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अखिलेश यादव ने बोला हमला: कोरोना संक्रमण का सहारा लेकर पंचायत चुनाव प्रभावित करना चाहती है यूपी सरकार

Sat, 27 Mar 2021 04:34 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाराबंकी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाराबंकी Published by: ishwar ashish Updated Sat, 27 Mar 2021 04:34 PM IST
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Akhilesh Yadav unveils the statue of Beni Prasad Verma in Barabanki.
सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव - फोटो : अमर उजाला

यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री व सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार कोरोना संक्रमण का सहारा लेकर पंचायत चुनाव प्रभावित करना चाहती है। कोरोना की आड़ में सरकार हमारे अधिकारों को छीनने का काम कर रही है। आप सभी लोग सजग रहें और उनके बहकावे में न आएं।

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अखिलेश यादव ने शनिवार को बाराबंकी में पूर्व केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा की प्रतिमा का लोकार्पण किया और जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि योगी सरकार के चार साल पूरे हो गए हैं। प्रदेश में एक भी उद्योग नहीं लगा और पांच लाख करोड़ के एमओयू का दावा किया गया था।
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उन्होंने कहा कि योगी सरकार गरीबों, पिछड़ों, किसानों व बेरोजगारों के हक पर डाका डाल रही है। सभी सरकारी संस्थाओं को कंपनी बनाया जा रहा है। इससे आरक्षण नहीं मिलेगा। किसानों की कृषि योग्य भूमि चली जाएगी। सब कुछ उद्योगपतियों के हाथ में होगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि 2022 में सपा की सरकार जरूर बनेगी।
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कहा जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव चुनावी वर्ष और पंचायत चुनाव के शंखनाद के वक्त प्रतिमा के प्रतीक के सहारे कई सियासी गणित साधने की कोशिश कर रहे हैं।

पूर्व मंत्री राकेश वर्मा ने कार्यक्रम को पूरी तरह सफल बनाने के लिए प्रयास किया तो पार्टी के दिग्गज नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं तक ने अपने नेता की अगवानी के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। लखनऊ सीमा से लेकर कार्यक्रम स्थल तक का रास्ता होर्डिंग्स और बैनर से पाट दिया गया।

बाराबंकी में विकास के लिए जाने जाते हैं बेनी प्रसाद

समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के सबसे करीबी साथी और राजनीति के क्षेत्र में अपना अलग मुकाम हासिल करने वाले बेनी प्रसाद वर्मा अपनी बेबाक, बेलौस और कड़क राजनीति करने के लिए जाने जाते हैं। जिले में सड़कों का जाल हो या फिर घर-घर संचार सुविधा उपलब्ध कराने का जब जिक्र होता है तो यह उपलब्धि बेनी बाबू के खाते में गिनी जाती है।

सत्तर के दशक से गन्ना किसानों के मुद्दों पर राजनीति में कदम रखने वाले बेनी बाबू को विकास पुरुष के रूप में भी स्थान मिला। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दरियाबाद और मसौली से लगातार विधायक तो चुने ही गए बल्कि गोंडा और कैसरगंज से सांसद भी बने। अपने अक्खड़ स्वभाव के कारण सपा से अलग होकर पार्टी भी बनाई। कांग्रेस में भी गए, मंत्री रहे। पर उनका मन सपा में ही रहा। यही कारण था कि वह फिर लौट आए।

एक वर्ष पहले 27 मार्च को उनका देहांत हो गया। पहली पुण्यतिथि पर मोहन लाल वर्मा एजूकेशनल इंस्टीट्यूट में प्रतिमा अनावरण एवं श्रद्घांजलि सभा होनी है। इसके मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव होंगे। कई दिनों से बेनी बाबू के पुत्र व पूर्व मंत्री राकेश वर्मा अपनी पूूरी टीम के साथ तैयारियों में जुटे हैं तो पार्टी के नेता व कार्यकर्ता भी ऐतिहासिक स्वागत करने की तैयारी में हैं।

चुनावी वर्ष और पंचायत चुनाव के शंखनाद के बीच अखिलेश यादव श्रद्घांजलि सभा में प्रतिमा को प्रतीक मानकर कई सियासी गणित साध सकते हैं। कुर्मी मतदाताओं को साधने के साथ ही पहली बार पांच सीट जीतकर सपा के गढ़ को फतह करने वाली भाजपा को मात देने के लिए बेनी बाबू के पुराने रिश्तों का जिक्र कर पार्टी में नई ऊर्जा भरेंगे। जिसका असर आसपास के जिले गोंडा, बहराइच, अयोध्या, रायबरेली पर भी पड़ सकता है।

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