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इंडो-टर्किश: व्यापारिक रिश्तों की नई इबारत
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Sun, 18 Aug 2013 12:01 PM IST
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि वही देश तरक्की कर सकता है जिसके दूसरे देशों से संबंध अच्छे होंगे।
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आर्थिक रूप से अपने को मजबूत करने के लिए ज्यादातर देश आज देश की सीमाएं तोड़कर दूसरे देशों से व्यापारिक संबंध बना रहे हैं।
जब तक पड़ोसी देशों से संबंध अच्छे नहीं होंगे हम तरक्की नहीं कर सकेंगे। उन्होंने कहा, टर्की से हमारा बहुत पुराना संबंध है।
इसका अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि टर्की के करीब छह हजार से ज्यादा शब्द उर्दू से होते हुए हिन्दी में समाहित हो गए।
मुख्यमंत्री शनिवार को इंडो-टर्किश फ्रेंडशिप एंड कल्चर सोसाइटी के सिल्वर जुबली समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा, हमारे देश के पुराने दस्तावेज टर्की भाषा में मिलते हैं। इससे साफ है कि हमारा संबंध काफी पुराना है। किसी देश से अच्छे संबंध तब और मजबूत हो जाते हैं जब दोनों देशों के लोग एक दूसरे से सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध बनाते हैं।
टर्की के राजदूत डॉ. बुराक ने कहा कि भारत से हमारे देश के संबंध 16वीं शताब्दी से हैं। अक्तूबर में भारत के राष्ट्रपति भी टर्की की यात्रा पर जा रहे हैं।
उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से लखनऊ को टर्की की सिस्टर सिटी का दर्जा देने की मांग की। इसके तहत शैक्षिक, आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक गतिविधियां एक-दूसरे के यहां आयोजित की जा सकेंगी।
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उन्होंने सोसाइटी से अपने कार्यक्रम लखनऊ के अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी करने के लिए कहा। सोसाइटी के संस्थापक व कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. अम्मार रिजवी ने कहा कि भारत व टर्की में काफी समानताएं हैं।
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