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सवाल जवाब: चौधरी जयंत सिंह से खास बातचीत, बोले- पश्चिमी यूपी में पहले चरण के मतदान में ही मुकाबले से बाहर हो जाएगी भाजपा, सपा-रालोद देगी रोजगार और सुशासन

Tue, 08 Feb 2022 06:35 AM IST
Vikas Kumar रवींद्र प्रताप राणा/राजदीप जाखड़, अमर उजाला, लखनऊ
रवींद्र प्रताप राणा/राजदीप जाखड़, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 08 Feb 2022 06:35 AM IST
सार

सपा के साथ गठबंधन कर चुनाव में उतरे राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह दावा करते हैं कि पश्चिमी यूपी के किसान, नौजवान पहले चरण में ही भाजपा को चुनावी सीन से बाहर करके भाजपा नेताओं को जवाब दे देंगे। उन्हें लगता है कि चुनाव बाद सपा-रालोद गठबंधन की स्पष्ट बहुमत वाली सरकार बनेगी। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश...

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राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह - फोटो : amar ujala

विस्तार

सपा-रालोद गठबंधन का प्रदर्शन कैसा रहेगा?

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मैंने इतना उत्साह चुनाव में कभी नहीं देखा है। एक ओर माहौल है, एक ओर नाराजगी भी है सरकार से। सरकार में बड़ा अहंकार था। सरकार बिल्कुल भी संवेदनशील नहीं रही। अपने वादों के प्रति उनकी कोई प्रतिबद्धता नहीं रही। उनके वचन का कोई मोल नहीं रहा, जनता में विश्वास नहीं रहा। एक तो ये फैक्टर है, दूसरा पॉजिटिव वोट भी हमारे साथ आ रहा है क्योंकि हमने संघर्ष किया है। मैं और अखिलेश मिलकर साथ काम कर रहे हैं, तो लोग इस क्षेत्र के विकास के लिए नई संभावनाएं देख रहे हैं। जनता हमें मौका देना चाहती है।

आपकी नजर में मुख्य मुद्दे क्या हैं?
कई मुद्दे हैं। सुशासन ही मुद्दा है। सामने वाले जिन्ना-जिन्ना चिल्लाते रहे, पर लोग परेशान हैं। अर्थव्यवस्था में मंदी आई है। छोटे दुकानदारों को कोई राहत नहीं, उन्हें पलायन करना पड़ा। बीजेपी के लोग जिन मुद्दों पर लड़ रहे हैं, उनका जनता से कोई सरोकार नहीं रहा। उनकी एक रटी हुई पिच है। उनको वही गेंद फेंकनी आ रही है, वही फिरकी वो फेंक रहे हैं।
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भाजपा के ध्रुवीकरण की कोशिशों को कैसे रोकेंगे?
मुझे रोकने की जरूरत नहीं, लोग खुद ही रोक रहे हैं। भाईचारा जिंदाबाद का नारा हम लंबे समय से दे रहे हैं। कोई नहीं चाहता कि विवाद बढ़े। अमन-चैन विकास के लिए पहली जरूरत है। अभी एक स्टडी आई है जो बताती है कि अगर हम सेक्युलर मूल्यों को मजबूती दें और महिलाओं की भागीदारी समाज में बढ़ाएं तो 30 साल में प्रतिस व्यक्ति जीडीपी साढ़े तीन लाख रुपये बढ़ सकती है। हमारे देश के पिछड़ेपन की वजह भी यही है कि हम जाति, धर्म और लिंग भेद की पुरानी बंदिशों में जकड़े हुए हैं।
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कानून व्यवस्था के मुद्दे पर जवाब कैसे देंगे?
आज भाजपा की विचारधारा है कि देश की 60-70 फीसदी आबादी को डरा कर रखो। वे भय का वातावरण बनाना चाहते हैं। मुजफ्फरनगर में जो दंगा हुआ था, उसका राजनीतिक लाभ उठाना चाहते हैं। उन्हें कोई फिक्र नहीं कि इससे समाज की क्या हानि हो रही है। उन्हें बस सत्ता में रहना है। समाज के लिए, सुरक्षा के लिए उनकी यह सोच खतरनाक है। दंगाई कौन है, जनता सब समझ रही है। हम कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर बेहतर सरकार देंगे।

