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गजल के जरिये अखिलेश की जुबां पर आया सियासी दर्द

Sun, 23 Aug 2015 01:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 23 Aug 2015 01:56 AM IST
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Akhilesh gives political message through a Urdu template.

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की दिल की बात आखिर जुबां पर आ ही गई। सियासत में दगाबाजी की पीड़ा छलक ही पड़ी। इशारों ही इशारों में चोट भी कर दिया। हथियार बना मलिका-ए-गजल बेगम अख्तर की गजल का शेर-‘मेरे हमनफस, मेरे हमनवा, मुझे दोस्त बन के दगा न दे।’

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उनके लब से बोल फूटे तो तालियां गूंज पड़ीं। पर इस गूंज के बीच शेर के पीछे छिपी मंशा न गुम हो जाए, सो सवाल उछाल दिया-राजनीति में दगा किससे मिलती है? खुद ही जवाब दिया- अपने, दोस्त और परिचित ही दगा देते हैं। कहा, इस गजल को समाजवादियों की गजल माना जा सकता है।
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मौका था मलिका-ए-गजल बेगम अख्तर की याद में शुरू किए अवॉर्ड को बांटने का। गोमतीनगर स्थित संगीत नाटक अकादमी का संत गाडगे सभागार खचाखच भरा था।

हॉल में पुरस्कृत होने वाली दोनों प्रख्यात महिला कलाकार जरीना बेगम और सुनीता झिंगरन मौजूद थीं। गीत-संगीत, साहित्य, सियासत और लखनवी तहजीब से जुड़े लोग मौजूद थे। तालियों की गड़गड़ाहट और नारेबाजी के बीच अखिलेश मुस्कुराहट के साथ बोलने के लिए खड़े हुए।
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'ज्यादा गजले सुनता नहीं हूं, इतनी फुर्सत भी नहीं मिलती'

Akhilesh gives political message through a Urdu template.

मौके का इस्तेमाल अखिलेश ने सियासत की धोखेबाजी पर तंज कसने के लिए किया। कहा, ज्यादा गजले सुनता नहीं हूं, इतनी फुर्सत भी नहीं मिलती। बेगम अख्तर की एक गजल सुनी थी। उसकी दो लाइनें काफी पसंद आईं।

राजनीति के मौजूदा हालात से जोड़ते हुए उन्होंने गजल का शेर पढ़ा, ‘मेरे हमनफस, मेरे हमनवां, मुझे दोस्त बन के दगा न दे ’। उनकी उन्होंने श्रोताओं की तालियों से खूब दाद मिली।

यूं ही नहीं ये दर्द, कुछ तो सबब है
मुख्यमंत्री के शेर पढ़ने के सियासी सबब निकाले जा रहे हैं।  यूं भी अखिलेश सीधे-सीधे कोई बात कहने से बचते हैं। वे इशारों ही इशारों में सब कुछ बयां करते हैं। दरअसल, सियासत में जो लोग कभी मालाएं डालते हैं, वक्त के साथ वे ही दूसरे पाले में खड़े हो जाते हैं। विरोध में गरजने वाले वाहवाही करने लगते हैं।

समाजवादी पार्टी ने भी ऐसा दौर देखा है। माना जा रहा है कि परिवार से लेकर वरिष्ठ नेताओं तक से संतुलन बैठाने की कला में माहिर अखिलेश ने दगाबाजी करने वालों को गजल के शेर के जरिये संदेश दिया है।

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