'किसानों को भी मुनाफे का हिस्सा दें उद्योगपति'
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प्रदेश में खाने-पीने की वस्तुओं में मिलावट पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चिंता जताते हुए कहा है कि इसे रोकना ही होगा। लोगों को सस्ते में अच्छी वस्तुएं मिलें, इसकी चिंता की जाए।
विभिन्न दुकानों पर काजू की बर्फी अलग-अलग कीमत पर मिल जाएगी। कहीं यह 650 रुपये प्रति किग्रा. है तो कहीं 200 में मिल रही है। इसका मतलब है मिलावट।
साफ है कि बर्फी में या तो शुद्ध दूध नहीं मिलाया जा रहा या अच्छा काजू नहीं मिला रहे। वह बृहस्पतिवार को कांशीराम सांस्कृतिक स्थल (स्मृति उपवन) में ‘एग्री हार्टीटेक अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी’ का उद्घाटन कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने किसानों के लिए पूरे प्रदेश में 2016 के अंत तक अलग फीडर से बिजली आपूर्ति शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने उद्योगपतियों से मुनाफे का कुछ हिस्सा किसानों को देने की अपील भी की।
'गाय के दूध में भैंस का दूध ही मिला देते हैं'
मुख्यमंत्री ने कहा, लोगों की थाली से सब्जी, फल व दूध गायब है। ये वस्तुएं थाली में तभी होती हैं जब डॉक्टर ऐसी सलाह देते हैं। दूध भी शुद्ध नहीं मिलता। गाय का दूध तो मिलना ही मुश्किल है। बहुत लोग कुछ और नहीं मिलाते तो गाय के दूध में भैंस का दूध ही मिला देते हैं।
सपा सरकार लगातार कोशिश कर रही है कि किसानों के चेहरे पर खुशहाली दिखे। लोगों को शुद्ध वस्तुएं मिलें। कामधेनु डेयरी योजना सहित कई अन्य काम इसी मकसद से शुरू किए गए हैं।
इसका एक उद्देश्य लोगों को शुद्ध वस्तुएं मुहैया कराना भी है। इसीलिए सरकार ने लखनऊ से आगरा तक बनने वाले एक्सप्रेस-वे के किनारे उद्योगों की स्थापना के बजाय मंडियां बनवाने का फैसला किया है ताकि किसान अपने उत्पादों, फल, सब्जी और दूध को बेचकर आमदनी बढ़ा सकें। इससे किसानों की आय भी बढे़गी और लोगों को शुद्ध वस्तुएं भी मिल सकेंगी।
...तो घट जाएगी शहरों में महंगाई
उद्घाटन के बाद मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी में लगे स्टालों को देखा। प्रदर्शनी के आयोजकों में शामिल पीएचडी चैंबर के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक श्रीराम व प्रदेश अध्यक्ष ललित खेतान ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक विंदेश्वर पाठक ने भी मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न भेंटकर स्वागत किया। साथ ही उन महिलाओं से मिलवाया जिन्हें उनकी संस्था अपने पैरों पर खड़ा होने में मदद कर रही है। प्रमुख सचिव अमित मोहन प्रकाश और मंडी परिषद के निदेशक डॉ. अनूप यादव भी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री ने उद्योपतियों का आह्वान किया कि वे किसानों और बाजार के बीच भाव का अंतर कम करने में योगदान दें। कोशिश करें कि शहरों में महंगाई घटे और बचत का कुछ हिस्सा किसानों को लाभ के रूप में दिया जाए।
किसानों के खुशहाल हुए बिना प्रदेश में खुशहाली नहीं आ सकती। अगर व्यापारी व उद्योगपति अपने लाभ में प्रति क्विंटल पांच रुपये भी घटाकर उसे किसानों को दिए जाने वाले मूल्य में जोड़ दें तो बड़ा परिवर्तन आ जाएगा। शहरों में महंगाई घट जाएगी और किसानों के चेहरों पर खुशी आ जाएगी।
अधिकारियों पर भी ली चुटकी
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की चुटकी भी ली। कहा, अधिकारियों का हिसाब-किताब ठीक नहीं रहता। कभी ज्यादा बता देंगे तो कभी कम।
अभी प्रदर्शनी में एक स्टाल पर मैंने अंडे का उत्पादन पूछा तो एक अधिकारी ने प्रतिदिन लगभग एक करोड़ बताया जबकि वहीं खड़े एक किसान ने प्रतिदिन दो करोड़ अंडों का उत्पादन होने की जानकारी दी। मुझे भी दो करोड़ का ही आंकड़ा पता है। पर, रोज दो करोड़ अंडा भी प्रदेश की जरूरत के लिहाज से कम है। सरकार इसका उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान देगी।
क्यों छोटा होता जाता है काजू
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनेश्वर मिश्र इस बात से चिंतित रहते थे कि अच्छी चीजें दिल्ली में यानी शहरों में बिकती हैं। सस्ती बिकती हैं। पर, गांव में वस्तु भी खराब बिकती है और अपेक्षाकृत महंगी भी।
वह कहते थे कि दिल्ली में काजू बड़ा और साबुत मिलता है लेकिन जैसे-जैसे छोटे शहरों और फिर गांव में पहुंचता है तो उसके टुकड़े होते चले जाते हैं। इसका कारण मुनाफाखोरी है।