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अमेठी: नमो का खौफ, हैट्रिक मार पाएंगे युवराज?

Sat, 03 May 2014 09:45 AM IST
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला,लखनऊ
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला,लखनऊ Updated Sat, 03 May 2014 09:45 AM IST
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गांधी-नेहरू परिवार के गढ़ में जीत की हैट्रिक के लिए उतरे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की अमेठी में राह इस बार आसान नहीं है।

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इसीलिए भाई के दुर्ग को अभेद्य बनाए रखने को चुनावी रणभूमि में कमान बहन प्रियंका ने संभाल रखी है। संभवत: उन्हें भी राहुल का लोकल कनेक्ट कमजोर होने, विकास योजनाओं के परवान न चढ़ने और जनसुविधाओं के अभाव का अहसास है।
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इसलिए प्रियंका किसी भी स्तर पर चूक नहीं होने देना चाहती हैं। भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी 5 मई को यहां सभा करेंगे। इससे नए समीकरण उभ्ार सकते हैं।
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बदला है अमेठी का ‌मिजाज

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अमेठी लोकसभा सीट 1998-99 के 13 महीने के अल्प कार्यकाल को छोड़कर 1980 से गांधी-नेहरू परिवार या उनके नजदीकियों के पास रही है।

अमेठी ने 1980 में संजय गांधी तो 1981, 1984, 1989 और 1991 में राजीव गांधी को सिर-आंखों पर बैठाया। दो बार कैप्टन सतीश शर्मा और एक बार सोनिया गांधी यहां से सांसद चुनी गईं।

वर्ष 2004 और 2009 में राहुल यहीं से संसद पहुंचे। लेकिन, देश के सबसे प्रतिष्ठित सियासी परिवार के नाम रिकॉर्ड वोटों से जीत दर्ज करा रहे अमेठी का मिजाज इस बार थोड़ा बदला हुआ है।

क्षेत्र के कई इलाकों के भ्रमण के दौरान राहुल की हार का दावा करने वाले तो बहुत कम मिले, लेकिन अधिकतर लोग यह जरूर मान रहे हैं कि उनकी जीत का अंतर काफी कम हो सकता है।

आज नहीं तो कल पीएम बनेंगे राहुल

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लखनऊ-सुल्तानपुर मार्ग पर जगदीशपुर से आठ किमी पहले बीएचईएल की यूनिट हैं।

बीएचईएल के सामने यादव जलपान गृह पर बैठे जगदीशपुर से आए एलआईसी एजेंट आदित्य श्रीवास्तव कहते हैं, राहुल बड़े मार्जिन से जीतेंगे, नंबर दो पर भाजपा रहेगी।

लोग समझते हैं कि आज नहीं तो कल, राहुल गांधी प्रधानमंत्री जरूर बनेंगे। वहीं, धर्मचंद गुप्ता कहते हैं, विश्वास और स्मृति चुनाव बाद दिखाई नहीं देंगे।

हालांकि जलपान गृह के संचालक राम नरेश यादव इनसे इत्तेफाक नहीं रखते। कहते हैं, इस बार मुकाबला कड़ा है। उनके बराबर में पान विक्रेता सगीर अहमद कहते हैं, जीत का अंतर घट सकता है लेकिन फिर भी लाखों में ही रहेगा।

मिल सकती है कांटे की टक्कर

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चुनावी चर्चा जामों में राजकुमार राजू के टी स्टॉल में भी चल रही है।

खुद को भाजपा समर्थक बताने वाले अंबिका प्रसाद श्रीवास्तव कहते हैं, पलड़ा तो राहुल का भारी है लेकिन दो-चार दिनों में टक्कर कांटे की भी हो सकती है।

मोदी लहर का असर है। कांग्रेस समर्थक विजय बहादुर सिंह कहते हैं, लोगों में राहुल से नाराजगी नहीं है, पार्टी में दलाल संस्कृति पनपने से ग्राफ गिरा है। जीतेंगे तो राहुल ही लेकिन अंतर कम हो जाएगी।

नमो-नमो करते युवा

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जामों से गौरीगंज रोड पर पूरब गांव में संतोष सिंह के मेडिकल स्टोर पर खड़े इंदिरा गांधी पीजी कॉलेज में बीए फाइनल के स्टूडेंट अंगदराज कहते हैं, यहां 80 फीसदी नौजवान मोदी के साथ है।

लोकसभा चुनाव में पहली बार मतदान को लेकर रोमांचित इंटर का एग्जाम देने वाले आशीष कुमार पांडेय और विवेक विक्रम सिंह कहते हैं, स्मृति ईरानी अच्छा चुनाव लड़ रही हैं।

हमारा सपोर्ट उन्हीं को है। इसी गांव के लालबिहारी पांडेय कहते हैं, इस बार राहुल लाखों में नहीं हजारों में जीतेंगे। मे‌डिकल स्टोर चलाने वाले संतोष कहते हैं, मोदी की एक सभा हो जाए तो राहुल हार भी सकते हैं।

उलझने लगे कांग्रेस-भाजपा समर्थक

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गौरीगंज से अमेठी रोड पर बारामासी गांव में ओमप्रकाश पांडे की दुकान पर गरमा-गरम सियासी चर्चा चल रही है।

योगेन्द्र कुमार शुक्ला कहते हैं कि राहुल को कोई हरा नहीं सकता, जवाब में अशोक मिश्रा कहते हैं, मोदी का एक कार्यक्रम लग जाए तो पता चल जाएगा।

ओमप्रकाश कहते हैं, यहां से मोदी खुद चुनाव लड़ लें तो वे भी जीत नहीं पाएंगे। नजदीकी गांव पांडेपुर जंगल रामनगर के उमाशंकर पांडेय कहते हैं, लड़ाई कांग्रेस-भाजपा के बीच है।

विकास की अनदेखी के कारण लोग राहुल को पसंद नहीं कर रहे हैं। वोटों का ध्रुवीकरण हो रहा है। मोदी लहर का असर साफ दिख रहा है।

पहचान के लिए लड़ रहे स्मृति-विश्वास

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अमेठी में सगरा तिराहे पर रेडीमेड गारमेंट्स का स्टोर चलाने वाले रिजवान खान बेबाकी से कहते हैं, राहुल की जीत का अंतर कम नहीं होगा, बढ़ेगा।

सूरज अग्रहरि और चंडेरिया गांव मो. तुफैल खान उनकी बात का समर्थन करते हैं। कहते हैं, स्मृति और विश्वास अपनी पहचान बनाने के लिए लड़ रहे हैं।

मुंशीगंज रोड पर इलेक्ट्रिक शॉप चलाने वाले बाल्दा गांव के देवराज मौर्य, निजी कंपनी में इंजीनियर अजय मौर्य कहते हैं, यहां न कांग्रेस पहले कमजोर थी और न अब कमजोर है।

बिटवा, बिटिया के नाम पर वोट

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अमेठी से सुल्तानपुर रोड पर मसवापुर गांव में जनरल स्टोर चलाने वाले बबलू और अनिल यादव का आकलन है कि ‘आप’ के कुमार विश्वास को ज्यादा वोट मिले तो राहुल की दिक्कत बढ़ सकती है।

लाखों की बढ़त हजारों में आ सकती है। वे कहते हैं यादव समाज के नौजवान मोदी और ‘आप’ को पसंद कर रहे हैं लेकिन बुजुर्गों को बूथों में सिर्फ पंजा दिखता है।

वे राहुल बिटवा, प्रियंका बिटिया के नाम पर वोट दे देते हैं।

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