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मजमा तो अखिलेश ही लूट पाए
ब्यूरो/ अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 11 Mar 2014 11:23 AM IST
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न्यायिक अधिकारियों का दो दिनी बड़ा जलसा राजधानी में हुआ।
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इसमें न सिर्फ न्यायिक क्षेत्र के अधिकारी शामिल हुए बल्कि एनजीओ व अन्य सामाजिक संगठनों के लोग भी नजर आए।
सभी की नजर थी कि आम लोगों की बात करने वाले न्यायिक अधिकारी उनके बीच अपनी बात सहज तरीके से किस तरह रखते हैं।
पता चला कि संचालक से लेकर शीर्ष मेहमान तक, सभी ने आम लोगों की बात के लिए खास भाषा को चुना।
नतीजा ये हुआ कि काफी संवेदनशील, गंभीर और उम्मीद भरी बातें कहने के बावजूद शीर्ष न्यायिक अधिकारी तालियों को तरस गए।
मगर जब बारी मुख्यमंत्री की आई तो अपनी बात हिंदी में कही। असर ये हुआ कि भाषण की शुरुआत से लेकर अंत तक उन्हें खूब तालियां मिलीं।
खास बात ये रही कि भाषण के लिए हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के चयन की चर्चा औरों के अलावा डायस के सामने बीच की पांत में बैठे न्यायिक अफसरों में होती रही।
एक न्यायिक अधिकारी ने कहा भी कि मजमा तो अखिलेश ही लूट पाए।