{"_id":"5da1cc8e8ebc3e016c13aab8","slug":"all-india-personal-law-board-says-decision-will-be-in-muslims-favour-in-ayodhya-case","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"अयोध्या विवाद में फैसला मुसलमानों के पक्ष में आएगा : ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अयोध्या विवाद में फैसला मुसलमानों के पक्ष में आएगा : ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड
Sat, 12 Oct 2019 09:03 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Sat, 12 Oct 2019 09:03 PM IST
विज्ञापन
मौलाना खालिद रशीद
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अयोध्या मामले में कोर्ट के बाहर समझौते कोशिशों के बीच मुसलमानों के सर्वोच्च धार्मिक संगठन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि केस में फैसला मुसलमानों के पक्ष में आएगा। वहीं ये भी साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा अपने अन्तिम चरण में है, ऐसे में समझौते की कोई गुंजाइश बाकी नही रह गई है।
शनिवार को राजधानी के नदवा कालेज में संपन्न हुई बोर्ड के कार्यकारिणी सदस्यों की बैठक में बोर्ड ने पुराने रुख पर कायम रहते हुए एक बार फिर कहा कि बाबरी मस्जिद को लेकर सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला करेगा उसे माना जाएगा। बोर्ड ने कोर्ट का फैसला बाबरी मस्जिद के हक में आने की उम्मीद जताई।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के चेयरमैन मौलाना सैयद राबे हसनी नदवी की अध्यक्षता में दारुल उलूम नदवतुल उलूम में संपन्न हुई कार्यकारिणी बैठक में अयोध्या विवाद का हल कोर्ट के बाहर हल करने के बयानों को लेकर विशेष रूप से चर्चा हुई।
विज्ञापन
बैठक के बाद बयान जारी कर बोर्ड ने कहा कि जो जगह मस्जिद के लिए वक्फ कर दी जाए वह हमेशा मस्जिद रहती है। उसकी हैसियत में कोई तबदीली नही की जा सकती। मुसलमान इसको न छोड़ सकते हैं और न ही उसमें बदलाव कर सकते हैं। बोर्ड ने ऐतिहासिक सुबूत और गवाहों का हवाला देकर ये भी साफ किया कि बाबरी मस्जिद का निर्माण मन्दिर को गिराकर या किसी मन्दिर की जमीन पर नही किया गया है।
बोर्ड की ओर से भी बताया गया कि मस्जिद के बारे में समझौते की बात सामने आती रही है। बोर्ड इंसाफ पर आधारित ऐसा हल जे सभी लोगों को कुबूल हो उसे निकालने की मंशा से समझौते के लिये होने वाली कई बैठकों में शामिल भी हुआ लेकिन बार बार की कोशिशों के बाद यह बात साफ हो चुकी है कि इस मसले में जाहिर तौर पर कोई समझौता मुमकिन नही है।
विज्ञापन
शनिवार को राजधानी के नदवा कालेज में संपन्न हुई बोर्ड के कार्यकारिणी सदस्यों की बैठक में बोर्ड ने पुराने रुख पर कायम रहते हुए एक बार फिर कहा कि बाबरी मस्जिद को लेकर सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला करेगा उसे माना जाएगा। बोर्ड ने कोर्ट का फैसला बाबरी मस्जिद के हक में आने की उम्मीद जताई।
विज्ञापन
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के चेयरमैन मौलाना सैयद राबे हसनी नदवी की अध्यक्षता में दारुल उलूम नदवतुल उलूम में संपन्न हुई कार्यकारिणी बैठक में अयोध्या विवाद का हल कोर्ट के बाहर हल करने के बयानों को लेकर विशेष रूप से चर्चा हुई।
विज्ञापन
बैठक के बाद बयान जारी कर बोर्ड ने कहा कि जो जगह मस्जिद के लिए वक्फ कर दी जाए वह हमेशा मस्जिद रहती है। उसकी हैसियत में कोई तबदीली नही की जा सकती। मुसलमान इसको न छोड़ सकते हैं और न ही उसमें बदलाव कर सकते हैं। बोर्ड ने ऐतिहासिक सुबूत और गवाहों का हवाला देकर ये भी साफ किया कि बाबरी मस्जिद का निर्माण मन्दिर को गिराकर या किसी मन्दिर की जमीन पर नही किया गया है।
