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...तो फिर मेरी गाड़ी ले लो
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Sat, 21 Dec 2013 01:11 PM IST
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राजनीति के रंग भी निराले हैं। लालबत्तियों का तिलिस्म सपा नेताओं को जकड़े हुए है।
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शनिवार को सपा मुख्यालय के बाहर गाड़ियों की लंबी लाइन से अंदाजा लग गया कि ‘नेताजी’ दिल्ली से लखनऊ पहुंच गए हैं। चर्चा आम थी, आजकल मंत्री का दर्जा ‘नेताजी’ ही बांट रहे हैं।
दोपहर बाद तक भी ‘नेताजी’ दफ्तर नहीं पहुंचे तो कुछ लोगों की बेचैनी बढ़ गई। पार्टी का माउथपीस कहे जाने वाले मंत्री दफ्तर में जमे हुए थे।
लालबत्ती का एक तलबगार बड़े अधिकार के साथ उनके पास पहुंचा। ‘नेताजी’ के दरबार में अपनी वकालत का दबाव बनाया। बिना लहसुन-प्याज वाले मंत्री तपाक से बोले, क्या करोगे लालबत्ती का?
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मेरी गाड़ी ले जाओ। वोट काम से बढ़ेंगे या बत्ती से? नेताजी क्या सबको लाल बत्ती दे सकते हैं।
इस बीच किसी ने टिप्पणी की, राजनीति में सब साधु नहीं होते। आप तो मकान भी नहीं ले रहे। हम सियासत करते हैं, संत नहीं हैं।