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दास ने बताया, टिकट के लिए कितनी रकम लेती हैं माया!

Thu, 06 Nov 2014 01:12 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 06 Nov 2014 01:12 PM IST
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Akhilesh Das reveals truth about BSP.

बसपा सुप्रीमो मायावती के आरोपों का करारा जवाब देते हुए डॉ. अखिलेश दास ने कहा कि बसपा पैसे की पार्टी है। चुनाव के लिए रुपये वसूले जाते हैं। बिना पैसे दिए टिकट टिकट नहीं मिलता। ऐसे में उन्हें बसपा से अलग होने पर मजबूर होना पड़ा।

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बसपा से इस्तीफा देने के दो दिन बाद ही पूर्व केंद्रीय मंत्री व बसपा के राज्यसभा सदस्य डॉ. अखिलेश दास ने मायावती के आरोपों को गलत ठहराया।

दास ने बुधवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि अफसोस है कि एक वरिष्ठ नेता होने के बाद भी वे इस तरह का बयान दे रही हैं। उन्हें ऐसा करना शोभा नहीं देता।
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संयम रखें नहीं तो उठा सकती हैं नुकसान
दास ने कहा कि वे मायावती के साथ छह साल तक रहे हैं। इसलिए उन्हें सलाह देता हूं कि वे संयम रखें और वैश्य समाज सहित सर्व समाज का अपमान न करें। नहीं तो उन्हें 2017 के चुनाव में भारी नुकसान हो सकता है।
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इस तरह लिए जाते हैं टिकट के लिए पैसे

Akhilesh Das reveals truth about BSP.

दास ने बसपा का रेट कार्ड खोलते हुए कहा कि विधान सभा चुनाव में सामान्य सीट के लिए एक करोड़ और आरक्षित सीट के लिए 50 लाख की मांग की जाती है।

महाराष्ट्र व हरियाणा के चुनाव में दस-दस लाख रुपये मांगे जा रहे थे। मैंने रुपये देने से मना कर दिया था। दास ने कहा कि पार्टी के नेता, विधायक, कोआर्डिनेटर अपनी व्यथा बताते थे। मैं यह तो नहीं कह सकता कि किसी ने मेरे सामने रुपये दिए, लेकिन ऐसा लेनदेन किसी के सामने किया भी नहीं जाता।

मायावती ने खुद बुलाया था

दास ने कहा कि मायावती मेरे ऊपर आरोप लगा रही हैं जबकि हकीकत यह है कि 2008 में मैं कांग्रेस का सदस्य था। मायावती ने मुझे खुद बसपा की सदस्यता के लिए आमंत्रित किया था। इसके बाद मैं दो-तीन बार उनके दिल्ली स्थित आवास पर गया था। उन्होंने मुझसे लखनऊ से चुनाव लड़ने को कहा। तब मैंने बसपा ज्वाइन कर लिया और लखनऊ से लोकसभा का चुनाव लड़ा।

राजधानी में 5-6 फीसदी जनाधार वाली बसपा को 25 फीसदी वोट लिए। इसका फायदा यह हुआ कि यूपी में बसपा को 20 सीटें मिलीं। उन्होंने मुझसे राज्यसभा भेजने का वादा भी किया था।

मैं जोड़ता रहा, वे अपमानित करती रहीं

Akhilesh Das reveals truth about BSP.

दास ने कहा कि उनके ऊपर आरोप लगाया गया है कि वे वैश्य समाज को जोड़ नहीं सके। लेकिन मैंने उन्हें जोड़ा और मायावती वैश्य समाज को लगातार अपमानित करती रहीं।

बनवारी लाल कंछल, सुधीर हलवासिया, नंदी गुप्ता आदि को अपमानित कर निकाल दिया। माया की ऐसी नीतियों से ऐसा लगता है कि 2017 के चुनाव में सर्वसमाज बसपा से दूर रहेगा।

चुनाव नहीं लड़ना चाहते
अब किस पार्टी से चुनाव लड़ना चाहते हैं, इस सवाल पर दास ने कहा कि वे चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं। वे खेल जगत से जुड़े हुए हैं और कई संघों के पदाधिकारी हैं। एक खेल आयोजन में पेरु जाना पहले से ही तय है। इसलिए चुनाव के दौरान यहां नहीं रहूंगा।

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