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वर्ल्ड मेंस्ट्रुअल हाइजीन डे: अमर उजाला के कार्यक्रम में बालिकाएं जीतीं, हिचक हारी

Wed, 29 May 2019 12:54 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Wed, 29 May 2019 12:54 AM IST
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amar ujala program under aprajita 100 million smile on world menstrual hygiene day
अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स द्वारा आयोजित कार्यक्रम - फोटो : अमर उजला
मंगलवार को वर्ल्ड मेंस्ट्रुअल हाइजीन डे पर अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान के अंतर्गत एक टॉक शो का आयोजन किया गया। विकास नगर स्थित एक होटल में केजीएमयू की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. एसपी जैसवार, डॉ.सुजाता और डॉ राम मनोहर लोहिया संस्थान की डॉ. मालविका ने लड़कियों व उनके परिजनों की माहवारी से जुड़ी जिज्ञासाओं के जवाब दिए।
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amar ujala program under aprajita 100 million smile on world menstrual hygiene day
अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शामिल बालिकाएं - फोटो : अमर उजला
कार्यक्रम के दौरान बालिकाओं ने हिचक को पीछे छोड़ते हुए तमाम भ्रांतियों पर आधारित सवाल पूछे, जिसका डॉक्टरों ने वैज्ञानिक तथ्यों के साथ जवाब दिया। अंत में सभी बालिकाओं को माहवारी पर खुलकर बात करने की शपथ भी दिलाई गई ताकि भविष्य में हिचक के चलते किसी बालिका को परेशानी न उठानी पड़े।



माहवारी के दौरान एक किशोरी के शरीर से कितना खून जाता है? अगर माहवारी 18 वर्ष तक नहीं शुरू हो तो क्या करना चाहिए? सामान्य माहवारी की अवधि क्या होती है? क्या इस दौरान रक्तदान किया जा सकता है? इस दौरान क्या कपड़े का इस्तेमाल करना सुरक्षित है....? ऐसे न जाने कितने सवाल लेकर आईं थी राजधानी के विभिन्न गांवों से किशोरियां। 

पहले थोड़ी सी झिझक थी, लेकिन धीरे-धीरे उनके मन की जिज्ञासाएं सवालों के रूप में डॉक्टरों के सामने थीं। विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस पर आयोजित टॉक शो के दौरान समर्थ की टीम के कलाकारों ने ‘माहवारी हर औरत की सहेली’ नाटक का मंचन भी किया। सीफार की स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजर रंजना द्विवेदी और स्टेट प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर लोकेश त्रिपाठी ने कार्यक्रम का संचालन किया। 

कपड़ा इस्तेमाल करने से पहले उसे हर बार साफ करें 

कुछ बच्चियों में 10 से 14 वर्ष में माहवारी शुरू हो जाती है। इस अवधि में ऐसा न हो तो डॉक्टर को दिखाएं। यदि माहवारी शुरू होने पर जरूरत से ज्यादा खून आए तो भी तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। समय रहते उपचार न करने पर गर्भधारण में परेशानी आ जाती है। सबसे जरूरी बात है कि जब बच्ची समझदार हो जाए, समझने लगे तो मां को चाहिए कि उसे माहवारी के बारे में बताए। 

स्कूल में शिक्षिकाओं को चाहिए कि छात्राओं को इसके लिए मानसिक तौर पर तैयार करें। पैड का इस्तेमाल करना चाहिए, यदि किसी वजह से ऐसा न कर सकें तो सूती कपड़ा इस्तेमाल करें, पर ध्यान रखें कि उसे अच्छी तरह से साबुन से धोकर कड़ी धूप में सुखाएं। ऐसा न करने पर संक्रमण की आशंका बनी रहती है। हर बार यह प्रक्रिया अपनानी चाहिए। 
- डॉ. एसपी जैसवार, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, क्वीन मेरी, केजीएमयू

खून के थक्के निकलें तो हो जाएं सतर्क

माहवारी एक सामान्य प्रक्रिया है, यह हर माह होती है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। मीनोपॉज की उम्र 45 से 55 वर्ष की आयु तक है। हर माह गर्भाशय में अंडे बनते हैं, जो माहवारी के जरिए बाहर निकलते हैं। यह अवधारणा गलत है कि माहवारी के दौरान निकलने वाला रक्त गंदा होता है। 

यह भी महिलाओं की शारीरिक प्रक्रिया का हिस्सा है। माहवारी के दौरान 30 से 80 एमएल तक ब्लड निकलता है। इससे अधिक ब्लड निकलने या खून के थक्के आएं तो सतर्क हो जाना चाहिए। फौरन महिला रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेकर उपचार कराना चाहिए।
- डॉ. सुजाता देव, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, क्वीन मेरी, केजीएमयू

इससे न आचार खराब होते हैं न बाल धोना गलत 

जरूरी है कि हम मिथकों को खत्म करें, इसकी पहल आज इसी टॉक शो से करते हैं। इसके पीछे कोई तर्क नहीं कि माहवारी के दौरान आचार छूने से वह खराब हो जाता है। कोई भी किशोरी उन पांच दिनों में भी तैराकी कर सकती है, साइकिल चला सकती है या फिर वे सारे काम कर सकती है जो आम दिनों में करती है। 

ये भी मिथ है कि इस दौरान ठंडे पानी से नहाना चाहिए। गर्मी के दिनों में तो सही है, पर जाड़े के दिनों में ऐसा करना समझदारी नहीं। ठंडे पानी से नहाने का माहवारी से कोई ताल्लुक नहीं। इस दौरान चिड़चिड़ापन या बच्चियों के व्यवहार में बदलाव सामान्य बात है। यह हिचक या शर्म की बात नहीं है। इस दौरान सिर्फ सेहत पर ध्यान दें, दिक्कत लगे तो डॉक्टर से सलाह करें। 
- डॉ. मालविका मिश्रा, कंसल्टेंट, आरएमएल इंस्टीट्यूट एवं लेप्रोस्कोपिक सर्जन
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