बोर्ड की ओर से भी बताया गया कि मस्जिद के बारे में समझौते की बात सामने आती रही है। बोर्ड इंसाफ पर आधारित ऐसा हल जे सभी लोगों को कुबूल हो उसे निकालने की मंशा से समझौते के लिये होने वाली कई बैठकों में शामिल भी हुआ लेकिन बार बार की कोशिशों के बाद यह बात साफ हो चुकी है कि इस मसले में जाहिर तौर पर कोई समझौता मुमकिन नही है।
हक व इंसाफ के मुताबिक होगा मुकदमे का फैसला
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड उम्मीद जताते हुए कहा कि बोर्ड के वरिष्ठ अधिवक्ता डा. राजीव धवन की अगुवाई में अदालत में जो दलील व गवाह पेश किये गये हैं, उनकी बुनियाद पर अदालत का फैसला बाबरी मस्जिद के ही हक में होगा। ये फैसला हक व सच पर आधारित होगा।
बोर्ड ने ये भी कहा कि अयोध्या मामले का मुकदमे पर न केवल हिन्दुस्तान बल्कि पूरी दुनियां की निगाहें लगी हुई हैं और लोग यह उम्मीद रखते हैं कि देश की अदालत हिन्दुस्तान के संविधान, देश के कानून और गवाहों व दलीलों पर नजर रखेगी।
बैठक में बोर्ड की ओर से अदालत में पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन, अधिवक्ता शेखर नाफडे, अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा, अधिवक्ता यूसुफ हातिम मछाला, अधिवक्ता जफरयाब जीलानी और अधिवक्ता आन रिकार्ड शकील अहमद सैय्यद, एमआर शमशाद, एजाज मकबूल, इरशाद अहमद, फुजैल अहमद अय्यूबी और जूनियर अधिवक्ता आकृति चौबे, कुर्रतुल ऐन, परवेज अयाज, अजमी जमील, आदित्य समदर, सायरा हक की ओर से मुकदमे की पैरवी करने पर उनका शुक्रिया अदा किया।
बैठक में मौलाना सैयद राबे हसनी नदवी के अलावा महासचिव मौलाना वली रहमानी, सचिव मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी, सचिव एडवोकेट जफरयाब जीलानी, कार्यकारिणी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली, मौलाना अरशद मदनी, मौलाना अजीज भटकली, मौलाना हमजा नदवी, मौलाना फखरुददीन अशरफ, मौलाना यासीन अली उस्मानी, महिला विंग की संयोजक डा. असमा जेहरा, आमना रिजवान मुख्य रूप से शामिल रहे।
बोर्ड ने ये भी कहा कि अयोध्या मामले का मुकदमे पर न केवल हिन्दुस्तान बल्कि पूरी दुनियां की निगाहें लगी हुई हैं और लोग यह उम्मीद रखते हैं कि देश की अदालत हिन्दुस्तान के संविधान, देश के कानून और गवाहों व दलीलों पर नजर रखेगी।
बैठक में बोर्ड की ओर से अदालत में पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन, अधिवक्ता शेखर नाफडे, अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा, अधिवक्ता यूसुफ हातिम मछाला, अधिवक्ता जफरयाब जीलानी और अधिवक्ता आन रिकार्ड शकील अहमद सैय्यद, एमआर शमशाद, एजाज मकबूल, इरशाद अहमद, फुजैल अहमद अय्यूबी और जूनियर अधिवक्ता आकृति चौबे, कुर्रतुल ऐन, परवेज अयाज, अजमी जमील, आदित्य समदर, सायरा हक की ओर से मुकदमे की पैरवी करने पर उनका शुक्रिया अदा किया।
बैठक में मौलाना सैयद राबे हसनी नदवी के अलावा महासचिव मौलाना वली रहमानी, सचिव मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी, सचिव एडवोकेट जफरयाब जीलानी, कार्यकारिणी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली, मौलाना अरशद मदनी, मौलाना अजीज भटकली, मौलाना हमजा नदवी, मौलाना फखरुददीन अशरफ, मौलाना यासीन अली उस्मानी, महिला विंग की संयोजक डा. असमा जेहरा, आमना रिजवान मुख्य रूप से शामिल रहे।
तीन तलाक कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का लेंगे सहारा
एक साथ तीन तलाक कानून के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सुप्रीम कोर्ट का सहारा लेगा। बोर्ड का मानना है कि शादीशुदा मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की हिफाजत के नाम पर बना कानून खुद महिलाओं को नुकसान पहुंचाने वाला है।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के चेयरमैन मौलाना सैयद राबे हसनी नदवी की अध्यक्षता में संपन्न हुई कार्यकारिणी बैठक में तीन तलाक कानून का सुप्रीम कोर्ट में विरोध करने पर भी सहमति बनाई गई। बोर्ड का मानना है कि एक साथ तीन तलाक पर पाबंदी लगाने वाला कानून शरीअत में हस्तक्षेप है, साथ ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले और भारत के संविधान के भी खिलाफ है।
