके रवैऐ से दुखी होकर ही हरिश्चंद्र ने मौत को गले लगा लिया।

अफसर लगातार दे रहे थे धमकी

An employee commits suicide in Jawahar Bhawan in Lucknow.

एशोसिएशन के उपाध्यक्ष संजीव शर्मा का कहना है कि हरिश्चंद्र को  प्रशासनिक अधिकारी के पद पर प्रोन्नत करने की प्रक्रिया पूरी हो गई थी।

जुलाई में उनका रिटायरमेंट होना था। अपर आयुक्त प्रशासन रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली ग्रेच्युटी, भविष्य निधि सहित अन्य भुगतान रुकवाने की धमकी दे रहे थे।

परिवार में कोहराम
पत्नी जीवंती देवी, बेटा संदीप और ऋषि तथा बेटी नीरू सिविल अस्पताल पहुंच गए। संदीप ने बताया कि छह बेटियों में केतकी, गुड़िया, बल्लो, मनीषा व एक अन्य की शादी हो चुकी है। सिर्फ नीरू का ब्याह होना बाकी है।

परिवारीजनों ने कहा कि बेटियों की शादी के बाद बेटों को दूल्हा बनना था लेकिन इससे पहले ही हरिश्चंद्र दुनिया छोड़ गए।

सिविल अस्पताल में कर्मचारियों ने किया हंगामा

An employee commits suicide in Jawahar Bhawan in Lucknow.

हरिश्चंद्र के जवाहर भवन से कूदकर करने की खबर मिलते ही ग्राम विकास विभाग के कर्मचारियों में आक्रोश फैल गया। सभी सिविल अस्पताल पहुंच गए और यहां अपर आयुक्त प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए हंगामा करने लगे।

कर्मचारियों का कहना था कि अपर आयुक्त प्रशासन सारी फाइलें दबाकर बैठे रहते हैं जिसके चलते विभाग की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है। पुलिस मौके पर पहुंची और कार्रवाई का आश्वासन देकर शांत कराया।

20 मिनट तक लावारिसों की तरह पड़ा रहा शव
हरिश्चंद्र करीब 20 मिनट तक लावारिस जमीन पर पड़े रहे। पांचवीं मंजिल पर स्थित ग्राम विकास विभाग के लोगों को भी शायद उनके आत्महत्या करने का पता नहीं पाया था इसलिए वहां के किसी कर्मचारी की प्रतिक्रिया नहीं आई।

जब पूरे जवाहर भवन और इंदिरा भवन में किसी के छलांग लगाकर खुदकुशी करने की खबर फैली, तब लोगों का हरिश्चंद्र की तरफ ध्यान गया। हजरतगंज पुलिस ने जेब से आईकार्ड निकाला तब पहचान हुई।

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