बहाने बनाने में भी उस्ताद हैं अखिलेश के मंत्री
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपने मंत्रियों से संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक करने को कहा है। उनके इस निर्देश से भले ही केंद्रीय मंत्री दबाव में हों लेकिन उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का यह निर्देश उनके मंत्रियों पर बेअसर ही रहा है।
मार्च 2012 में सरकार में आने के तत्काल बाद मुख्यमंत्री अखिलेश ने अपने सभी मंत्रियों से संपत्ति की घोषणा का निर्देश दिया था।
उन्होंने खुद पहल करते हुए 27 मार्च 2012 को अपनी संपत्ति घोषित भी कर दी। सीएम ने सोचा होगा कि शायद इसका कुछ असर मंत्रियों पर पड़े और वे भी इसके लिए आगे आएंगे।
नहीं सुनी अखिलेश की
इसमें छोटे व बड़े सभी मंत्री शामिल हैं। इस बारे में पूछने पर इनके पास तरह-तरह के बहाने हैं।
बहानों की बानगी
जरा बहानों की बानगी देखिए। कोई कहता है कि वह विधायक के तौर पर अपनी संपत्ति घोषित कर ही रहे हैं तो मंत्री के रूप में इसकी क्या जरूरत है? कोई हाल ही में मंत्री पद की शपथ लेने का तर्क देकर जल्दी ही इसकी घोषणा करने का वादा कर रहा है।
कोई कह रहा है कि मैंने फॉर्म जमा कर दिया है। अगर संपत्ति की घोषणा नहीं हुई है तो जल्द ही घोषित कर देंगे। पर, जिन्होंने अब तक संपत्ति की घोषणा नहीं की, उनसे आगे भी आसानी से इसकी उम्मीद नहीं है।
कोई कहता है, वह घोषणा कर चुके हैं। यह बात दीगर है कि कहीं यह घोषणा दिखती नहीं।
मुख्यमंत्री कर चुके हैं घोषणा
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 27 मार्च 2012 को अपनी संपत्ति की घोषणा की। उन्होंने बिना किसी शोरशराबे के अपनी संपत्ति का ब्यौरा सरकारी वेबसाइट पर डाल दिया।
इस घोषणा के मुताबिक, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव उस समय लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक थे। बावजूद इसके मंत्रियों पर इसका असर नहीं पड़ा।
ये हैं इनके वादे और तर्क
अपनी सम्पित्ति की घोषणा पर प्राविधिक शिक्षा मंत्री शिवाकांत ओझा का कहना है कि विधायक के रूप में मैं बहुत पहले से ही अपनी संपत्ति की घोषणा हर साल करता रहा हूं। मंत्री अभी जल्द ही बना हूं।
इसके बाद चुनाव घोषित हो गए। उसमें लग गया। मंत्री के रूप में भी जल्द ही संपत्ति की घोषणा कर दूंगा।
फॉर्म भर दिया है
वहीं परिवहन मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव का कहना है कि विधायक के रूप में अपनी संपत्ति की घोषणा करता रहता हूं। मंत्री के रूप में भी संपत्ति घोषित करने का फॉर्म वगैरह भर दिया है। देख लूंगा, अगर नहीं घोषित हुई है तो जल्द ही घोषित कर दूंगा।
इनके अपने बहाने
खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति का कहना है कि मैंने घोषणा की थी। अगर मेरी घोषणा अभिलेखों में उपलब्ध नहीं है तो फिर कर दूंगा। वैसे भी इस साल की घोषणा के लिए फॉर्म मंगवा लिया है। जल्दी ही उसे भर दूंगा। मेरे पास छिपाने को कुछ नहीं है।
घोषणा कर चुका हूं
इस पर पंचायती मंत्री बलराम यादव का कहना है कि मैंने संपत्ति की घोषणा कर दी है। यह घोषणा बहुत पहले ही मैंने कर दी थी। आप पूछ रहे हैं कि कब की क्योंकि पता नहीं चल रहा है, तो देखूंगा कि ऐसा क्यों है, क्या मामला है?