बोर्ड का कहना है कि इस कानून से महिलाओं और बच्चों के हित भी प्रभावित होंगे। बैठक में बोर्ड ने फैसला लिया कि तीन तलाक कानून को अदालत में चैलेंज किया जाएगा। बोर्ड की ओर से जल्द ही कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिट पेटीशन दाखिल करेगा।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के चेयरमैन मौलाना सैयद राबे हसनी नदवी की अध्यक्षता में संपन्न हुई कार्यकारिणी बैठक में तीन तलाक कानून का सुप्रीम कोर्ट में विरोध करने पर भी सहमति बनाई गई। बोर्ड का मानना है कि एक साथ तीन तलाक पर पाबंदी लगाने वाला कानून शरीअत में हस्तक्षेप है, साथ ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले और भारत के संविधान के भी खिलाफ है।
बोर्ड का कहना है कि इस कानून से महिलाओं और बच्चों के हित भी प्रभावित होंगे। बैठक में बोर्ड ने फैसला लिया कि तीन तलाक कानून को अदालत में चैलेंज किया जाएगा। बोर्ड की ओर से जल्द ही कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिट पेटीशन दाखिल करेगा।
यूनिफार्म सिविल कोड से अल्पसंख्यकों व आदिवासियों को भी नुकसान
पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक में भारत सरकार से मांग की गई कि वो देश में युनिफार्म सिविल कोड लागू करने के संबन्ध में कोई कदम न उठाये। बोर्ड का मानना है कि यूनिफार्म सिविल कोड से सिर्फ मुसलमानों का ही नही बल्कि सभी अल्पसंख्यकों व आदिवासियों के सामाजिक अधिकारों को नुकसान पहुंचेगा।
बोर्ड का कहना है कि हिन्दुस्तान एक बहुधार्मिक देश है। यहॉ रहने वाले हर नागरिक को अपने धर्म पर अमल करने और अपनी सभय्ता के साथ जिंदगी जीने की संवैधानिक आजादी है। युनिफार्म सिविल कोड अपने देश के लिए उपयुक्त नही है। बैठक में तय हुआ कि अदालत के जरिये युनिफार्म सिविल कोड लाने की हर कोशिश का विरोध किया जाएगा।
मीडिया की किया परहेज
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारिणी सदस्यों की बैठक से मीडिया को दूर रखा गया। ये पहला मौका था जब बैठक की कवरेज के लिये नदवा कालेज पहुंचे मीडियाकर्मियों को मुख्य गेट पर ही रोक दिया गया। मीडिया से दूरी बनाये रखने की वजह सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई का अंतिम दौर में होना बताया जा रहा है।
हालांकि मीडिया से दूरी बनाये रखने के पीछे नदवा में दो दिन पहले मौलाना सलमान नदवी की अगुवाई में उनके समर्थकों का हंगामा भी देखा जा रहा है। बोर्ड को डर था कि मीडियाकर्मियों के बहाने सलमान नदवी के समर्थक नदवा के भीतर घुसकर बैठक में व्यवधान पैदा कर सकते हैं।
बोर्ड का कहना है कि हिन्दुस्तान एक बहुधार्मिक देश है। यहॉ रहने वाले हर नागरिक को अपने धर्म पर अमल करने और अपनी सभय्ता के साथ जिंदगी जीने की संवैधानिक आजादी है। युनिफार्म सिविल कोड अपने देश के लिए उपयुक्त नही है। बैठक में तय हुआ कि अदालत के जरिये युनिफार्म सिविल कोड लाने की हर कोशिश का विरोध किया जाएगा।
मीडिया की किया परहेज
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारिणी सदस्यों की बैठक से मीडिया को दूर रखा गया। ये पहला मौका था जब बैठक की कवरेज के लिये नदवा कालेज पहुंचे मीडियाकर्मियों को मुख्य गेट पर ही रोक दिया गया। मीडिया से दूरी बनाये रखने की वजह सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई का अंतिम दौर में होना बताया जा रहा है।
हालांकि मीडिया से दूरी बनाये रखने के पीछे नदवा में दो दिन पहले मौलाना सलमान नदवी की अगुवाई में उनके समर्थकों का हंगामा भी देखा जा रहा है। बोर्ड को डर था कि मीडियाकर्मियों के बहाने सलमान नदवी के समर्थक नदवा के भीतर घुसकर बैठक में व्यवधान पैदा कर सकते हैं।