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अफसरों को गाली देना मंत्रीजी पर पड़ा भारी, सीएम ने किया बर्खास्त

Thu, 09 Jun 2016 02:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 09 Jun 2016 02:59 AM IST
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akhilesh yadav take action against kuldeep ujjwal
अखिलेश यादव

फोन पर अफसरों को गाली देने और धमकाने वाले दर्जाधारी मंत्री कुलदीप उज्‍ज्वल ‌पर बुधवार को गाज गिर ही गई। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें मद्य निषेध परिषद के चेयर मैन पद से बर्खास्त कर दिया।

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उज्जवल ने सिफारिश के बावजूद दो लोगों का ट्रांसफर-पोस्टिंग उनके अनुसार न करने पर डीपीआरओ को फोन करके डीएम, सीडीओ व उनके खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया था। माना जा रहा है कि बागपत से उनका टिकट भी कट सकता है।
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दरअसल कुलदीप ने पिछले दिनों जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) से ग्राम सचिव के पद पर दो लोगों के ट्रांसफर-पोस्टिंग की सिफारिश की थी।

मन मुताबिक आदेश न होने पर कुलदीप भड़क गए और उन्होंने फोन पर न सिर्फ डीपीआरओ से अभद्रता की बल्कि डीएम और सीडीओ के लिए भी आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। बातचीत की रिकॉर्डिंग वायरल होने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया। विपक्ष भी सरकार पर हमलावर हो गया।

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यहां देखें, यह था पूरा मामला

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कुलदीप उज्ज्वल ने ग्राम सचिव पद पर दो लोगों की ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए डीपीआरओ सर्वेश कुमार पांडेय को फोन किया था। ऑडियो क्लिप में उज्ज्वल फोन पर कह रहे हैं, डीपीआरओ साहब! आपने आज तक मेरा असली रूप नहीं देखा। सोमवार को आ रहा हूं कलेक्ट्रेट में। मैं स्टूडेंट लीडर रहा हूं, यूनिवर्सिटी का प्रेसीडेंट रहा हूं। तुम सब लोगों को, तुम्हें, सीडीओ और डीएम को असलियत बताऊंगा। मैं सपा कैंडिडेट हूं। दो लोगों के लिए कहा है केवल।

इनमें से एक मेरे गांव का है और दूसरे के लिए छह के छह प्रधानों ने मांग की है। तुम्हें शर्म नहीं आई कि उस काम को कर देते। अब देखना कि ये जो तिवारी है न डीएम, इस कुत्ते को बता देना। औकात बताऊंगा, कैसे यमुना से रेत उठवाता है। मेरे पास सबका कच्चा चिट्ठा है।

पहले भी विवादों में रहे हैं कुलदीप
इससे पहले अक्तूबर 2014 में भी कुलदीप उज्ज्वल विवादों में आए थे जब उनके पिता धर्मपाल सिंह ने अपराधियों को गिरफ्तार करने गई पुलिस टीम के दरोगा को चौकीदार कहकर अपमानित किया था। गोकशी की जानकारी मिलने पर पुलिस टीम ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कुलदीप के गांव मवीकलां में दबिश दी। इस पर आरोपियों ने कुलदीप के पिता को बुला लिया।

गांव में पुलिस को देखकर वे भड़क उठे। दरोगा अशोक सिंह को धौंस दिखाकर धमकाने लगे। उन्होंने दरोगा को गाली भी दी। धमकाते हुए कहा, हम प्रदेश में मंत्री हैं और तू एक चौकीदार। हम तुम्हें नौकरी करना सिखा देंगे। तब कुलदीप ने अपने पिता का पक्ष लिया। उन्होंने दरोगा के साथ अभद्रता की खबर को सिरे से नकारते हुए कहा कि उनके पिता ने बेकुसूरों को इंसाफ  दिलाने के लिए आवाज उठाई है।

दूसरी बार हुई बर्खास्तगी
कुलदीप की बर्खास्तगी दूसरी बार हुई है। अखिलेश सरकार ने अक्तूबर 2014 में एक साथ जिन 82 नेताओं को सलाहकार पद से हटाया था, उनमें कुलदीप उज्ज्वल भी शामिल थे। तब कुलदीप के पिता द्वारा पुलिस पर धौंस जमाने के मामले के तूल पकड़ने के बाद ही सरकार ने थोक में सलाहकारों की छुट्टी की थी। हालांकि तब इस बर्खास्तगी को लोकसभा चुनाव के खराब नतीजों से भी जोड़ा गया था।

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