अखिलेश यादव ने योगी सरकार से किया सवाल, क्या राज्य के श्रमिक विदेशी हैं जो सीमाएं सील कर दीं
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदेश सरकार के उस आदेश की तीखी आलोचना की है, जिसमें कहा गया है कि प्रवासी मजदूरों को प्रदेश की सीमा में नहीं घुसने देंगे, ट्रक, दोपहिया वाहनों और रेल ट्रैक पर नहीं चलने देंगे।
उन्होंने सवाल किया कि राज्य की सीमाओं पर क्या कोई विदेशी हमला होने वाला है? क्या अपने राज्य के कामगार विदेशी हैं जो उनके लिए सीमाएं सील कर दीं? उन्होंने तंज किया कि अच्छा होगा, सरकार गरीब की जिंदगी पर ही रासुका लगा दे।
अखिलेश ने रविवार को कहा कि दतिया, झांसी, जालौन, कानपुर, गाजियाबाद, सहारनपुर की सीमाओं पर संघर्ष तबाही के शिकार श्रमिकों का कसूर क्या है? उन्नाव में सड़क जाम है। प्रशासन ने 10-10 किलोमीटर का जाम क्यों लगाया? इसका जवाब तो टीम-इलेवन को देना पड़ेगा। सिर पर सामान लेकर नदी को पार करते श्रमिकों का जत्था, क्या यही उत्तर प्रदेश का परिचय है?
ये सभी कितनी बेबसी के शिकार है। ऐसा दुर्व्यवहार तो बेगानों के साथ भी नहीं होता है। उन्होंने कहा, भाजपा ने श्रमिकों, कामगारों और गरीबों को जितना अपमानित किया, वह दुख भरी अनंत दास्तान है। इस पीड़ा और कष्ट को श्रमिक कभी भूल नहीं पाएगा।
श्रम कानूनों का रक्षा कवच भी छीना
सपा अध्यक्ष ने कहा कि अगर सरकार का गरीब मजदूरों के प्रति ऐसा ही दुर्भावनापूर्ण और उपेक्षापूर्ण व्यवहार बना रहा तो भला किस पर विश्वास कर ये मजदूर अपने काम पर वापस लौटेंगे? अमीरों की इस सरकार ने अब तो श्रम कानूनों का रक्षा कवच भी छीन लिया है।
प्रदेश में प्रशासन के पंगु होने से जैसी अफरा-तफरी मची है, उससे साबित होता है कि समाज में दूरी पैदा करने वाली भाजपा का सारा ध्यान कोरोना नियंत्रण और गरीब को रोजी-रोटी की सुविधा देने पर नहीं, अपनी चुनावी चालों पर है।