मुजफ्फरनगर दंगा, कैराना पलायन, बेटियों की सुरक्षा, पशु और वाहन चोरी जैसे मुद्दे भाजपा के सभी नेता उठा रहे हैं। कैसे काउंटर करेंगे?
वे पश्चिमी यूपी की धरती पर कदम रखते ही दंगा-दंगा चिल्लाने लगते हैं। 80 और 20 की बात करते हैं। दरअसल उनकी सरकार में अपराध बेकाबू है, महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। हाथरस, उन्नाव, बुलंदशहर जैसे जघन्य अपराध तो चंद ऐसे मामले हैं जो उजागर हुए। ऐसी घटनाएं पूरे प्रदेश में रोज हो रही हैं। लखीमपुर कांड को कौन भूल सकता है? जब भाजपा के केंद्रीय मंत्री ने किसानों को कार से रौंद कर मार डाला। वे आंकड़ों की बाजीगरी करते हैं, झूठ बोलते हैं। इन्होंने पुलिस के वर्क कल्चर और मनोबल को नष्ट कर दिया। न इसमें सुधार की कोई कोशिश हुई और न ही पुलिस में नई भर्तियां कीं। महिला पुलिस के पद खाली हैं। संवेदनशीलता भी नहीं है।

कहीं अभिमन्यु की तरह खुद को घिरा तो नहीं पा रहे हैं अपने आपको?
यह उनकी हताशा का संकेत है। उनके अंदर असुरक्षा की भावना बहुत मजबूत हो चुकी है। उन्हें पता चल गया है कि उनकी जमीन खिसक चुकी है। चौधरी अजित सिंह के बिना यह मेरा पहला चुनाव है। इस मायने में कठिन पल हैं, पर जनभावनाएं जुड़ी हुई हैं। मुझे पक्का भरोसा है कि नतीजे बहुत ही शानदार आने वाले हैं। हो सकता है चौधरी साहब ने मुझे चक्रव्यूह तोड़ने की पूरी विद्या सिखा रखी हो।

किसान आंदोलन का कितना असर है?
किसान आंदोलन की जीत हुई और सरकार हर मोर्चे पर हार गई। हमारी मुख्य मांग कानूनों के वापस कराने की थी। कानून वापस हुए लेकिन 700 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। लखीमपुर की घटना में भी न्याय नहीं मिल पाया। अभी भी पुलिस किसानों के खिलाफ कार्रवाई तो कर रही है, पर मंत्रिमंडल में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी बने हुए हैं। किसान इसे कभी नहीं भूलेगा।

भाजपा अखिलेश यादव पर ज्यादा हमलावर है। आप पर सॉफ्ट नजर आती है क्यों?
वो उनकी रणनीति का हिस्सा है। अब उनकी कोई रणनीति काम नहीं आने वाली। जनता उनके उठाए हर सवाल का जवाब खुद दे रही है। मेरे खिलाफ शायद वो कुछ ढूंढ नहीं पा रहे। वो इस जुगलबंदी और एकता से डरे हुए हैं। उनकी चाल को पश्चिमी यूपी के लोग खूब समझते हैं। हमारा गठबंधन मजबूत है और पहले चरण से ही शानदार जीत की तरफ  बढ़ रहा है।

भाजपा की तरफ से न्योते की बात आई, कहीं आपको वह दुष्यंत चौटाला तो नहीं बनाना चाहती?
हम पूरा चुनाव भाजपा की नीतियों के खिलाफ लड़ रहे हैं। हमने लाठियां खाईं। हाथरस की घटना को कौन भूल सकता है। हम पांच साल उनके खिलाफ  और जनता के लिए सड़कों पर लड़े हैं। हम कैसे भूल जाएं कि जो किसान आज हमारे साथ खड़े हैं, उनके परिवारों के 700 लोग आंदोलन में सरकार की बेरहमी की वजह से मारे गए। आज उनके कुशासन से त्रस्त जनता हमारे साथ खड़ी है, तो हम कैसे बदल सकते हैं। हमें लंबी लड़ाई लड़नी है और हमारे लक्ष्य छोटे नहीं हैं।

चुनाव के बाद अपनी क्या भूमिका देखते हैं? क्या उप मुख्यमंत्री बनेंगे?
अभी तो मैं पार्टी का अध्यक्ष हूं। पार्टी के दायरे को बढ़ाने की जरूरत है। राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक वैक्यूम महसूस किया जा रहा है। वहां हम समान विचारधारा वाले दलों के साथ मिलकर नई संभावनाएं तलाशेंगे। उप मुख्यमंत्री पर हमारी ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई है। चुनाव बाद हमारी सरकार बनेगी। हम अपनी ताकत को यूपी के विकास के लिए समर्पित करेंगे।


हमारे खून में गर्मी
जयंत ने कहा कि गांव में बाबा, दादा जी को कहा जाता है। योगी बाबा को क्या पता कि बाबा किसे कहते हैं। उनका उग्र स्वभाव है, बताइए वह बाबा कैसे हुए। बाबा कहते हैं कि 10 फरवरी के बाद गर्मी शांत कर देंगे। अब बाबा को कौन समझाए कि हमारे तो खून में ही गर्मी है। नौजवानों के खून में गर्मी न होती तो देश कैसे आजाद होता।

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