दो साल में ही कर ली ‘दोस्ती’ से तौबा
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सरकार का मुखिया बने अभी दो साल भी नहीं गुजरे कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
यह दूरी सीधे तौर पर आईएएस वीक में दिखेगी, जिसमें होने वाले क्रिकेट मैच में मुख्यमंत्री ने आला हाकिमों के साथ खेलने से इन्कार कर दिया है। अब वे पूर्ववर्ती मुख्यमंत्रियों की तरह आईएएस अफसरों को संबोधित करने की रस्म ही निभाएंगे।
बसपा
राज में मायावती से समय न मिलने के कारण आईएएस अधिकारी पूरे पांच साल तक
सालाना जलसा नहीं कर पाए थे।
सपा सरकार आई तो मुख्यमंत्री अखिलेश ने आईएएस
अफसरों से बेहतर तालमेल का संकेत देते हुए न सिर्फ ‘आईएएस वीक’ को हरी झंडी
दी बल्कि क्रिकेट की पिच पर भी चौके-छक्के साझा करने को राजी हो गए।
आईएएस वीक की हिस्ट्री में शायद यह पहला मौका था
जब किसी मुख्यमंत्री ने अपने साथी विधायकों की टीम बनाकर सीनियर
ब्यूरोक्रेट्स के साथ फ्रेंडली मैच खेला।
सीएम की इस पहल से पांच साल से मन
ही मन घुट रहे सूबे के आईएएस अफसरों का आत्मविश्वास बढ़ा व सीएम के इस कदम
की हर स्तर पर तारीफ भी हुई।
मगर यह ‘दोस्ती’ ज्यादा दिन तक कायम नहीं रह
सकी। आईएएस दुर्गाशक्ति नागपाल के निलंबन को लेकर एसोसिएशन की सक्रियता
मुख्यमंत्री को अखर गई।
कई बार वह यहां तक कह गए कि आईएएस अफसर किसी के
नहीं हो सकते। स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन ने भी कई बार तल्ख लहजे में खुले
मंच से सरकार की नाराजगी का इजहार किया।
इस
बार आईएएस वीक 13 से 16 फरवरी के बीच तय हुआ है। मुख्यमंत्री इसमें अपने
पूर्ववर्ती मुख्यमंत्रियों (मायावती को छोड़कर) की तरह ही वरिष्ठ प्रशासनिक
अधिकारियों के सम्मेलन को संबोधित करेंगे।
अपने आवास पर लंच की परंपरा भी
निभा सकते हैं, पर मैच नहीं खेलेंगे। हालांकि एसोसिएशन से जुड़े अधिकारी इस
बार आईएएस वीक के दौरान चुनाव तैयारियों की सरगर्मी की वजह से मुख्यमंत्री
के पास कम वक्त का हवाला दे रहे हैं।