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संकट मोचक अफसर और अपनों को टेंशन
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Mon, 09 Dec 2013 08:43 AM IST
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पिछले दिनों एक कैबिनेट मंत्री और विभागीय अफसर में ठन गई। बात ज्यादा बढ़ी तो अफसर लंबी छुट्टी पर चले गए।
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बाद में मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट हुई तो मंत्री के विभाग बदलने की चर्चा शुरू हो गई।
चर्चा थी कि अफसर और मंत्री के बीच असहमति में उच्च स्तर पर भी अफसर की ही बात सही मानी गई है।
अफसर का कहना था कि वह मंत्री के साथ काम नहीं कर सकते। खैर, इस विवाद में बीच का रास्ता निकाला गया।
अफसर को एक कमिश्नरी की जिम्मेदारी सौंप दी गई और नए प्रमुख सचिव के लाने तक दूसरे विभाग के प्रमुख सचिव को विभाग का चार्ज देकर मंत्री को संतुष्ट करने की जिम्मेदारी दे दी गई।
नए साहब ने यह काम कुछ महीने में बड़े करीने से कर डाला। इधर सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना पौने दो साल से परवान नहीं चढ़ पा रही है।
अब तक तीन प्रमुख सचिवों की विभाग से विदाई हो चुकी है। अब सरकार ने फिर उन्हीं अफसर को याद किया है।
उनके काम संभालते ही काम में जिस तरह तेजी आई है, चर्चा शुरू हो गई है कि अटकी योजना जल्द ही परवान चढ़ेगी।
मगर अहम बात यह है कि ये अफसर सरकार की मुश्किलों के लिए जिस तरह खेवनहार बनते जा रहे हैं, दूसरे कई साथियों को चिंता सताने लगी है।