24 को लखनऊ आ सकते हैं अमित शाह, मंत्रिमंडल की सुगबुगाहट फिर तेज
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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह 24 को लखनऊ में मिशन 2019 पर अब तक हुए कामों की समीक्षा के साथ आगे की तैयारियों का खाका भी खींचेंगे। वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ प्रस्तावित समन्वय बैठक में भी हिस्सा लेंगे।
शाह के दौरे की खबर के साथ एक बार फिर प्रदेश मंत्रिमंडल के पुनर्गठन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। मंत्रिमंडल में जगह पाने के लिए दावेदारों ने दौड़भाग फिर शुरू कर दी है तो छुट्टी की आशंका से परेशान कई मंत्रियों ने अपनी-अपनी कुर्सी बचाने के लिए गोटें बिछाना शूरू कर दिया है।
वैसे शाह का दौरान अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं है। पर, पार्टी सूत्रों ने उनके 24 को लखनऊ में रहने की पुष्टि की है। उस दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भी प्रमुख पदाधिकारी लखनऊ में रहेंगे। शाह के साथ भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री भूपेन्द्र यादव भी आएंगे।
भाजपा अध्यक्ष मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, डॉ. दिनेश शर्मा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्रनाथ पांडेय और प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल सहित संघ के प्रतिनिधियों के साथ सभी मुद्दों पर बातचीत करेंगे।
वह सितंबर से अक्टूबर के बीच चली संगठनात्मक गतिविधियों, केंद्र सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों से संपर्क, युवा मोर्चा, महिला मोर्चा सहित अग्रिम संगठनों की गतिविधियों के कामकाज की समीक्षा करेंगे।
दलितों का बढ़ेगा प्रतिनिधित्व
चर्चा है कि मंत्रिमंडल में दलित चेहरों की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है। प्रदेश के 47 सदस्यीय मंत्रिमंडल में अभी दलित वर्ग के पांच सदस्य ही हैं। माना जाता है कि दलितों की लामबंदी पर काम कर रही सरकार इनकी भागीदारी पांच से बढ़ाकर 8-9 कर सकती है। इनमें विद्यासागर सोनकर का नाम प्रमुखता से चर्चा में है। इसके अलावा आगरा के डॉ. जी.एस. धर्मेश, दीनानाथ भाष्कर का नाम भी चर्चा में है।
इनके नाम की भी चर्चा
एस.सी.-एस.टी. एक्ट और प्रमोशन में आरक्षण जैसे मुद्दों पर सार्वजनिक हुए विरोधी सुरों को देखते हुए अगड़े और पिछड़े लोगों को भी भागीदारी मिलना निश्चित है। अभी हाल में ही भाजपा के सामाजिक सम्मेलनों में गुर्जर समाज को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व देने की मांग उठी थी। माना जा रहा है कि पार्टी गुर्जर बिरादरी के विधान परिषद सदस्य अशोक कटारिया या विधायक तेजपाल सिंह नागर को मंत्रिमंडल में जगह दे सकती है।
इसके अलावा विजय बहादुर पाठक और यशवंत सिंह तथा अपना दल के अध्यक्ष आशीष पटेल, भाजपा की सरकारों में पहले मंत्री रह चुके वीरेन्द्र सिरोही को भी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।पार्टी विधायक राधामोहन दास, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।
अयोध्या सहित इनको मिल सकती है भागीदारी
प्रदेश के 47 सदस्यीय मंत्रिमंडल में 75 में अभी 44 जिलों का प्रतिनिधित्व ही नहीं है जबकि लखनऊ से सबसे ज्यादा 7 मंत्री हैं। अयोध्या भाजपा के एजेंडे का प्रमुख मुद्दा है लेकिन मंत्रिमंडल में वहीं का ही नहीं बल्कि पूरे फैजाबाद मंडल के किसी जिले का प्रतिनिधित्व ही नहीं है। लोकसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर फेरबदल में अयोध्या को भागीदारी मिल सकती है।