यूपी भाजपा को चुनावी मोड में डाल गए अमित शाह, 2019 चुनाव की रणनीति के लिए दिए संकेत
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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का अमेठी दौरा जहां विकास कार्यों की शुरुआत है वहीं सीतापुर में उनका आगमन पार्टी के जिला कार्यालयों के भवनों के निर्माण की सांकेतिक शुरुआत के लिए था। पर, इस बहाने वह प्रदेश भाजपा और कार्यकर्ताओं को चुनावी मोड में डाल गए।
प्रदेश में भाजपा का वनवास खत्म होने तथा योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद शाह का उप्र का यह तीसरा दौरा था। पहले व दूसरे दौरे में उन्होंने सत्ता-संगठन में समन्वय व संवाद, सोशल इंजीनियरिंग के जरिये भविष्य में वोटों का गणित दुरुस्त करने पर ध्यान दिया था। लेकिन यह दौरा आम लोगों से संवाद पर फोकस रहा। दोनों ही कार्यक्रमों में शाह ने भाजपाइयों के सामने वे सूत्र भी रखने की कोशिश की जिनके जरिये भविष्य में उन्हें लोगों के बीच जाना है।
शाह ने जिस तरह राहुल गांधी को घेरा, अमेठी की बदहाली के बहाने नेहरू-इंदिरा परिवार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की। उससे यह साफ हो गया कि अमेठी तो बस प्रतीक भर है। कहीं न कहीं भाजपा ने 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
इसमें सबसे प्रमुख विरोधियों पर आक्रामक शैली में हमला बोलकर लोगों के बीच कठघरे में खड़ा करना है। भले ही कांग्रेस के हाथ से एक के बाद एक राज्य निकल रहे हों लेकिन भाजपा के रणनीतिकार निश्चिंत होकर नहीं बैठने वाले। उनकी कोशिश कांग्रेस को कठघरे में खड़ा करने के साथ सोनिया व राहुल गांधी से अपराजेय छवि छीन लेने की है ताकि भाजपा को देश के सामने यह कहने का आधार मिल जाए कि जिन्हें उनके घर के लोग स्वीकार नहीं करते उन्हें और उनके नेतृत्व वाली कांग्रेस को तवज्जो देने का कोई फायदा नहीं है।
तीन पीढ़ी राज किया, अब मांग रहे हिसाब
शाह ने अमेठी व सीतापुर में यह साफ कर दिया कि नेहरू-इंदिरा खानदान द्वारा अमेठी व रायबरेली की उपेक्षा इस बार सिर्फ यूपी में ही एजेंडा नहीं बनेगी बल्कि पूरे देश में कांग्रेस को घेरेगी। कांग्रेस का साथ देने वालों को भी कठघरे में खड़ा करने की कोशिश करेगी।
तभी तो शाह ने यह कहते हुए लोगों की दुखती रग पर हाथ रखने की कोशिश की कि ‘तीन पीढ़ियों तक राज करने वाले भाजपा से तीन वर्ष के काम का हिसाब मांग रहे हैं।’ जिस परिवार पर अमेठी के लोगों ने सालों-साल भरोसा किया। अपना सांसद चुना, वह आज अपने क्षेत्र के पिछड़ेपन के लिए भाजपा से कैसे सवाल पूछ सकता है।
राहुल और कांग्रेस अब तक क्या करते रहे? शाह ने कटाक्ष भी किया, ‘शहजादे को इटली की तो याद आती है पर अमेठी की नहीं।’ वह यही नहीं रुके। अमेठी के बहाने लोगों के दिमाग में यह भरने की कोशिश की कि कांग्रेस की रीति ही यही है, वोट लो और भूल जाओ। ऐसा कहीं नहीं देखा कि जीता हुआ जनप्रतिनिधि कभी न आए और हारा हुआ लोगों को गले लगाए।
उलाहना के बहाने भी हमलों को धार
शाह ने उलाहना के बहाने भी राहुल व कांग्रेस पर हमलों को धार दी। स्मृति ईरानी का नाम लेते हुए लोगों से कहा, आपने स्मृति को एक लाख वोट से हरा दिया बावजूद इसके ईरानी अमेठी तथा यहां के लोगों के लिए लगी रहीं। इस क्षेत्र की समस्याओं का समाधान कराने की कोशिश की।
इस बहाने शाह ने न सिर्फ अमेठी बल्कि देश को यह बताने की कोशिश की कि भाजपा उनमें नहीं है कि जो चुनाव बाद लोगों को भूल जाए। जनता को भरोसा रहे इसीलिए कई बार जहां चुनाव में किए वादों को पूरा करने के लिए मोदी व योगी सरकार के कदमों का हवाला दिया, वहीं यह कहते हुए कि 2019 में भाजपा यह नहीं कहेगी कि वह जीती तो यह काम करेगी बल्कि यह बताने आएगी कि उसने यह काम किए हैं, इसलिए लोगों का आशीर्वाद भाजपा को मिलना चाहिए।
कुल मिलाकर शाह ने यह साफ कर दिया कि भले ही कांग्रेस आज कमजोर दिख रही हो लेकिन लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा के लोगों को उसकी अनदेखी नहीं करनी है।