फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Akhilesh Yadav's plan for bypoll and vidhan sabha election 2017.

गठबंधन के विफल प्रयोग के बाद अब रणनीति बदलेंगे अखिलेश यादव, परिवार की एकता का देंगे संदेश

Sun, 09 Jun 2019 10:02 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sun, 09 Jun 2019 10:02 AM IST
विज्ञापन
Akhilesh Yadav's plan for bypoll and vidhan sabha election 2017.
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala

लगातार दो गठबंधनों के नाकाम प्रयोग और विधानसभा के बाद लोकसभा चुनाव में हार के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव अपनी रणनीति में बदलाव करेंगे। जहां उन पर समाजवादी कुनबे को जोड़ने व बढ़ाने का दबाव है, वहीं जमीनी स्तर पर काम व चुनाव प्रबंधन पर खास जोर रहेगा। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए कई छोटे दलों से उनकी नजदीकियां बढ़ सकती है। परिवार की एकता का संदेश देने पर भी फोकस रहेगा।

विज्ञापन


सपा में अभी चुनावी हार के कारणों की विधिवत समीक्षा तो नहीं हुई है, लेकिन अखिलेश से मिलने वाले सभी नेता फीडबैक दे रहे हैं। इनमें से ज्यादातर नेताओं को चुनाव के समय गठबंधन की लहर दिख रही थी। पर नतीजे अप्रत्याशित रहे। वहीं, मायावती ने यादव वोटों का बिखराव न रोकने का ठीकरा अखिलेश के सिर पर फोड़ा है। हालांकि फिरोजाबाद व अपवाद स्वरूप एकाध और सीट को छोड़ दें तो यादव मतों में विशेष बिखराव नहीं दिखा।
विज्ञापन


माया के आकलन से इतर अखिलेश पहले उपचुनाव और फिर 2022 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर रणनीति बना रहे हैं। उन पर कुछ नया करने का दबाव भी है, ताकि 2017 के विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस और 2019 में बसपा से गठबंधन के विफल प्रयोग की तोहमत से उबरा जा सके।
विज्ञापन
विज्ञापन


उनके खाते में 2014 के लोकसभा चुनाव, 2017 के विधानसभा चुनाव और अब 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की खराब परफॉरमेंस भी जुड़ गई है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का मानना है कि अखिलेश को कुछ नया करना व सोचना होगा और भाजपा से लड़ाई के नए तरीकों पर भी विचार करना होगा।

अखिलेश यादव पर काफी दबाव, जमीन पर काम करने पर होगा फोकस

बदले राजनीतिक हालात में अखिलेश पर काफी दबाव है। मुलायम सिंह चाहते हैं कि पार्टी से छिटके समाजवादी नेताओं को फिर से साथ लाया जाए और परिवार की एका का संदेश भी जनता में जाए। इन कदमों का विधानसभा चुनाव में ज्यादा असर पड़ेगा।

वे चाहते हैं कि शिवपाल की ससम्मान वापसी भी हो। हालांकि, सपा नेताओं का कहना है कि शिवपाल अभी भी सपा में हैं। इससे उम्मीद है कि सपा छोड़कर दूसरे दलों में गए कुछ नेताओं की पार्टी में जल्दी ही वापसी हो सकती है।

कुछ सपा नेताओं का मानना है कि अब जमीनी स्तर पर काम करना होगा। चुनावी रणनीति सिर्फ कागजों पर कामयाब नहीं होने वाली है। जिनके लिए सामाजिक न्याय की बात की जा रही है, उन्हें इसकी जानकारी हो और उनकी निचले स्तर तक संगठन में भागीदारी भी होनी चाहिए।

साथ आ सकते हैं नए सहयोगी

बसपा के गठबंधन से अलग होने के बावजूद रालोद से सपा की दोस्ती कायम रह सकती है। रालोद ने कहा भी है कि उनका गठबंधन सपा से हुआ था और यह जारी रहेगा। सुभासपा, जनवादी पार्टी जैसे दलों से नजदीकियां बढ़ सकती हैं। इन दलों का खास जातियों में प्रभाव है।

कुछ सामाजिक संगठन भी सपा के करीब आ सकते हैं। भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा बनाने के लिए वामपंथी दलों व किसान संगठनों का भी सहयोग लिया जा सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed