फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Akhilesh Yadav comments in support of women protesting against CAA.

नागरिकता कानून: महिलाओं के लिए अभी भी नहीं खोला शौचालय, अखिलेश बोले- संवेदनहीनता की पराकाष्ठा

Mon, 20 Jan 2020 02:05 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 20 Jan 2020 02:05 PM IST
विज्ञापन
Akhilesh Yadav comments in support of women protesting against CAA.
अखिलेश यादव - फोटो : अमर उजाला

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ के घंटा घर में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रही महिलाओं का समर्थन किया है और पुलिस द्वारा उनसे कंबल छीने जाने को संवेदनहीनता की पराकाष्ठा कहा है।

विज्ञापन


अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार ने राज्य में ऐसी पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू की है कि राजधानी के घंटाघर पर सीएए और एनपीआर के विरोध में महिलाओं के धरना-प्रदर्शन के समय कंपकंपाती ठंडी रात में उनके कंबल छीन लिए गए। शौचालय पर ताला लगा दिया गया। प्रदर्शन स्थल की लाइटें काट दी गईं। महिलाओं के साथ बच्चे भी थे, उन पर सरकार को तरस नहीं आया। यह संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।
विज्ञापन


अलाव व टेंट के बिना डटीं महिलाएं
नागरिकता संशोधन कानून, एनआरसी व एनपीआर के विरोध में शुक्रवार से राजधानी में शुरू हुआ महिलाओं का धरना रविवार को भी जारी रहा। महिलाएं भीषण ठंड में घंटाघर पर बच्चों के साथ बिना अलावा व टेंट के डटी रहीं। पार्क में महिला शौचालय बंद होने सहित अन्य समस्याओं के बाद भी महिलाएं पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


पुलिसकर्मियों को बांटे गुलाब के फूल
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर कंबल व खाने का सामान छीनने का आरोप लगाया। इसके विरोध में रविवार को प्रदर्शन में शामिल होने आई बच्चियों ने पुलिसकर्मियों को गुलाब के फूल देकर गांधीगीरी की।

'महिलाओं की संख्या बढ़नी शुरू हुई तो घंटाघर के पास का इलाका भीड़ से भर गया'

रविवार को घंटाघर पर सुबह महिलाओं की संख्या कम दिखी पर विरोध जारी रहा। हाथों में नो सीएए, नो एनआरसी, रिजेक्ट सीएए और बायकॉट एनआरसी जैसी नारे लिखी तख्तियां लिए महिलाएं विरोध करती दिखीं। दोपहर बाद महिलाओं की संख्या बढ़नी शुरू हुई तो घंटाघर के पास का इलाका भीड़ से भर गया। रात में ठंड से बचाव के साधन न होने के बावजूद महिलाएं देशभक्ति के नारों और राष्ट्रगीत के जरिये हौसला बांध रही हैं।

प्रदर्शन में शामिल इरम व सुमैया राना का आरोप है कि पुलिस प्रदर्शन को कमजोर करने पर अड़ी है। कोई पुरुष इसका विरोध करता है तो उसे गिरफ्तार कर ले रही है। बीती रात सालिम नाम के लड़के को पुलिस अपने साथ ले गई। उसे सुबह तक छोड़ा नहीं गया।

दिव्यांग दंपती भी हुए शामिल
प्रदर्शन में शामिल होने के लिए रविवार को वजीरबाग के दिव्यांग दंपती मो. वसीम व उनकी पत्नी तरन्नुम वसीम अब्बास भी घंटाघर अपनी ट्राई साइकिल से पहुंचे। प्रदर्शन कर रही महिलाओं का उत्साह बढ़ाया।

जेल से रिहा होने के बाद शुएब भी पहुंचे घंटाघर

नागरिकता संशोधन कानून व एनआरसी के विरोध प्रदर्शन में हिंसा के बाद गत 20 दिसंबर को गिरफ्तार किए गए रिहाई मंच के अध्यक्ष एडवोकेट मो. शुएब एक महीने बाद जेल से छूटने के बाद सीधे घंटाघर पहुंचे। उन्होंने महिलाओं के प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि यदि संविधान के खिलाफ कुछ भी गलत होता है तो हम सभी का कर्तव्य है कि उसका विरोध करें। इसका अधिकार हमें देश का संविधान देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को हिंसक बनाने की साजिश जानबूझ कर की गई थी। उन्होेंने कहा कि आज देश की बहन, बेटियाें ने दिखा दिया है कि देश में संविधान का ही राज होगा।

नहीं खुला महिला शौचालय का ताला
ऐतिहासिक घंटाघर पर महिलाओं के जुटने के बाद शुक्रवार से ही बंद पार्क में बने शौचालय का ताला रविवार को भी नहीं खुला। इससे महिलाएं पुरुष शौचालय का इस्तेमाल करने पर मजबूर है। ऐसे में कई बार उन्हें परेशानियों का सामना भी करना पड़ रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed