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महंगाई व कुशासन के बीच पिस रहे मध्य वर्ग के लोग: अखिलेश
Fri, 06 Nov 2020 09:45 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 06 Nov 2020 09:45 PM IST
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अखिलेश यादव
- फोटो : amar ujala
सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा सरकार ने उत्तर प्रदेश को बदहाल बना दिया है। गरीब मध्यवर्गीय जनता मंहगाई व भाजपा के कुशासन के बीच पिस रही है। प्रदूषण के बहाने किसानों को पराली जलाने के अभियोग में जेल का भय सता रहा है। भाजपा किसानों के बजाय कारपोरेट घरानों का पोषण करती है। वह किसान की खेती को भी पूंजीघरानों व बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हाथों में भी सौंपना चाहती है। कृषि विधेयक लाकर भाजपा ने किसान विरोधी भावना प्रदर्शित कर दी है।
अखिलेश यादव ने शुक्रवार को बयान में कहा कि चौतरफा बदहाली के बावजूद मुख्यमंत्री को यूपी के उद्यम प्रदेश बनने का सपना आ रहा है। भाजपा सरकार राज्य को उजाड़कर अब लोगों को गुमराह करने के लिए उछलकूद कर रही हैं। महंगी बिजली लोगों को रुला रही है। किसान को धान खरीद के सही दाम नहीं मिल रहे हैं। गन्ना पेराई शुरू हो गई है पर किसान को पिछला बकाया भी नहीं मिला है। नए सत्र के लिए गन्ना मूल्य घोषित नहीं हुआ। पराली जलाने के आरोप में हजारों किसानों के खिलाफ मुकदमों की नोटिसें जारी हुई हैं। किसान की पराली के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था भाजपा सरकार ने नहीं की। पराली प्रबंधन की जो बातें है भी, वे हवा में की जा रही हैं। पर्यावरण प्रदूषण का शोर मचाने वाले राजनीतिक प्रदूषण फैलाने वालों पर कब शिकंजा कसेंगे?
सपा अध्यक्ष ने कहा किसान को समय से खाद नहीं मिल रही है। यूरिया महंगी है। उसमें भी 5 किलो खाद कम होती है। बिजली संकट अलग है। तमाम परेशानियों से जूझ रहे किसान कोई उम्मीद न देखकर आत्महत्या को मजबूर हो जाते हैं। जनता रोजमर्रा की तकलीफों में उलझी हुई है। उस पर सरकार की निष्क्त्रिस्यता जले पर नमक का एहसास कराती है। उन्होंने कहा कि जिस भाजपा सरकार के खिलाफ जवान और किसान है, उसे समझना चाहिए कि दंभी सत्ता के गिने-चुने दिन ही शेष रह गए हैं। जनता का आक्रोश वर्ष 2022 में ईवीएम मशीनों के बटन दबाकर और भाजपा को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाकर ही शांत होगा।
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अखिलेश यादव ने शुक्रवार को बयान में कहा कि चौतरफा बदहाली के बावजूद मुख्यमंत्री को यूपी के उद्यम प्रदेश बनने का सपना आ रहा है। भाजपा सरकार राज्य को उजाड़कर अब लोगों को गुमराह करने के लिए उछलकूद कर रही हैं। महंगी बिजली लोगों को रुला रही है। किसान को धान खरीद के सही दाम नहीं मिल रहे हैं। गन्ना पेराई शुरू हो गई है पर किसान को पिछला बकाया भी नहीं मिला है। नए सत्र के लिए गन्ना मूल्य घोषित नहीं हुआ। पराली जलाने के आरोप में हजारों किसानों के खिलाफ मुकदमों की नोटिसें जारी हुई हैं। किसान की पराली के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था भाजपा सरकार ने नहीं की। पराली प्रबंधन की जो बातें है भी, वे हवा में की जा रही हैं। पर्यावरण प्रदूषण का शोर मचाने वाले राजनीतिक प्रदूषण फैलाने वालों पर कब शिकंजा कसेंगे?
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सपा अध्यक्ष ने कहा किसान को समय से खाद नहीं मिल रही है। यूरिया महंगी है। उसमें भी 5 किलो खाद कम होती है। बिजली संकट अलग है। तमाम परेशानियों से जूझ रहे किसान कोई उम्मीद न देखकर आत्महत्या को मजबूर हो जाते हैं। जनता रोजमर्रा की तकलीफों में उलझी हुई है। उस पर सरकार की निष्क्त्रिस्यता जले पर नमक का एहसास कराती है। उन्होंने कहा कि जिस भाजपा सरकार के खिलाफ जवान और किसान है, उसे समझना चाहिए कि दंभी सत्ता के गिने-चुने दिन ही शेष रह गए हैं। जनता का आक्रोश वर्ष 2022 में ईवीएम मशीनों के बटन दबाकर और भाजपा को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाकर ही शांत होगा।
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